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स्कूल के भेजे गए सत्रांक और बोर्ड की मुख्य परीक्षा में परीक्षार्थी के प्राप्त अंकों में हुआ भारी अंतर, तो स्कूल के दिए गए सत्रांकों की होगी जांच

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समाचार गढ़। परीक्षाओं में दिए जाने वाले सत्रांक अंकों और बोर्ड की मुख्य परीक्षा में परीक्षार्थी के प्राप्तांकों में 50 फीसदी से ज्यादा अंतर होने पर जांच होगी। गड़बड़ी मिलने पर विभागीय कार्यवाही भी होगी। माध्यमिक शिक्षा निदेशक आशीष मोदी ने सरकारी तथा निजी स्कूलों के संस्था प्रधानों को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड की दसवीं -बारहवीं कक्षाओं के परीक्षार्थियों के व स्कूल से भेजे जाने वाले सत्रांक विभाग के निर्धारित मानदंडों के अनुसार ही देने के निर्देश दिए हैं। अगर स्कूल के भेजे गए सत्रांक और बोर्ड की मुख्य परीक्षा में परीक्षार्थी के प्राप्त अंकों में भारी अंतर हुआ, तो स्कूल के दिए गए सत्रांकों की जांच हो सकती है। इसमें गड़बड़ी मिलती है, तो कार्यवाही की जा सकती है।

देना होगा प्रमाण पत्र

अब संस्था प्रधानों को हर विषय की दो प्रतिशत उत्तर पुस्तिकाओं की जांच करनी होगी तथा इसका प्रमाण पत्र भी देना होगा। संस्था प्रधानों को 3 वर्षों तक इन कॉपियों को सुरक्षित रखना होगा, जिसकी डाइट से कभी भी जांच की जा सकेगी।

बाह्य परीक्षक से लेना होगा प्रमाण पत्र

सत्रांक के अंक बोर्ड को अंतिम अग्रेषण से पहले संस्था प्रधान की ओर से उसी पीईईओ परिक्षेत्र से एक शिक्षक अंकों का मिलान कर विषय अध्यापक के साथ प्रमाण पत्र देगा। बाह्य परीक्षक, संस्था प्रधान, विषय अध्यापक के हस्ताक्षर किए जाएंगे। ये नियम हैं निर्धारित स्कूलों से भेजे जाने वाले सत्रांक अंकों में विभाग कके मानदंड निर्धारित हैं, लेकिन संस्था प्रधानों तथा विषय अध्यापकों की ओर से उनका पालन नहीं कर मनमाने ढंग से सत्रांक भेजे जाते हैं। इसे विभाग ने गंभीरता से लिया है। बोर्ड में 20 अंक के सत्रांक स्कूल से भेजे जाने की व्यवस्था है। जिसमें तीन टेस्ट तथा अर्द्ध वार्षिक परीक्षा के कुल अंकों के 10 प्रतिशत अंक शामिल होते हैं, जो बोर्ड परीक्षा के कुल अंकों का 10 प्रतिशत होते हैं। इसी तरह 5 प्रतिशत अंक प्रोजेक्ट कार्य के लिए निर्धारित है। इसके अलावा 3 प्रतिशत अंक उपस्थिति के लिए निर्धारित है। उसमें भी उपस्थिति के अनुसार अंक देने होते हैं। न्यूनतम 75 से 80 प्रतिशत उपस्थिति होने पर 1 अंक, 80 से 90% उपस्थिति होने पर परीक्षार्थी को 2 अंक और 90 से 100 प्रतिशत उपस्थिति पर ही 3 अंक देने का प्रावधान है, लेकिन विषय अध्यापकों की ओर से इन नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। सत्रांकों में दो प्रतिशत अंक अनुशासन और व्यवहार के निर्धारित है।

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