समाचार-गढ़ 20 अक्टूबर, 2026।
Agra News: सोशल मीडिया पर दिखने वाली कामयाबी की कहानियों ने आगरा के तीन दोस्तों को इस कदर प्रभावित किया कि उन्होंने घर छोड़कर बड़ा आदमी बनने की ठान ली। किसी ने पढ़ाई छोड़ने का मन बनाया, तो किसी ने अपने मोबाइल तक को बेच दिया। तीनों का सपना था कि पहले नौकरी करेंगे, फिर अपना काम शुरू कर लग्जरी जिंदगी जिएंगे और एक दिन सफल होकर घर लौटेंगे। इसी इरादे से वे मुंबई जाने के लिए निकले, लेकिन सफर के दौरान ऐसी परेशानी आई कि उन्हें लौटने का फैसला करना पड़ा। उधर, घर से मिले उनके पत्र ने परिजनों की चिंता बढ़ा दी थी। आखिरकार पुलिस ने तीनों को सकुशल तलाशकर परिवार से मिला दिया।
रील में दिखी सफलता, तो घर छोड़ने का बनाया प्लान
तीनों दोस्त आगरा के लोहामंडी क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनमें दो नाबालिग हैं, जो 12वीं कक्षा में पढ़ रहे हैं, जबकि तीसरे की उम्र 20 साल है। वह आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ चुका था। दो दोस्तों में से एक मूल रूप से दिल्ली का रहने वाला है और पिछले करीब 12 साल से अपने मामा के घर रह रहा है। उसके मामा जूते का काम करते हैं, जबकि दूसरे नाबालिग के पिता घर में ही जूते का कारखाना चलाते हैं।
पुलिस से बातचीत में तीनों ने बताया कि वे इंस्टाग्राम पर ऐसी रील देखते थे, जिनमें लोगों को घर छोड़ने के बाद सफल होते और लखपति-करोड़पति बनते दिखाया जाता था। इन कहानियों से प्रभावित होकर उनके मन में भी बड़ा आदमी बनने का सपना जागा।
उन्होंने सोचा कि पहले किसी जगह छोटी-मोटी नौकरी करेंगे और बाद में अपना काम शुरू करेंगे। इसके बाद एक दिन कामयाब बनकर घर लौटेंगे, ताकि परिवार के लोग भी उनकी काबिलियत की तारीफ करें।
घर से निकलने से पहले लिखा पत्र, मोबाइल भी बेच दिया
जानकारी के मुताबिक, 17 अक्टूबर को दोनों नाबालिग पढ़ाई और ट्यूशन का कहकर घर से निकले थे। वे अपने स्कूल बैग में कपड़े रखकर लाए थे। तीनों ने पहले से घर छोड़कर बाहर जाने की योजना बनाई थी। इनमें से एक ने अपना मोबाइल फोन करीब 12 हजार रुपये में बेच दिया।
दोनों नाबालिग अपने घरों में पत्र भी छोड़कर आए थे। पत्र में उन्होंने लिखा था कि पढ़ाई-लिखाई से सिर्फ नौकरी मिल सकती है, बड़ा आदमी नहीं बना जा सकता। उन्होंने घर लौटने से पहले कुछ बनकर आने की बात लिखी थी।
जब परिजनों को पत्र मिला और बेटों का पता नहीं चला, तो उनकी चिंता बढ़ गई। परिवार ने पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद तीनों की तलाश शुरू की गई।
मुंबई जाने निकले, जयपुर पहुंचकर फंस गए
घर से निकलने के बाद तीनों दोस्त एक जगह मिले और फिर ईदगाह स्टेशन पहुंचे। उनका इरादा मुंबई जाने का था, लेकिन बस नहीं मिलने के कारण वे जयपुर जाने वाली बस में बैठ गए। उन्हें उम्मीद थी कि जयपुर पहुंचकर आगे का सफर तय कर लेंगे।
हालांकि, जयपुर रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद उन्हें ट्रेन का इंतजार करना पड़ा। इस दौरान खाने-पीने की परेशानी भी होने लगी। जिस सफर को उन्होंने बड़े सपनों की शुरुआत समझा था, वह उनकी उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
मोबाइल की लोकेशन से पुलिस को मिला सुराग
परिजनों की शिकायत पर लोहामंडी थाने की पुलिस ने तलाश शुरू की। उपनिरीक्षक सोनू कुमार की टीम ने किशोरों के मोबाइल फोन की लोकेशन पता करने की कोशिश की, लेकिन उनके फोन बंद हो चुके थे।
उधर, ट्रेन नहीं मिलने और रास्ते में परेशानी होने के बाद तीनों ने वापस लौटने का फैसला किया। उन्होंने सोचा कि आगरा पहुंचने के लिए ट्रेन पकड़ लेंगे। इसी दौरान भरतपुर के पास उनमें से एक ने अपना मोबाइल चालू किया, जिससे पुलिस को उनकी लोकेशन का सुराग मिल गया।
तीनों के आगरा आने की जानकारी मिलने पर पुलिस ने उन्हें तलाश लिया। इसके बाद उन्हें सुरक्षित उनके परिजनों तक पहुंचा दिया गया।
पुलिस ने समझाया- रील और असल जिंदगी में फर्क होता है
पुलिस ने तीनों से बातचीत की और उनके मोबाइल फोन भी चेक किए। इस दौरान सामने आया कि उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर सफलता से जुड़ी कई रील थीं। वे एक-दूसरे को भी ऐसी कहानियां साझा करते रहते थे, जिनमें कम समय में बड़ा आदमी बनने के सपने दिखाए जाते थे।
एसीपी लोहामंडी गौरव सिंह ने बताया कि तीनों को समझाया गया है कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली जिंदगी और वास्तविकता में काफी अंतर होता है। रील में दिखाई गई बातों पर पूरी तरह भरोसा नहीं करना चाहिए। उन्होंने बच्चों को पहले पढ़ाई पर ध्यान देने और भविष्य से जुड़ा कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले माता-पिता और परिजनों से सलाह लेने की समझाइश दी।
तीनों दोस्तों का घर छोड़कर निकलना इस बात की याद दिलाता है कि सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली सफलता की कहानियां कम उम्र के बच्चों की सोच को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में ऑनलाइन दिखने वाली चमक-दमक के पीछे की वास्तविकता समझना और किसी भी बड़े फैसले से पहले परिवार से बात करना जरूरी है।








