समाचार-गढ़ 10 अगस्त, 2026।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार संसद में Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 लाने की तैयारी कर रही है। इस प्रस्तावित कानून को लेकर सोशल मीडिया और सिविल सोसाइटी के बीच कई तरह की चर्चाएं और आशंकाएं सामने आई हैं। अब अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इन दावों पर स्पष्टीकरण देते हुए ‘मिथक बनाम हकीकत’ के जरिए बिल की प्रमुख बातों को समझाया है।
क्या यह कानून किसी खास धर्म को निशाना बनाएगा?
क्वात्रा के मुताबिक, यह बिल किसी एक धर्म या समुदाय के लिए नहीं है। प्रस्तावित नियम सभी संगठनों पर समान रूप से लागू होंगे। धार्मिक शिक्षा, पूजा स्थलों के रखरखाव और धार्मिक संगठनों की चैरिटेबल गतिविधियों के लिए विदेशी फंडिंग की पात्रता बनी रहेगी।
उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया के कई देशों में विदेशी फंडिंग को नियंत्रित करने वाले कानून पहले से मौजूद हैं। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और ब्रिटेन समेत कई देशों ने इस तरह के नियम बनाए हैं।
क्या NGO की संपत्ति जब्त हो जाएगी?
बिल को लेकर एक दावा यह भी है कि विदेशी फंड पर निर्भर NGO, अस्पताल, स्कूल या धार्मिक संस्थानों की संपत्तियां जब्त की जा सकती हैं। सरकार की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, ऐसा कोई नया प्रावधान नहीं है।
FCRA के तहत किसी संस्था का रजिस्ट्रेशन रद्द या सरेंडर होने पर विदेशी योगदान और उससे बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए पहले से व्यवस्था मौजूद है। प्रस्तावित बदलाव में ऐसी संपत्तियों को सुरक्षित रखने के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया और प्राधिकरण की व्यवस्था की जा रही है।
यदि संस्था बाद में दोबारा रजिस्ट्रेशन हासिल कर लेती है, तो नियमों के अनुसार संपत्तियां और अप्रयुक्त विदेशी फंड वापस किए जा सकते हैं।
विदेशी फंडिंग पर रोक नहीं, नियमों पर जोर
क्वात्रा ने कहा कि FCRA का उद्देश्य विदेशी चैरिटी, रिसर्च ग्रांट या मानवीय सहायता को रोकना नहीं है। इसका मुख्य उद्देश्य विदेशी धन के पंजीकरण, उपयोग और रिपोर्टिंग में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।
भारत में FCRA के तहत रजिस्टर्ड संस्थाओं को मिलने वाली विदेशी फंडिंग भी बढ़ी है। आंकड़ों के मुताबिक, 2010-11 में करीब 1.2 अरब डॉलर की विदेशी फंडिंग मिली थी, जो 2024-25 में बढ़कर 2.67 अरब डॉलर हो गई।
भारत में लाखों NGO, लेकिन FCRA रजिस्ट्रेशन वाले कम
देश में 30 लाख से ज्यादा NGO होने का अनुमान है, लेकिन FCRA के तहत रजिस्टर्ड संगठनों की संख्या करीब 14,450 है। यानी ज्यादातर सिविल सोसाइटी संगठन सीधे FCRA के दायरे में नहीं आते।
FCRA के तहत रजिस्टर्ड संस्थाओं को विदेशी फंड लेने के लिए तय प्रक्रिया का पालन करना होता है और यह बताना होता है कि प्राप्त राशि का इस्तेमाल किस काम में किया गया।
FCRA कानून नया नहीं है
भारत में विदेशी योगदान को नियंत्रित करने वाला पहला FCRA 1976 में लागू हुआ था। बाद में 2010 में इसे नए ढांचे के साथ बदला गया और 2016, 2018 तथा 2020 में भी इसमें बदलाव किए गए।
प्रस्तावित 2026 संशोधन को इसी नियामक व्यवस्था को आगे बढ़ाने वाला कदम बताया जा रहा है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य विदेशी फंडिंग में ज्यादा पारदर्शिता, बेहतर निगरानी और स्पष्ट नियम सुनिश्चित करना है।









