समाचार गढ़ 7 जून 2026। टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ Elon Musk ने भारत में तेजी से घटती प्रजनन दर को लेकर चिंता जताई है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हालिया जनसंख्या आंकड़ों पर प्रतिक्रिया देते हुए मस्क ने कहा कि भारत की जन्म दर अब रिप्लेसमेंट लेवल से नीचे पहुंच चुकी है और देश के सबसे अधिक शिक्षित वर्ग में यह स्थिति कई वर्ष पहले ही देखने को मिल चुकी थी।
मस्क की यह टिप्पणी 2024 की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (SRS) रिपोर्ट के बाद आई है। रिपोर्ट के अनुसार भारत की कुल प्रजनन दर (टोटल फर्टिलिटी रेट-टीएफआर) घटकर 1.9 बच्चे प्रति महिला रह गई है, जबकि जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए 2.1 बच्चों प्रति महिला की दर को रिप्लेसमेंट लेवल माना जाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी देश की प्रजनन दर लंबे समय तक 2.1 से नीचे बनी रहती है, तो जनसंख्या वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ जाती है और भविष्य में आबादी घटने की स्थिति भी बन सकती है। इसे नकारात्मक जनसंख्या वृद्धि कहा जाता है। ऐसी स्थिति तब पैदा होती है जब जन्म लेने वाले लोगों की संख्या, मृत्यु और पलायन के कारण कम होने वाली आबादी की भरपाई नहीं कर पाती।
जनसंख्या विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार गिरती प्रजनन दर भविष्य में कई सामाजिक और आर्थिक चुनौतियां खड़ी कर सकती है। कम बच्चों के जन्म लेने से बुजुर्ग आबादी का अनुपात बढ़ता है, जबकि कार्यशील आयु वर्ग की संख्या घटने लगती है। इससे उद्योगों और सेवा क्षेत्रों में श्रमिकों की कमी, उत्पादन में गिरावट तथा कर संग्रह पर असर पड़ सकता है। वहीं सरकारों पर पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक कल्याण योजनाओं का बोझ बढ़ने की आशंका रहती है।
संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) की 2025 की ‘स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन’ रिपोर्ट में भी भारत की प्रजनन दर 1.9 बच्चे प्रति महिला बताई गई है, जो रिप्लेसमेंट लेवल से कम है। हालांकि 1.46 अरब से अधिक आबादी के साथ भारत अभी भी दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, लेकिन नए आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश जनसांख्यिकीय संक्रमण के नए दौर में प्रवेश कर रहा है। इस चरण की पहचान छोटे परिवारों, कम प्रजनन दर और धीमी जनसंख्या वृद्धि से होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि जन्म दर और प्रजनन दर को अक्सर एक समान समझ लिया जाता है, जबकि दोनों अलग-अलग संकेतक हैं। जन्म दर किसी वर्ष में प्रति 1,000 आबादी पर होने वाले जीवित जन्मों की संख्या को दर्शाती है, जबकि कुल प्रजनन दर एक महिला के जीवनकाल में औसतन पैदा होने वाले बच्चों की संख्या को मापती है।
SRS रिपोर्ट के अनुसार वर्तमान में बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और झारखंड ऐसे राज्य हैं, जहां प्रजनन दर अब भी रिप्लेसमेंट लेवल से ऊपर बनी हुई है। वहीं देश के अधिकांश राज्यों में यह दर 2.1 से नीचे पहुंच चुकी है, जो भारत की बदलती जनसांख्यिकीय तस्वीर की ओर इशारा करता है।









