समाचार गढ़ 28 अक्टूबर 2026।
राजस्थान के पंचायती राज चुनाव 2026 के बीच नागौर जिले के माडपुरा गांव में सरपंच चुनाव का एक दिलचस्प मामला सामने आया है। यहां सरपंच पद की प्रत्याशी मगी देवी के समर्थकों ने जीत की अफवाह पर आधिकारिक नतीजे आने से करीब तीन घंटे पहले ही जश्न मनाना शुरू कर दिया। समर्थकों ने साफा पहनाया, फूल-मालाएं पहनाईं और ढोल-नगाड़ों के साथ विजयी जुलूस भी निकाल दिया। लेकिन रात करीब 2:30 बजे जब मतगणना का आधिकारिक परिणाम सामने आया, तो पूरा माहौल बदल गया। मगी देवी चुनाव जीतने के बजाय 169 वोटों से हार गईं। इस चुनाव में रूपी बाई ने जीत दर्ज की।
आधी रात को कैसे फैली जीत की अफवाह?
जानकारी के अनुसार, 24 अक्टूबर की रात माडपुरा ग्राम पंचायत में सरपंच पद के लिए मतगणना चल रही थी। इसी दौरान रात करीब 11:30 बजे मतगणना केंद्र के बाहर समर्थकों के बीच खबर फैल गई कि मगी देवी चुनाव जीत गई हैं।
आधिकारिक नतीजे की घोषणा होने से पहले ही समर्थकों ने इस खबर पर भरोसा कर लिया। इसके बाद जश्न की तैयारियां शुरू हो गईं। समर्थकों ने नतीजे की पुष्टि का इंतजार किए बिना ही मगी देवी की जीत मान ली और खुशी मनाने लगे।
साफा पहनाया, मालाएं डालीं और निकाला विजयी जुलूस
जीत की खबर से उत्साहित समर्थकों ने मगी देवी और उनके प्रतिनिधियों को साफा पहनाया। फूल-मालाएं पहनाकर ढोल-नगाड़ों के साथ गांव की गलियों में जुलूस निकाला गया। इस दौरान नारे लगाए गए और मिठाइयां भी बांटी गईं।
करीब दो से तीन घंटे तक गांव में जीत का माहौल बना रहा। समर्थकों को भरोसा था कि मगी देवी सरपंच का चुनाव जीत चुकी हैं। हालांकि, मतगणना का अंतिम परिणाम आना अभी बाकी था।
रात 2:30 बजे आया नतीजा, रूपी बाई ने मारी बाजी
रात करीब 2:30 बजे मतगणना पूरी होने के बाद आधिकारिक परिणाम घोषित किया गया। नतीजे में रूपी बाई को 1,581 वोट मिले, जबकि मगी देवी को 1,412 वोट ही प्राप्त हुए।
इस तरह रूपी बाई ने मगी देवी को 169 वोटों से हराकर सरपंच पद पर जीत दर्ज की। परिणाम सामने आते ही पहले से जश्न मना रहे मगी देवी के समर्थकों को निराशा का सामना करना पड़ा।
जश्न के बाद छाया सन्नाटा
जिस गांव में कुछ देर पहले ढोल-नगाड़ों की आवाज गूंज रही थी, वहां आधिकारिक नतीजे के बाद माहौल बदल गया। जीत की उम्मीद में जश्न मना रहे समर्थकों की खुशी मायूसी में बदल गई। वहीं, रूपी बाई की जीत की पुष्टि होने के बाद उनके समर्थकों में खुशी का माहौल रहा।
माडपुरा का यह मामला चुनावी नतीजों से पहले अफवाहों पर भरोसा करने के जोखिम को सामने लाता है। आधिकारिक परिणाम घोषित होने से पहले ही जीत का जश्न मनाने के कारण यह घटनाक्रम चर्चा में आ गया है।








