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जनप्रतिनिधियों का, ना ही प्रशासन का और ना ही जिम्मेवारों का। व्यवस्थाएं बेजान और जनता हैरान परन्तु जिनकी जिम्मेदारी है वो एकदम उदासीन।

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समाचार-गढ़, 20 जून 2023। श्रीडूंगरगढ़ में आमजन से जुड़ी किसी भी सेवा पर ना तो जनप्रतिनिधियों का ध्यान जाता है, ना ही प्रशासन का और ना ही जिम्मेवारों का। व्यवस्थाएं बेजान और जनता हैरान परन्तु जिनकी जिम्मेदारी है वो एकदम उदासीन। कस्बे में स्वास्थ्य सेवा व्यवस्था का ढर्रा जितना बिगड़ा हुआ है उतना शायद ही कहीं और देखने को मिलेगा। हम बात करें श्रीडूंगरगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र की, जहां सोमवार को एक्सरे मशीन बन्द रही जिसके कारण एक्सरे करवाने आये मरीज इंतजार करते दिखे और कुछेक ने आखिरकार उम्मीद छोड़ते हुए बाहर निजी लैबों से एक्सरे करवाएं।
मामला सामने आने पर पता चला कि औषधि केंद्र के पास लगाया गया विद्युत एमसीबी और किरकिट सिस्टम जलकर खराब हो गया है उसके कारण औषधि केंद्र के कम्प्यूटर, सीएचसी के गलियारों के पंखे, एक्सरे मशीन सब बंद पड़े थे। इस मशीन के जलने के कारण भामाशाह द्वारा कुछ दिनों पहले ही दिया गया कूलर भी जल गया। बड़ी हैरानी की बात है कि जो सिस्टम सोमवार सुबह जला था वह रविवार को ही नया लगाया गया था। बातचीत करने पर सामने आया कि ऊँचे दामों पर हल्का विद्युत सिस्टम खरीदा गया और चिकित्सा विभाग के सीएचसी में बैठे जिम्मेवारों ने चिकित्सा विभाग को आर्थिक पलीता लगा दिया। इससे बड़ी हैरानी यह है कि यह कस्बे सहित तहसील की सबसे बड़ी सीएचसी है जहां प्रतिदिन सैंकड़ों मरीज आते है, कुछ मर्जी भर्ती रहते है परन्तु जब यहां विद्युत उपकरण में आग लगी तो आग बुझाने के लिए इनके पास पर्याप्त संसाधन तक नहीं थे। आनन-फानन में जैसे तैसे आग बुझाई गई। परन्तु उसके बाद भी सीएचसी के जिम्मेवारों के सिर में जिम्मेदारी की जूं तक नहीं रेंगी कि जो आग बुझाने का यंत्र अग्निशमन यंत्र है उसे तो समय पर इंस्टॉल करवाया जाए ताकि मुसीबत के वक्त काम आ सके परन्तु 20मार्च 2023 को ही एक्सपायर हुए अग्निशमन यंत्र को इंस्टॉल करवाने की जिम्मेदारी किसी की नहीं है। आग लगी, मौजूद मरीज के परिजनों की मदद से उसे बुझा भी दिया गया, इलेक्ट्रीशियन को बुलाकर उसे दुरस्त भी करवाया गया परन्तु यह घटना कई यक्ष प्रश्न अपने पीछे छोड़ गई कि

  1. जिस विद्युत उपकरण को लगाए हुए 24घण्टे भी नहीं हुए थे वह अचानक कैसे जल गया?
  2. पहले इतने महीनों से जो विद्युत उपकरण लगा हुआ था वह अच्छे से चला और इस उपकरण के जलते ही जिम्मेवार उपकरण को दोष देने लग गए? यक्ष प्रश्न यह है कि जिम्मेवार अपने गिरेबान में कब झांकेंगे और सरकारी मशीनरी का जनता के हित में प्रयोग करते हुए उचित मूल्य पर उचित मापदंड वाली सामग्री कब खरीदेंगे?
  3. प्रतिदिन जिस सीएचसी में 1000 से अधिक मरीज आते है, उस सीएचसी में ऐसी आगजनी की घटना होना कितना विभत्स हो सकता था। ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाने और निपटने की जिम्मेवारी आखिर किसकी है?
  4. अग्निशमन यंत्र की डेट एक्सपायर हो गई उसके बाद भी वह अनइंस्टाल पड़ा है। आखिर कोई बड़ी त्रासदी के इंतजार में चिकित्सा प्रशासन बैठा है क्या?
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