समाचार-गढ़ 11 अक्टूबर, 2026।
आसमान से बारिश की बूंदें गिरना आम बात है, लेकिन सोचिए, अगर अचानक आसमान से मछलियां बरसने लगें तो क्या होगा? अमेरिका के लुइसियाना में करीब 80 साल पहले ऐसा ही हैरान करने वाला वाकया सामने आया था। सड़कों, फुटपाथों और घरों के लॉन में मछलियां बिखरी पड़ी थीं। यहां तक कि एक शख्स के सिर पर भी मछली आ गिरी। सबसे हैरानी की बात यह थी कि ये मछलियां स्थानीय जलस्रोतों में पाई जाने वाली मीठे पानी की प्रजातियां थीं। इस घटना को आज भी ‘फिश रेन’ यानी मछलियों की बारिश के चर्चित उदाहरणों में गिना जाता है।
1947 में सुबह-सुबह दिखा हैरान करने वाला नजारा
यह घटना 23 अक्टूबर 1947 को अमेरिका के लुइसियाना राज्य के मार्क्सविले शहर में हुई थी। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, जीवविज्ञानी अलेक्जेंडर बाजकोव अपनी पत्नी वर्जीनिया के साथ एक डायनर में खाना खा रहे थे। तभी वहां काम करने वाली वेट्रेस ने उन्हें बताया कि बाहर मछलियां गिर रही हैं।
यह सुनकर बाजकोव खुद बाहर देखने पहुंचे। बाद में उन्होंने एक साइंस जर्नल में इस घटना का विवरण दिया। उनके मुताबिक, करीब 1,000 फीट लंबे और 80 फीट चौड़े क्षेत्र में मछलियां गिरी हुई थीं। कुछ जगहों पर मछलियों की परत कई इंच तक दिखाई दे रही थी।
सड़क से लेकर लोगों के सिर तक गिरीं मछलियां
बाजकोव के विवरण के अनुसार, मछलियां सड़कों, फुटपाथों और घरों के लॉन में बिखरी हुई थीं। मार्क्सविले बैंक के एक निदेशक को भी अपने आंगन में मछलियां मिलीं। वहीं, बैंक के कैशियर जे.ई. ग्रेमिलियन के सिर पर हिकरी शैड प्रजाति की एक मछली गिर गई थी।
गिरने वाली मछलियों में लार्जमाउथ बास, गॉगल-आई, सनफिश, मिनोज और हिकरी शैड जैसी प्रजातियां शामिल थीं। ये सभी मीठे पानी में पाई जाती हैं। बाजकोव ने अपने संग्रह में मिली सबसे बड़ी मछली की लंबाई करीब 9.25 इंच यानी लगभग 24 सेंटीमीटर बताई थी।
उस समय मछलियों के ताजा और खाने योग्य होने की बात भी दर्ज की गई थी। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यही था कि ये मछलियां आसमान से आई कहां से थीं?
क्या पानी के बवंडर ने हवा में उछाल दी थीं मछलियां?
इस घटना को समझाने के लिए बाजकोव ने एक संभावित वजह बताई थी। उनका मानना था कि किसी वॉटरस्पाउट यानी पानी के ऊपर बनने वाले बवंडर ने आसपास की उथली झीलों या जलस्रोतों से मछलियों को खींचकर हवा में उठा लिया होगा। इसके बाद हवा के साथ आगे बढ़ने पर मछलियां किसी दूसरे स्थान पर गिर गई होंगी।
हालांकि, यह सिर्फ एक संभावित व्याख्या थी। उस समय मौसम विभाग के पास ऐसी किसी घटना का स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं था, जिससे इस सिद्धांत की पुष्टि की जा सके। लुइसियाना के वन्यजीव और मत्स्य विभाग के जीवविज्ञानी जेम्स नेल्सन गोवानलोच ने भी घटना से एक दिन पहले कई छोटे बवंडर जैसे भंवर देखे जाने की जानकारी दी थी। लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उन्हीं भंवरों ने मछलियों को उठाकर गिराया था।
क्या सिर्फ अमेरिका में होती है मछलियों की बारिश?
मछलियों के आसमान से गिरने की घटनाओं का जिक्र केवल मार्क्सविले तक सीमित नहीं है। गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स के अनुसार, मछली विशेषज्ञ ई.डब्ल्यू. गडगर ने 1946 की अपनी समीक्षा में ऐसी 78 घटनाओं का उल्लेख किया था, जिनके बारे में पर्याप्त जानकारी उपलब्ध थी।
अमेरिका के टेक्सास स्थित टेक्सारकाना में भी 2021 के आखिर में आसमान से मछलियां गिरने की सूचना सामने आई थी। ऐसी घटनाओं के पीछे जल-बवंडर या तेज हवा की भूमिका होने की संभावना जताई जाती रही है, लेकिन हर मामले में कारण की पुष्टि होना जरूरी नहीं है।
मार्क्सविले की घटना आज भी इसलिए दिलचस्प बनी हुई है, क्योंकि प्रत्यक्ष विवरण मौजूद होने के बावजूद यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सका कि मछलियां जमीन तक पहुंचीं कैसे। पानी के बवंडर का सिद्धांत एक संभावित जवाब देता है, लेकिन 1947 में हुई उस अजीबोगरीब ‘फिश रेन’ का असली कारण अब भी निर्णायक रूप से साबित नहीं हुआ है।










