धनतेरस पर आजमाएं ये अचूक उपाय झमाझम धन बरसेगा आंगन में
समाचार-गढ़। क्षेत्र के प्रसिद्ध ज्योतिषी राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय के पुत्र आचार्य राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ने बताया कि सनातन धर्म का मुख्य पर्व दीपावली इस वर्ष दिनांक 24-10-2022 वार सोमवार को हर्षोल्लास के साथ मनाया जाएगा। दीपावली पर्व हर वर्ष कार्तिक कृष्णा अमावस्या को मनाया जाता है किंतु इस वर्ष सूर्य ग्रहण होने के कारण दीपावली पर्व कार्तिक कृष्णा 14 को ही मनाया जाएगा। वर्तमान युग में अर्थ प्रधान युग होने के कारण हर व्यक्ति को धन की सख्त आवश्यकता होती है शास्त्रों के दीपावली के दिन विधि – विधान से महालक्ष्मी पूजन करने से धन की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार किसी भी प्रकार के अनुष्ठान में शुभ मुहूर्त का विशेष महत्व होता है। तो आइए आज हम जानते हैं कि पूजन का शुभ मुहूर्त का समय कौनसा है। एवं कौनसे विशेष उपाय करने से लक्ष्मी की शिघ्र प्राप्ति होती है ?
1.धनत्रयोदशी (धनतेरस)
शुभ संवत 2079 कार्त्तिक कृष्णा 13, वार रविवार दिनांक 23-10- 2022, चंद्रराशि कन्या, नक्षत्र- उत्तराफाल्गुनी दोपहर 2:33 उपरांत हस्त
- अभिजीत दोपहर 11:54से 12:42 तक
- कुंभ लग्न – दोपहर 02:41 से 04:10 बजे तक
- वृषभ लग्न – रात्रि 07:17 से 09:13 बजे तक
- मिथुन लग्न- रात्रि 09:14 से 11:26 तक
- सिंह लग्न – रात्रि 01:45 से 03:59 तक
2.यमदीपदान एवं श्री पूजन मुहूर्त्त
शुभ संवत 2079 कार्त्तिक कृष्णा 13, रविवार , दिनांक 23-10-2022
समय- सायं 5:59 बजे से रात्रि 8:32 बजे तक 24-10-2022
- महालक्ष्मी पूजन, गादी स्थापना, स्याही भरना कलम दवात संवारने का मुहूर्त्त
शुभ संवत 2079,कार्त्तिक कृष्णा 14, सोमवार, दिनांक 24/10/ 2022, नक्षत्र -हस्त, दोपहर 2:41 बजे उपरांत चित्रा,
चंद्र राशि- कन्या रात्रि 2:32 उपरांत तुला
- वृश्चिक लग्न-प्रातः 8:34 बजे से 10:51 तक
- कुंभ लग्न – दोपहर 2:38 बजे से 4:08 तक
- महालक्ष्मी पूजन मुहूर्त दिनांक 24 /10/ 2022
- कुंभ लग्न- दोपहर 2:38 बजे से 4:08 तक
- मेष लग्न- सांय 5:35 बजे से 7:12 तक
- वृषभ लग्न- सायं 7:14 बजे से रात्रि 9:10 तक
- मिथुन लग्न- रात्रि 9:11 बजे से रात्रि 11:22 तक
- सिंह लग्न- रात्रि 1:42 बजे से रात्रि 3:57 तक
- रोकड़ मिलान मुहूर्त्त दिनांक 26/10/2022
शुभ संवत् 2079 कार्तिक शुक्ला 1, बुधवार, दिनांक 26/10/ 2022, नक्षत्र- स्वाति चंद्रराशि-तुला
- प्रातः 6:46 से 9:34 तक (लाभ, अमृत वेला)
- दिवा 10:58 से 12:00 बजे तक (शुभ वेला) विशेष उपाय – धनतेरस एवं दीपावली को श्री महालक्ष्मी पूजन के साथ यदि श्री कनकधारा स्तोत्रम् एवं श्री सुक्तम् का पाठ करे तो अति उत्तम माना जाता है। शास्त्रों में ऐसा बताया गया है कि श्री कनकधारा स्तोत्रम् के पाठ से आचार्य श्री शंकर ने स्वर्ण वर्षा कराई थी
आपको अपनी राशि के अनुसार कौन से शुभ लग्न में पूजा करनी चाहिए ? जानकारी के लिए निचे दिए गए नंबरों पर पंडित जी से संपर्क कर सकते हैं
राजगुरु पंडित देवीलाल उपाध्याय 9414429246
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय
9829660721











