समाचार-गढ़ 3 अक्टूबर, 2026।
बीकानेर में महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। पिछले दो साल आठ माह में जिले में 1,925 महिलाओं और युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 1,695 को पुलिस तलाश के बाद वापस लाने में सफल रही, जबकि 230 का अब तक पता नहीं चल पाया है। इन आंकड़ों में 302 युवतियां और 1,623 महिलाएं शामिल हैं।
बीकानेर। किसी मां की नजर दरवाजे पर टिकी है, किसी पिता को फोन की घंटी से बेटी के लौटने की उम्मीद है और किसी भाई को इंतजार है कि बहन अचानक घर वापस आ जाएगी। गुमशुदगी के आंकड़ों के पीछे ऐसे ही परिवारों का इंतजार और अनिश्चितता छिपी है।
2026 में 107 महिलाएं अब भी लापता
वर्ष 2024 में जिले में 559 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें से 508 वापस मिल गईं, जबकि 51 का अब तक पता नहीं चला।
वर्ष 2025 में 619 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 551 महिलाएं वापस मिल गईं, जबकि 68 अब भी लापता हैं।
वर्ष 2026 में अगस्त तक 445 महिलाओं की गुमशुदगी दर्ज हुई। इनमें 338 वापस मिल चुकी हैं, जबकि 107 का अभी तक पता नहीं चला है।
302 युवतियों की गुमशुदगी, ज्यादातर वापस मिलीं
युवतियों की बात करें तो वर्ष 2024 में 106 गुमशुदगी दर्ज हुईं। इनमें 105 युवतियां वापस मिल गईं, जबकि एक का अब तक पता नहीं चला।
वर्ष 2025 में 107 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई और सभी वापस मिल गईं।
वर्ष 2026 में अगस्त तक 89 युवतियों की गुमशुदगी दर्ज हुई है। इनमें 86 वापस मिल चुकी हैं, जबकि तीन का अब तक पता नहीं चला है।
1,925 मामलों में 230 का अभी तक पता नहीं
पिछले दो साल आठ माह के आंकड़ों को देखें तो कुल 1,925 गुमशुदगियों में 1,623 महिलाएं और 302 युवतियां शामिल हैं। इनमें 1,695 लोग वापस मिल चुके हैं, जबकि 230 अब भी लापता हैं।
इन आंकड़ों से यह भी सामने आता है कि गुमशुदगी की हर घटना के पीछे परिस्थितियां एक जैसी नहीं होतीं। पारिवारिक विवाद, रिश्तों में तनाव, प्रेम संबंध, विवाह को लेकर मतभेद या अन्य व्यक्तिगत परिस्थितियां अलग-अलग मामलों में वजह बन सकती हैं। हालांकि किसी मामले में वास्तविक कारण क्या था, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होता है।
पुलिस के सामने तलाश की चुनौती
पुलिस अधीक्षक मृदुल कच्छावा के अनुसार, गुमशुदगी के मामले चिंताजनक हैं। पुलिस कानून के दायरे में रहते हुए परिवारों के साथ समन्वय कर गुमशुदा लोगों की तलाश करती है और कई मामलों में सफलता भी मिलती है। हालांकि कुछ मामलों में अभी तक सफलता नहीं मिल पाती।
उन्होंने कहा कि महिलाओं और युवतियों के घर से जाने की वजहों को समझने के लिए परिवार और समाज को भी इस विषय पर गंभीरता से विचार करना होगा।
हर गुमशुदगी के पीछे अलग कहानी
पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज गुमशुदगी के मामलों में अलग-अलग परिस्थितियां सामने आती हैं। कुछ मामलों में युवक-युवती बिना बताए घर से चले जाते हैं, जबकि कुछ मामलों में पारिवारिक विवाद, प्रेम संबंध या विवाह को लेकर मतभेद जैसी परिस्थितियां सामने आती हैं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के अनुसार, कुछ मामलों में महिलाएं और युवतियां प्रेम संबंध या किसी के बहकावे में आकर घर से चली जाती हैं। बाद में परिस्थितियां उनके लिए मुश्किल हो सकती हैं। ऐसे मामलों में वापस लौटने के बाद परिवार और सामाजिक स्तर पर भी अलग-अलग चुनौतियां सामने आती हैं।
हालांकि आंकड़ों का दूसरा पहलू यह भी है कि बड़ी संख्या में महिलाएं और युवतियां पुलिस की तलाश के बाद वापस मिल जाती हैं। लेकिन जिन 230 लोगों का अब तक पता नहीं चल पाया है, उनके परिवारों के लिए इंतजार अभी भी जारी है।








