समाचार गढ़ 10 जून 2026। पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को लेकर नई सियासी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, टीएमसी के 20 सांसदों द्वारा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर संसद में अलग व्यवस्था देने की मांग किए जाने का दावा किया गया है। बताया जा रहा है कि इस पत्र पर सांसद सयानी घोष के भी हस्ताक्षर हैं, जिससे पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलें और तेज हो गई हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक पत्र में टीएमसी संसदीय दल के नेतृत्व को लेकर भी बदलाव की मांग की गई है। दावा किया जा रहा है कि सांसदों ने अभिषेक बनर्जी की जगह काकोली घोष दस्तीदार को संसदीय दल का नेता बनाए जाने का सुझाव दिया है।
कौन हैं सयानी घोष?
सयानी घोष पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री, गायिका और राजनेता हैं। वह वर्तमान में **जादवपुर लोकसभा क्षेत्र** से सांसद हैं। वर्ष 2021 में उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का दामन थामा था और जल्द ही पार्टी के युवा चेहरों में शामिल हो गईं।
राजनीति में आने से पहले वह बंगाली फिल्म और मनोरंजन जगत का जाना-पहचाना नाम थीं। टीएमसी में शामिल होने के बाद उन्हें आसनसोल से विधानसभा चुनाव लड़ाया गया, हालांकि उन्हें हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद पार्टी में उनका कद लगातार बढ़ता गया और वर्ष 2023 में उन्हें टीएमसी युवा इकाई की जिम्मेदारी सौंपी गई।
कई बार रही हैं सुर्खियों में
सयानी घोष अपने बयानों और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर कई बार चर्चा में रही हैं। त्रिपुरा में स्थानीय निकाय चुनावों के दौरान ‘खेला होबे’ नारे को लेकर उनकी गिरफ्तारी भी राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में रही थी। इसके अलावा भर्ती घोटाले की जांच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उनसे पूछताछ किए जाने के बाद भी उनका नाम चर्चा में आया था।
2024 में बनीं सांसद
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में टीएमसी ने उन्हें जादवपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था, जहां उन्होंने जीत दर्ज कर संसद पहुंचने में सफलता हासिल की। इसके बाद वह पार्टी की प्रमुख युवा नेताओं में गिनी जाने लगीं।
किन सांसदों के नाम चर्चा में?
मीडिया रिपोर्ट्स में जिन सांसदों के नाम सामने आए हैं, उनमें अरुप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शताब्दी रॉय, जगदीश वसुनिया, काकोली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, कालीपदा सोरेन, शर्मिला सरकार, जून मालिया, वापी हलदार, असित मल और सुवेंदु शेखर रॉय समेत कुल 20 सांसदों के शामिल होने का दावा किया गया है।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम पर टीएमसी नेतृत्व की ओर से आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि ये दावे सही साबित होते हैं तो इसे पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा सकता है।









