Nature Nature

CJP Protest: मेट्रो बंदी और हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अनुच्छेद 358 के जरिए उठे नागरिक अधिकारों पर सवाल

Nature

समाचार-गढ़ 11 अक्टूबर, 2026।

दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों और पुलिस कार्रवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। रविवार, 11 अक्टूबर को हुई विशेष सुनवाई में अदालत ने बैरिकेडिंग, मेट्रो और रेल सेवाओं पर पाबंदियों तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने पर संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन इसका इस्तेमाल कानून के दायरे में रहकर होना चाहिए। साथ ही, आम लोगों की आवाजाही को अनावश्यक रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए।

बैरिकेड हटाने और मेट्रो सेवा सामान्य रखने के निर्देश

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में प्रदर्शन का ऐलान किया था। इसके मद्देनजर दिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हुआ।

वकील शैलेन्द्र मणि त्रिपाठी ने अदालत के 9 अक्टूबर के आदेश का पालन नहीं होने का आरोप लगाते हुए अवमानना याचिका दायर की। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जहां बैरिकेड रखना बेहद जरूरी न हो, वहां उन्हें हटाया जाए और लोगों की आवाजाही सामान्य की जाए। अदालत ने मेट्रो और रेल सेवाओं को सामान्य रूप से चलाने पर भी जोर दिया। हालांकि, सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जरूरत पड़ने पर कानून के अनुसार उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं।

दिल्ली पुलिस और DMRC समेत अधिकारियों को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस, केंद्रीय गृह सचिव और दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) समेत संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है। अदालत ने प्रदर्शन के दौरान लोगों को हिरासत में लिए जाने और प्रतिबंधों को लागू करने की परिस्थितियों पर भी सवाल उठाए।

अधिकारियों को मंगलवार तक अनुपालन रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया गया है। अदालत की ओर से नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि अवमानना साबित हो गई है; अधिकारियों के जवाब और आगे की सुनवाई में मामले की स्थिति स्पष्ट होगी।

‘प्रदर्शन का अधिकार है, लेकिन कानून के दायरे में’

सुनवाई के दौरान पीठ ने स्पष्ट किया कि शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन नागरिकों का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार कानून और लागू नियमों से ऊपर नहीं है। प्रशासन सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठा सकता है, पर प्रतिबंध उचित और परिस्थिति के अनुपात में होने चाहिए।

अदालत के सामने यह मुद्दा भी उठा कि क्या प्रदर्शन रोकने के लिए मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाना जरूरी था। सुनवाई में आम लोगों की आवाजाही और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित करने से बचने पर जोर दिया गया।

अनुच्छेद 358 का जिक्र क्यों हुआ?

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी ने नागरिकों के मौलिक अधिकारों का सवाल उठाते हुए संविधान के अनुच्छेद 358 का जिक्र किया। उन्होंने मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, इंटरनेट सेवाओं में रुकावट और लोगों को हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठाते हुए पूछा कि क्या ऐसी कार्रवाई नागरिक स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करती।

यहां अनुच्छेद 358 की संवैधानिक स्थिति समझना जरूरी है। यह प्रावधान राष्ट्रीय आपातकाल के कुछ विशेष हालात में लागू होता है—जब आपातकाल युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर घोषित किया गया हो। ऐसी स्थिति में अनुच्छेद 19 के अधिकारों पर संविधान में निर्धारित तरीके से प्रभाव पड़ता है। यह प्रावधान सामान्य कानून-व्यवस्था की कार्रवाई या किसी प्रदर्शन के कारण अपने आप लागू नहीं हो जाता।

अनुच्छेद 19 नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने तथा संगठन बनाने जैसे अधिकार देता है। हालांकि, शांतिपूर्ण सभा और अभिव्यक्ति के अधिकार भी उचित कानूनी प्रतिबंधों के अधीन हैं। इसलिए सुनवाई में अनुच्छेद 358 का उल्लेख होना अपने आप में यह निष्कर्ष नहीं है कि देश या दिल्ली में आपातकाल जैसी स्थिति लागू है।

