समाचार-गढ़ 18 अक्टूबर, 2026।
Rajasthan Cyber Crime: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच राजस्थान से एक राहत भरी खबर सामने आई है। पुलिस विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, ठगी की रकम वापस दिलाने के मामले में राजस्थान की रिकवरी दर 36 प्रतिशत है। इस आंकड़े के साथ राज्य देश में दूसरे स्थान पर है, जबकि गुजरात 38 प्रतिशत रिकवरी दर के साथ पहले नंबर पर है। हालांकि, रिकवरी के मामले में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद राजस्थान में साइबर अपराध की चुनौती बनी हुई है। पिछले साढ़े तीन वर्षों में लाखों सिम कार्ड और मोबाइल डिवाइस के IMEI नंबर ब्लॉक किए गए, लेकिन ठगी की रिपोर्ट की गई रकम हजारों करोड़ रुपये तक पहुंच गई।
साइबर ठगी की रकम रोकने में राजस्थान और गुजरात की स्थिति
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में ₹1,509.13 करोड़ की साइबर ठगी हुई, जिसमें से ₹183.39 करोड़ खातों में रोके गए। वहीं, गुजरात में पिछले साल ₹2,745.90 करोड़ की ठगी दर्ज हुई और ₹556.98 करोड़ की रकम खातों में रोकी गई।
रिकवरी दर के मामले में राजस्थान और गुजरात के बीच अंतर कम है। राजस्थान की दर 36 प्रतिशत और गुजरात की 38 प्रतिशत बताई गई है। इस आधार पर राजस्थान महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश से आगे है।
हालांकि, खातों में रकम रोकना और पीड़ितों को पूरी रकम वापस मिलना अलग-अलग बातें हैं। इसलिए रिकवरी दर को समझते समय यह अंतर ध्यान में रखना जरूरी है।
3 लाख से ज्यादा सिम कार्ड और 1.46 लाख IMEI नंबर ब्लॉक
साइबर अपराध पर लगाम लगाने के लिए राजस्थान में पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस अवधि में 3 लाख से अधिक सिम कार्ड और 1.46 लाख से ज्यादा मोबाइल IMEI नंबर ब्लॉक किए गए।
इसके बावजूद साइबर ठगी की रिपोर्ट की गई कुल रकम करीब ₹2,308 करोड़ तक पहुंचने की बात सामने आई है। ये आंकड़े बताते हैं कि साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ ठगी की रकम को समय रहते रोकना और पीड़ितों तक वापस पहुंचाना भी बड़ी चुनौती है।
राजस्थान में हर साल बढ़ीं साइबर ठगी की शिकायतें
राज्य में साइबर ठगी की शिकायतों और आर्थिक नुकसान के आंकड़े भी चिंता बढ़ाते हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 2023 से जुलाई 2026 तक स्थिति इस प्रकार रही:
| वर्ष | शिकायतें | ठगी की राशि |
|---|---|---|
| 2023 | 77,680 | ₹354.71 करोड़ |
| 2024 | 1 लाख से अधिक | ₹796.56 करोड़ |
| 2025 | 1,27,782 | ₹768.46 करोड़ |
| 2026 (जुलाई तक) | 96,886 | ₹387.53 करोड़ |
आंकड़ों के मुताबिक, 2024 में ठगी की रिपोर्ट की गई रकम बढ़कर ₹796.56 करोड़ हो गई। 2025 में यह ₹768.46 करोड़ रही, जबकि 2026 में जुलाई तक ₹387.53 करोड़ की ठगी दर्ज की गई।
इन आंकड़ों की तुलना करते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि 2026 के आंकड़े केवल जुलाई तक के हैं, जबकि पिछले वर्षों के आंकड़े पूरे साल के हैं।
एक लाख रुपये या उससे अधिक की ठगी पर जीरो FIR
साइबर ठगी के मामलों में शुरुआती कार्रवाई तेज करने के लिए राजस्थान में एक लाख रुपये या उससे अधिक की ठगी के मामलों में जीरो FIR दर्ज करने की व्यवस्था लागू की गई है। इसका उद्देश्य शिकायत मिलने के बाद शुरुआती स्तर पर कार्रवाई में देरी कम करना है।
साइबर अपराध के मामलों में शुरुआती समय बेहद अहम होता है। ठगी के तुरंत बाद शिकायत मिलने पर संदिग्ध लेनदेन को रोकने या रकम को खातों में फ्रीज कराने की संभावना बढ़ सकती है।
म्यूल अकाउंट साइबर ठगी की बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों के मुताबिक, साइबर ठगी में म्यूल अकाउंट यानी ऐसे बैंक खाते बड़ी भूमिका निभाते हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी की रकम को एक खाते से दूसरे खाते में पहुंचाने के लिए किया जाता है। कई मामलों में खाताधारक कमीशन के लालच में अपने बैंक खाते का इस्तेमाल होने देते हैं, जबकि कुछ लोगों के खातों का दुरुपयोग भी किया जा सकता है।
राजस्थान के मेवात क्षेत्र में म्यूल अकाउंट के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे खातों पर सख्ती के साथ आम लोगों को जागरूक करना जरूरी है, ताकि वे अनजान लोगों को बैंक खाते, OTP या अन्य वित्तीय जानकारी देने से बचें।
बेहतर रिकवरी के बावजूद चुनौती बरकरार
साइबर ठगी की रकम वापस दिलाने में राजस्थान की 36 प्रतिशत रिकवरी दर राज्य के लिए सकारात्मक संकेत है। लेकिन शिकायतों की बड़ी संख्या और करोड़ों रुपये के नुकसान से साफ है कि अभी चुनौती खत्म नहीं हुई है।
साइबर अपराध से निपटने के लिए पुलिस कार्रवाई, संदिग्ध खातों पर निगरानी, रकम को जल्द रोकने की व्यवस्था और आम लोगों में जागरूकता—इन सभी पर एक साथ काम करना जरूरी है।








