ISRO के लिए बढ़ी चुनौती! निजी स्पेस कंपनियों की ओर बढ़ रहे वैज्ञानिक, सरकार ने बदले इस्तीफे के नियम
समाचार गढ़। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) से वैज्ञानिकों के इस्तीफों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हर साल करीब 100 से 120 वैज्ञानिक और इंजीनियर संगठन छोड़ रहे हैं, जिनमें गगनयान और चंद्रयान जैसे अहम मिशनों से जुड़े कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस्तीफों की सबसे बड़ी वजह देश में तेजी से बढ़ता प्राइवेट स्पेस सेक्टर है। निजी कंपनियां अनुभवी वैज्ञानिकों को बेहतर वेतन, आधुनिक सुविधाएं और नए अवसर दे रही हैं, जिसके चलते कई विशेषज्ञ ISRO छोड़कर निजी क्षेत्र का रुख कर रहे हैं।
वैज्ञानिकों के बढ़ते पलायन को देखते हुए अंतरिक्ष विभाग (DoS) ने इस्तीफे की प्रक्रिया सख्त कर दी है। नए नियमों के तहत अब ग्रुप-ए वैज्ञानिकों और इंजीनियरों के इस्तीफे का अंतिम फैसला सीधे विभाग के मुख्यालय द्वारा लिया जाएगा। वहीं, गगनयान जैसे महत्वपूर्ण मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों का इस्तीफा मिशन पूरा होने से पहले मंजूर नहीं किया जाएगा।
मौजूदा नियमों के अनुसार, ISRO के किसी भी कर्मचारी को नौकरी छोड़ने से पहले तीन महीने का नोटिस देना अनिवार्य है। यदि कोई इससे पहले संस्थान छोड़ना चाहता है, तो उसे निर्धारित शर्तों के अनुसार नोटिस अवधि के बराबर वेतन जमा करना होता है। यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि महत्वपूर्ण परियोजनाओं और शोध कार्यों पर किसी तरह का असर न पड़े।









