समाचार-गढ़ 8 अगस्त, 2026।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को IIT दिल्ली के 57वें दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आने वाले 35 वर्षों में युवा जो काम करेंगे, वही विकसित भारत की मजबूत नींव तैयार करेगा। उन्होंने छात्रों से केवल समस्याओं को पहचानने के बजाय उनके समाधान तलाशने की आदत विकसित करने की अपील की।
मोदी ने कहा कि हर पीढ़ी के सामने अपनी अलग चुनौतियां और जिम्मेदारियां होती हैं। आज की युवा पीढ़ी ऐसे समय में आगे बढ़ रही है, जब तकनीक, शिक्षा और वैश्विक शक्ति संतुलन तेजी से बदल रहा है। ऐसे में छात्रों को लगातार सीखते रहने और बदलती परिस्थितियों के लिए खुद को तैयार रखने की जरूरत है।
“सिर्फ सवाल न पूछें, समाधान भी खोजें”
प्रधानमंत्री ने IIT के पूर्व छात्रों का उदाहरण देते हुए कहा कि कई लोगों ने ऐसी समस्याओं को पहचाना, जिन पर पहले किसी का ध्यान नहीं गया था। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे सवाल पूछने के साथ-साथ उनके व्यावहारिक समाधान खोजने पर भी ध्यान दें।
मोदी ने हल्के-फुल्के अंदाज में छात्रों से कहा, “मैं बाबा बागेश्वर नहीं हूं, लेकिन कुछ तो आपके मन में चलता होगा।” इस पर समारोह में मौजूद लोगों के बीच हंसी का माहौल बन गया।
उन्होंने कहा कि किसी छात्र का सपना पहली नौकरी पाने का हो सकता है, कोई अपना स्टार्टअप शुरू करना चाहता होगा तो कोई नई प्रतियोगिता की तैयारी कर रहा होगा। सभी के अपने लक्ष्य हैं, लेकिन उन्हें पूरा करने के लिए बदलती दुनिया के साथ कदम मिलाना जरूरी है।
“असल जिंदगी में सब कुछ आउट ऑफ सिलेबस होता है”
प्रधानमंत्री ने कहा कि कैंपस और वास्तविक जीवन में बड़ा अंतर होता है। IIT में छात्रों को पता होता है कि कौन-सा कोर्स पढ़ना है और किस परीक्षा की तैयारी करनी है, लेकिन वास्तविक जीवन में परिस्थितियां पहले से तय नहीं होतीं।
उन्होंने कहा कि असली जिंदगी में केवल सवालों के जवाब देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कई बार यह भी खुद तय करना पड़ता है कि सही सवाल क्या है।
मोदी ने कहा कि तकनीक इतनी तेजी से बदल रही है कि अगले 20-30 वर्षों में दुनिया कैसी होगी, इसका अनुमान लगाना मुश्किल है। ऐसे बदलावों के साथ चुनौतियां भी आती हैं और नए अवसर भी पैदा होते हैं। इसलिए छात्रों को भविष्य के लिए लगातार अपनी क्षमताएं विकसित करनी चाहिए।
“अगले 35 साल की आपकी मेहनत तय करेगी विकसित भारत की दिशा”
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की पिछली पीढ़ियों के सामने आजादी हासिल करने जैसी बड़ी चुनौती थी। लोगों ने इसके लिए संघर्ष, त्याग और बलिदान किया। वहीं, आज की पीढ़ी की जिम्मेदारियां अलग हैं।
उन्होंने छात्रों से कहा कि अगले 35 वर्षों में वे जो भी काम करेंगे, उससे देश की कौन-सी जरूरत पूरी होगी और भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में उनका योगदान क्या होगा, यह उन्हें खुद तय करना होगा।
पीएम ने ‘परम प्रज्ञा’ सुपरकंप्यूटर का किया उद्घाटन
दीक्षांत समारोह में प्रधानमंत्री ने छात्रों को डिग्री और मेडल भी प्रदान किए। समारोह में 3,000 से अधिक छात्र शामिल हुए, जिनमें 587 पीएचडी छात्र भी हैं।
इस दौरान मोदी ने IIT दिल्ली के सोनीपत कैंपस में स्थापित ‘परम प्रज्ञा’ AI आधारित हाई-परफॉर्मेंस सुपरकंप्यूटर का रिमोट के जरिए उद्घाटन किया। यह सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, एडवांस्ड कंप्यूटिंग और वैज्ञानिक अनुसंधान जैसे क्षेत्रों में काम आएगा।
भारत में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित
नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन के तहत भारत में अब तक 37 सुपरकंप्यूटर स्थापित किए जा चुके हैं और ये सभी संचालन में हैं। इन्हें IIT, IISc, NIT, C-DAC, IISER और अन्य प्रमुख शोध संस्थानों में लगाया गया है।
इनमें परम सिद्धि, परम प्रवेग, परम शक्ति, परम संगणक, परम सेवा, परम रुद्र, परम ब्रह्मा, परम युक्ति और परम शिवाय जैसे सुपरकंप्यूटर शामिल हैं।









