समाचार गढ़ 28 अक्टूबर 2026।
मध्य प्रदेश के देवास जिले में कथित जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में पुलिस ने नकली शराब बनाने और बेचने के नेटवर्क का खुलासा किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी अजय राठौर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद से घर में शराब बनाने का तरीका सीखा। इसके बाद रसायन और पानी मिलाकर नकली शराब तैयार की और उसे लाइसेंसी शराब की खाली बोतलों में भरकर बेचा। मामले में अब तक 10 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। हालांकि, कथित जहरीली शराब से हुई मौतों और बरामद शराब के बीच संबंध की पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।
AI की मदद से जुटाई जानकारी, रसायन मंगाकर बनाई नकली शराब
देवास कोतवाली थाना प्रभारी शशिकांत चौरसिया के मुताबिक, पुलिस ने सोमवार को अवैध शराब की बिक्री के मामले में 10 लोगों को गिरफ्तार किया था। आरोपियों के पास से देशी शराब की 6 पेटियां भी बरामद हुईं। पूछताछ और जांच के दौरान नकली शराब तैयार करने और उसे बेचने का मामला सामने आया।
पुलिस के अनुसार, अजय राठौर सितंबर से AI की मदद से घर में शराब बनाने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी जुटा रहा था। इसके बाद उसने इंदौर की एक निजी फर्म के माध्यम से रसायन मंगवाया। पुलिस ने फिलहाल रसायन का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।
खाली बोतलों में भरकर बाजार में बेची शराब
पुलिस की जांच में सामने आया कि अजय राठौर ने 2 से 7 अक्टूबर के बीच कबाड़ियों से लाइसेंसी शराब की खाली बोतलें हासिल की थीं। आरोप है कि इन्हीं बोतलों में रसायन और पानी से तैयार नकली शराब भरी गई। इस काम में अन्य आरोपियों ने भी उसकी मदद की।
जांच के मुताबिक, 6 से 12 अक्टूबर के बीच स्थानीय लोगों को यह मिलावटी शराब बेची गई। पुलिस अब पता लगा रही है कि कितनी शराब तैयार की गई थी और किन-किन इलाकों में इसकी सप्लाई हुई।
शराब दुकानों के प्रबंधक और सेल्समैन भी जांच के घेरे में
इस मामले में लाइसेंसी शराब दुकानों से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका भी जांची जा रही है। थाना प्रभारी के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में देवास और इंदौर जिलों की तीन लाइसेंसी शराब दुकानों के दो प्रबंधक और दो सेल्समैन शामिल हैं। इन पर अजय राठौर और अन्य आरोपियों को असली शराब की अवैध आपूर्ति करने का आरोप है।
पुलिस ने मामले में आबकारी अधिनियम की संबंधित धाराएं भी जोड़ी हैं। जिस निजी फर्म के गोदाम से रसायन भेजा गया था, उसे सील कर दिया गया है। इसके अलावा शराब दुकानों के दो अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है, जिनकी तलाश की जा रही है।
दो मृतकों के विसरा और शराब के नमूने जांच के लिए भेजे
कथित जहरीली शराब से मौतों के दावों की जांच के लिए पुलिस ने दो मृतकों के विसरा नमूने, बरामद शराब और अन्य सामग्री को फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) भेजा है। रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों की वजह और शराब से उनके संभावित संबंध की पुष्टि हो सकेगी।
ग्रामीणों का दावा है कि देवास जिले के चंदाना, बिंजाना और आसपास के इलाकों में 27 सितंबर से 16 अक्टूबर के बीच कथित जहरीली शराब पीने से कम से कम 10 लोगों की मौत हुई। वहीं, मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दावा किया कि पिछले एक महीने में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत हुई और कम से कम 40 लोगों की आंखों की रोशनी प्रभावित हुई।
हालांकि, मौतों के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है। जिला प्रशासन ने शुरुआत में जहरीली शराब से मौतों के दावों को खारिज किया था।
सरकार ने गठित की पांच सदस्यीय जांच टीम
मामले को लेकर विवाद बढ़ने के बाद मध्य प्रदेश सरकार ने जांच के लिए पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय दल गठित किया है। यह दल मौतों के कारणों, नकली शराब के कारोबार और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की जांच कर रहा है।
फिलहाल पुलिस की जांच और FSL रिपोर्ट का इंतजार है। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि मृतकों की मौत का कारण क्या था और बरामद मिलावटी शराब का उनसे कोई संबंध था या नहीं।








