समाचार-गढ़ 25 जुलाई 2026।अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने भारत समेत 60 देशों पर 10% से 12.5% तक का नया लेबर टैरिफ लागू किया है। नए प्रावधान के तहत भारत को 10% टैरिफ श्रेणी में रखा गया है, जबकि नियमों का पालन न करने वाले देशों पर 12.5% तक का अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है।
यह टैरिफ अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) द्वारा ट्रेड एक्ट, 1974 की धारा 301 के तहत की गई जांच के आधार पर लागू किया गया है। इस जांच का उद्देश्य यह परखना था कि विभिन्न देश जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात को रोकने के लिए कितने प्रभावी कानून और व्यवस्था लागू कर रहे हैं।
नई व्यवस्था के तहत चीन सहित 36 देशों को 12.5% टैरिफ श्रेणी में रखा गया है, जबकि भारत को 10% के अपेक्षाकृत कम शुल्क वाले समूह में शामिल किया गया है। यह अतिरिक्त शुल्क पहले से लागू मोस्ट-फेवर्ड-नेशन (MFN) ड्यूटी के अलावा वसूला जाएगा।
भारतीय निर्यातकों के लिए राहत की बात यह है कि 24 जुलाई 2026 को समाप्त हुए 10% अस्थायी वैश्विक शुल्क की जगह अब 10% का स्थायी शुल्क लागू किया गया है। इसलिए भारतीय निर्यातकों पर फिलहाल कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं बढ़ेगा।
भारत के इंजीनियरिंग उत्पाद, टेक्सटाइल, गारमेंट्स, केमिकल्स, लेदर उत्पाद और रत्न एवं आभूषण सहित अमेरिका को होने वाले लगभग 70% निर्यात इस अतिरिक्त 10% शुल्क के दायरे में आएंगे। हालांकि रत्न एवं आभूषण जैसे उच्च मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए यह शुल्क चुनौती बना रह सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश, पाकिस्तान, श्रीलंका और इंडोनेशिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों पर भी समान 10% शुल्क लागू होने से भारत को प्रतिस्पर्धात्मक नुकसान नहीं होगा। बल्कि मजबूत सप्लाई चेन और उत्पादन क्षमता के कारण भारतीय निर्यातकों को इसका लाभ मिल सकता है।









