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Iran Conflict: कुवैत पर ईरान का मिसाइल-ड्रोन हमला, यमन में हूतियों ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें; बढ़ा तनाव

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समाचार-गढ़ 3 सितंबर, 2026।

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब पश्चिम एशिया के दूसरे हिस्सों में भी दिखाई देने लगा है। कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमला किए जाने की खबर है। कुवैत ने हमले के जवाब में अपना एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया।

इससे पहले यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ताइज और हुदैदा की ओर 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया था। यानी कुछ ही समय के अंतराल में क्षेत्र में मिसाइल हमलों की दो बड़ी घटनाओं ने तनाव और बढ़ा दिया है।

कुवैत में मिसाइल-ड्रोन हमले के बाद एक्टिव हुआ एयर डिफेंस

गुरुवार को कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर ईरान की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमले किए जाने की जानकारी सामने आई। कुवैत की सेना ने हमले की पुष्टि करते हुए बताया कि देश का एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिया गया है।

कुवैत की सेना ने सोशल मीडिया पर नागरिकों से अपील की कि वे घबराने के बजाय सुरक्षा और बचाव से जुड़े अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें। सेना के मुताबिक, लोगों को सुनाई देने वाली धमाकों की आवाज एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा हमलों को रोकने की कार्रवाई के कारण हो सकती है।

ईरान की एक समाचार एजेंसी ने भी कुवैत में हमले की पुष्टि की और दावा किया कि निशाने पर अमेरिकी सैन्य ठिकाने थे। हालांकि, ईरान की सरकार की ओर से इस हमले पर तत्काल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। अमेरिका की तरफ से भी हमले को लेकर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई।

इससे पहले यमन में हूतियों ने दागीं 10 बैलिस्टिक मिसाइलें

कुवैत की घटना से पहले यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने सरकार नियंत्रित इलाकों को निशाना बनाया। यमन की सेना के अनुसार, हूतियों ने ताइज और हुदैदा प्रांतों की दिशा में 10 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं।

हमले से जुड़ी जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमन सरकार के सैन्य मीडिया सेंटर ने दी। हालांकि, इस हमले में कितने लोग हताहत हुए या कितना नुकसान हुआ, इसकी तत्काल स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई।

ताइज लंबे समय से यमन के गृहयुद्ध का प्रमुख संघर्ष क्षेत्र रहा है, जबकि हुदैदा अपने महत्वपूर्ण बंदरगाह के कारण रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। ऐसे में इन इलाकों पर मिसाइल हमले से स्थानीय स्तर पर भी तनाव बढ़ गया है।

यमन सरकार ने जवाबी कार्रवाई का किया दावा

हूती हमले के बाद यमन के सरकारी पक्ष ने भी जवाबी कार्रवाई की जानकारी दी। सैन्य मीडिया सेंटर की ओर से मारीब और अल बयदा में हूती लड़ाकों और उनके ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई के वीडियो जारी किए गए।

सरकार की ओर से सोशल मीडिया पर जारी छह वीडियो में गोलीबारी और धमाकों के दृश्य दिखाई देते हैं। हालांकि, वीडियो में हमले की सटीक तारीख या समय का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

मारीब तेल संसाधनों के लिहाज से महत्वपूर्ण क्षेत्र है, जबकि अल बयदा भी लंबे समय से संघर्ष से प्रभावित इलाका रहा है।

हूती हमले का ईरान से क्या कनेक्शन है?

यमन में हूती विद्रोही लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय समर्थन वाली यमन सरकार के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं। हूतियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के दौरान संगठन की सैन्य गतिविधियां भी तेज होती रही हैं।

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा संघर्ष के बीच हूतियों की गतिविधियां इसलिए भी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे युद्ध का असर एक देश तक सीमित रहने के बजाय पूरे क्षेत्र में फैलने की आशंका बढ़ती है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी बढ़ी चिंता

इस पूरे घटनाक्रम के बीच Strait of Hormuz को लेकर भी तनाव बढ़ रहा है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

ऑस्ट्रेलिया के डिप्टी प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री Richard Marles ने होर्मुज स्ट्रेट में शिपिंग को सीमित किए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस समुद्री रास्ते को खुला रखना जरूरी है और शिपिंग पर रोक या प्रतिबंध समुद्री कानून तथा freedom of navigation के सिद्धांतों के खिलाफ है।

पश्चिम एशिया में बढ़ता संघर्ष दुनिया के लिए चिंता क्यों?

कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर कथित ईरानी हमला, यमन में हूतियों के मिसाइल हमले और होर्मुज स्ट्रेट को लेकर बढ़ता तनाव इस बात के संकेत हैं कि अमेरिका-ईरान संघर्ष का दायरा लगातार व्यापक हो रहा है।

इसका सबसे बड़ा असर क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और कच्चे तेल की सप्लाई पर पड़ सकता है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट में किसी बड़े व्यवधान की स्थिति में वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ने की आशंका है।

ऐसे में अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य टकराव आगे कितना फैलता है और क्या इसके बीच खाड़ी देशों तथा यमन जैसे अन्य मोर्चे भी और ज्यादा सक्रिय होते हैं।

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