सरकार ने आरोपों पर जवाब देने के लिए समय मांगा

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने आरोपों को गलत बताया और कहा कि सरकार को याचिकाओं पर जवाब देने के लिए समय चाहिए। दूसरी ओर, याचिकाकर्ताओं ने पुलिस कार्रवाई, हिरासत और सार्वजनिक परिवहन पर प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई।

अब संबंधित अधिकारियों की अनुपालन रिपोर्ट और आगे की सुनवाई अहम होगी। अदालत को यह देखना है कि सुरक्षा के नाम पर लगाए गए प्रतिबंध जरूरी और कानून के अनुरूप थे या नहीं, और क्या लोगों की आवाजाही तथा शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों की पर्याप्त रक्षा की गई।

  • Related Posts

    उज्जैन में हनुमान प्रतिमा की गहराई का राज जानने पहुंची टीम, मशीनें बंद होते ही शुरू हुई चमत्कार की चर्चा

    समाचार गढ़ 31 अक्टूबर 2026। Ujjain News: मध्य प्रदेश के उज्जैन में प्रसिद्ध खड़े हनुमान जी मंदिर की प्रतिमा की गहराई जांचने पहुंची प्रशासनिक टीम उस समय चर्चा में आ…

    गरीबी के खिलाफ भारत की बड़ी जीत! 12 साल में 49.6 करोड़ लोग निकले बाहर, फिर भी कमाई में 13 गुना की खाई

    समाचार गढ़ 31 अक्टूबर 2026। India Poverty Report: भारत ने गरीबी कम करने के मोर्चे पर पिछले 12 वर्षों में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। विश्व बैंक की अक्टूबर 2026…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    उज्जैन में हनुमान प्रतिमा की गहराई का राज जानने पहुंची टीम, मशीनें बंद होते ही शुरू हुई चमत्कार की चर्चा

    उज्जैन में हनुमान प्रतिमा की गहराई का राज जानने पहुंची टीम, मशीनें बंद होते ही शुरू हुई चमत्कार की चर्चा

    गरीबी के खिलाफ भारत की बड़ी जीत! 12 साल में 49.6 करोड़ लोग निकले बाहर, फिर भी कमाई में 13 गुना की खाई

    गरीबी के खिलाफ भारत की बड़ी जीत! 12 साल में 49.6 करोड़ लोग निकले बाहर, फिर भी कमाई में 13 गुना की खाई

    FATF की बैठक में पाकिस्तान पर कोई नई कार्रवाई नहीं, जैश की ऑनलाइन फंडिंग पर भी नहीं मिला जवाब; 2030 तक जारी रहेगी समीक्षा

    FATF की बैठक में पाकिस्तान पर कोई नई कार्रवाई नहीं, जैश की ऑनलाइन फंडिंग पर भी नहीं मिला जवाब; 2030 तक जारी रहेगी समीक्षा

    होर्मुज में 27 भारतीयों वाले तेल टैंकर पर हमला, इंजन रूम में लगी आग; पहली बार लिम्पेट माइन्स से बनाया निशाना

    होर्मुज में 27 भारतीयों वाले तेल टैंकर पर हमला, इंजन रूम में लगी आग; पहली बार लिम्पेट माइन्स से बनाया निशाना

    चीन-पाक की समुद्री गतिविधियों के बीच भारत का बड़ा दांव, ₹40 हजार करोड़ से बनेंगे 8 नए युद्धपोत

    चीन-पाक की समुद्री गतिविधियों के बीच भारत का बड़ा दांव, ₹40 हजार करोड़ से बनेंगे 8 नए युद्धपोत

    न सड़क, न गाड़ियों का शोर… यहां एक-दूसरे की छतों पर चलते हैं लोग, 1000 साल पुराना है ये गांव

    न सड़क, न गाड़ियों का शोर… यहां एक-दूसरे की छतों पर चलते हैं लोग, 1000 साल पुराना है ये गांव
    Social Media Buttons
    error: Content is protected !!
    Verified by MonsterInsights