समाचार-गढ़ 4 अक्टूबर, 2026।
पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव के बीच पाकिस्तानी सेना को लेकर बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, खैबर पख्तूनख्वा में डूरंड लाइन के पास पाकिस्तानी सेना की करीब 30 फौजी पोस्ट खाली हो गई हैं। इनमें फ्रंटियर इलाके की 20 और वजीरिस्तान की 10 पोस्ट शामिल बताई गई हैं। दावा है कि इन इलाकों में अब अफगान तालिबान का प्रभाव बढ़ गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अफगान लड़ाकों के दबाव के चलते पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को करीब 5 हजार सैनिकों को संबंधित फौजी ठिकानों पर वापस लौटने का आदेश देना पड़ा। इन पोस्ट से हटने के बाद पाकिस्तानी सैनिकों के खैबर सूबे के कैंट मुख्यालयों में पहुंचने की बात कही गई है।
स्थानीय कबाइली जिरगा के हाथ में पहुंचा नियंत्रण
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन इलाकों से पाकिस्तानी सेना की पोस्ट खाली हुई हैं, वहां स्थानीय कबाइली जिरगा का प्रभाव बढ़ गया है। अफगान पंचायत जैसी यह जिरगा स्थानीय स्तर पर फरमान जारी करती है।
यह भी दावा किया गया है कि फरवरी के बाद से अफगान तालिबान ने इन इलाकों में एक के बाद एक पाकिस्तानी फौजी चौकियों पर कब्जा किया है। वहीं, पाकिस्तानी सेना की ओर से तालिबान के खिलाफ हवाई हमले किए जाने की बात कही गई है।
अफगान बॉर्डर पर पोस्टिंग से बच रहे पाक सैनिक?
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी सैनिक अफगानिस्तान सीमा पर पोस्टिंग से बचने की कोशिश कर रहे हैं। इसको लेकर इस्लामाबाद और रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालयों में सैनिकों की ओर से अर्जियां दिए जाने की बात कही गई है, जिनमें डूरंड लाइन पर तैनाती नहीं करने की मांग की गई है।
सीमा पर करीब 600 सैन्य पोस्ट होने का दावा किया गया है, लेकिन इन इलाकों में पाकिस्तानी सेना की संख्या लगातार कम होने की बात कही गई है।
रॉकेट लॉन्चर बना पाकिस्तानी पोस्ट के लिए खतरा
अफगान बॉर्डर पर पाकिस्तानी सैनिकों के लिए एक और बड़ा खतरा रॉकेट लॉन्चर बताया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, अफगान तालिबान लड़ाके पुराने मॉडल की सोवियत जीपों पर लगे रॉकेट लॉन्चरों का इस्तेमाल करते हैं और इनसे पाकिस्तानी सेना की चौकियों पर हमले किए जाते हैं।
इनमें कंधे से दागे जाने वाले RPG-7 रॉकेट लॉन्चर का भी जिक्र किया गया है। दावा है कि तालिबान ने पहले भी पाकिस्तानी सेना की चौकियों को इन हथियारों से निशाना बनाया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि डूरंड लाइन पर खैबर इलाके का ज्यादातर हिस्सा बर्फबारी से ढका रहता है। ऐसे में रॉकेट लॉन्चर और अन्य हथियारों से लैस लड़ाकों के लिए पाकिस्तानी चौकियों तक पहुंचना और हमला करना आसान हो सकता है।
डूरंड लाइन को लेकर अफगानिस्तान-पाकिस्तान में मतभेद
डूरंड लाइन करीब 2,640 किलोमीटर लंबी सीमा रेखा है। इसे 1893 में ब्रिटिश अधिकारी मॉर्टिमर डूरंड ने निर्धारित किया था। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि अफगानिस्तान इसे मान्यता नहीं देता।
सीमा को लेकर दोनों देशों के बीच लंबे समय से विवाद रहा है। मौजूदा तनाव के बीच इसी इलाके में पाकिस्तानी सेना और अफगान तालिबान के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है।
‘कागजों में पाक, जमीन पर अफगान मजबूत’
ब्रिटेन की रॉयल मिलिट्री अकादमी सैंडहर्स्ट के प्रोफेसर एंड्रयू फॉक्स के मुताबिक, अमेरिकी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन में अफगानिस्तान की पोस्टिंग के दौरान कई बातें उनके सामने आईं। उनका कहना है कि अफगानिस्तान सदियों से संघर्ष करता रहा है और इसकी एक बड़ी वजह वहां का भूगोल है।
फॉक्स के मुताबिक, सैन्य साजो-सामान और नफरी के लिहाज से पाकिस्तान कागजों पर मजबूत है, लेकिन जमीन पर अफगान लड़ाकों का मुकाबला करना आसान नहीं है। उनका आकलन है कि अफगान लड़ाकों ने पाकिस्तानी सेना को कड़ी चुनौती दी है और आने वाले समय में भी अफगान तालिबान के पास मौजूद हथियारों से बड़े हमले किए जा सकते हैं।








