समाचार गढ़ 1 मार्च 2026। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव और अली ख़ामेनेई की मौत की खबर के बाद वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल की आशंका बढ़ गई है। अगर अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच जंग लंबी चलती है और होर्मुज स्ट्रेट बंद होता है, तो कच्चे तेल की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हो सकती है। दुनिया के लगभग 20% पेट्रोलियम का ट्रांजिट इसी मार्ग से होता है, इसलिए किसी भी रुकावट का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कीमतों पर पड़ेगा।
भारत अपनी जरूरत का करीब 90% कच्चा तेल आयात करता है, जिसमें लगभग आधा हिस्सा होर्मुज के रास्ते आता है। ऐसे में सप्लाई घटने पर ब्रेंट क्रूड 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 100–120 डॉलर तक पहुंच सकता है। इसका असर घरेलू ईंधन कीमतों पर दिख सकता है—दिल्ली में पेट्रोल ₹95 से बढ़कर ₹105 और डीजल ₹88 से बढ़कर ₹96 प्रति लीटर तक जा सकता है। हालांकि अंतिम कीमतें सरकारी तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय औसत कीमत और डॉलर-रुपया विनिमय दर के आधार पर तय करती हैं, लेकिन सरकार टैक्स घटाकर या कंपनियों को दाम न बढ़ाने की सलाह देकर राहत दे सकती है।
युद्ध जैसे हालात में निवेशक सुरक्षित निवेश की ओर रुख करते हैं। कमोडिटी विशेषज्ञों के अनुसार सोना 1.60 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम से बढ़कर 1.90 लाख रुपए तक जा सकता है, जबकि चांदी 2.67 लाख रुपए प्रति किलो से बढ़कर 3.50 लाख रुपए तक पहुंच सकती है। वैश्विक अनिश्चितता के समय सोने को सुरक्षित संपत्ति माना जाता है, जिससे उसकी मांग और कीमत दोनों बढ़ती हैं।
शेयर बाजार पर भी दबाव दिख सकता है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि सेंसेक्स में 1300 अंक और निफ्टी में करीब 300 अंकों की गिरावट आ सकती है, यानी लगभग 1–1.5% की कमजोरी संभव है। युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के समय विदेशी निवेशक उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित परिसंपत्तियों में लगाते हैं, जिससे बाजार में गिरावट आती है।
होर्मुज स्ट्रेट 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। इसका सबसे संकरा हिस्सा करीब 33 किमी चौड़ा है और शिपिंग लेन केवल 3 किमी चौड़ी है। हर दिन लगभग 1.78 से 2.08 करोड़ बैरल कच्चा तेल और ईंधन इसी मार्ग से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और ईरान जैसे देश अपने तेल निर्यात के लिए इस पर निर्भर हैं। भारत के नॉन-ऑयल निर्यात का 10% से अधिक हिस्सा भी इसी रूट से होता है।
संभावित संकट को देखते हुए भारत वैकल्पिक इंतजामों पर काम कर रहा है। सऊदी अरब के पास 746 मील लंबी ‘ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन’ है, जिससे रोजाना 50 लाख बैरल तक तेल रेड सी टर्मिनल तक भेजा जा सकता है। भारत खाड़ी क्षेत्र के बाहर के सप्लायर्स से आयात बढ़ा रहा है और जरूरत पड़ने पर अपने स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) का इस्तेमाल भी कर सकता है, ताकि देश में ईंधन आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता बनाए रखी जा सके।










