समाचार-गढ़ 4 अगस्त, 2026।
एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली फ्लाइट AI2379 मंगलवार को उड़ान के दौरान तेज टर्बुलेंस (हवा के तेज झटकों) की चपेट में आ गई। अचानक आए झटकों से विमान बुरी तरह हिलने लगा और विमान की अंदरूनी सीलिंग को भी नुकसान पहुंचा। हालांकि, पायलट की सतर्कता से विमान को दिल्ली एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतार लिया गया।
एअर इंडिया के अनुसार, सभी यात्री और क्रू सुरक्षित हैं, लेकिन कुछ यात्रियों और क्रू मेंबर्स को हल्की चोटें आई हैं। एहतियात के तौर पर घायलों को एयरपोर्ट के मेडिकल सेंटर में जांच और इलाज के लिए भेजा गया।
एयरलाइन ने कहा कि यात्रियों और क्रू की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रभावित लोगों को हर जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और घटना की जांच में संबंधित अधिकारियों के साथ पूरा सहयोग किया जा रहा है।
क्या होता है टर्बुलेंस?
टर्बुलेंस वह स्थिति है जब विमान के आसपास बहने वाली हवा का प्रवाह अचानक अस्थिर हो जाता है। इससे विमान ऊपर-नीचे या दाएं-बाएं झटके खाने लगता है, जिससे यात्रियों को ऐसा महसूस हो सकता है कि विमान गिर रहा है। विशेषज्ञ इसकी तुलना उबड़-खाबड़ सड़क पर चलती कार से करते हैं।
टर्बुलेंस के तीन प्रकार
- हल्का टर्बुलेंस: विमान में मामूली हलचल होती है और कई बार यात्रियों को इसका पता भी नहीं चलता।
- मध्यम टर्बुलेंस: विमान कुछ मीटर ऊपर-नीचे हो सकता है, जिससे सामान या पेय गिर सकते हैं।
- गंभीर टर्बुलेंस: तेज झटकों के कारण सीट बेल्ट न लगाने वाले यात्री अपनी सीट से उछल सकते हैं, इसलिए उड़ान के दौरान सीट बेल्ट बांधे रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
क्या टर्बुलेंस से विमान क्रैश हो सकता है?
विशेषज्ञों के अनुसार, आधुनिक विमान टर्बुलेंस का सामना करने के लिए ही डिजाइन किए जाते हैं और पायलटों को इससे निपटने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। हालांकि, अतीत में कुछ विमान दुर्घटनाएं टर्बुलेंस से जुड़ी रही हैं, लेकिन आज के समय में केवल टर्बुलेंस के कारण विमान दुर्घटनाग्रस्त होने की संभावना बेहद कम मानी जाती है।










