Nature Nature

नूजल इस्लाम काजी की भावनात्मक रचना: बदलते समाज में रिश्तों की पीड़ा

Nature

समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़।

रिश्तों की टूटती ज़मीन
बदलते समाज की एक ख़ामोश दास्तान – नूजल इस्लाम काजी
आज अगर किसी महफ़िल, किसी ड्राइंग रूम या किसी चाय की दुकान पर बैठकर लोगों की बातें सुनिए, तो एक जुमला बार-बार सुनाई देता है—
“अब रिश्तों में वो बात नहीं रही।”
सवाल यह नहीं कि बात रही या नहीं रही,
सवाल यह है कि हमने रिश्तों को किस ज़मीन पर खड़ा किया है?
हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं जहाँ दिखना, होने से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।
अच्छे कपड़े, सलीक़े की ज़बान, सजी-धजी मुस्कान—
और भीतर?
भीतर का हाल पूछने की फ़ुर्सत किसे है।
समाजशास्त्र कहता है कि यह महज़ व्यक्तिगत धोखा नहीं,
बल्कि सामाजिक बनावट का बदल जाना है।
समाज एक मंच है, हम सब अभिनेता
मशहूर समाजशास्त्री इरविंग गॉफमैन ने कहा था—
दुनिया एक स्टेज है और इंसान उस पर किरदार निभा रहा है।
आज रिश्ते अक्सर उसी किरदार को देखकर बनते हैं,
जो हमने दुनिया के सामने पेश किया होता है।
शादी हो, दोस्ती हो या कोई और रिश्ता—
सब कुछ Front Stage पर तय हो जाता है।
लेकिन ज़िंदगी तो Back Stage में चलती है,
जहाँ मेकअप उतर जाता है
और असल चेहरा सामने आ जाता है।
यहीं से गलतफ़हमियाँ पैदा होती हैं,
और यहीं से रिश्तों की नींव हिलने लगती है।
जब समाज सामूहिक से व्यक्तिवादी हुआ
कभी हमारा समाज “हम” पर टिका था।
परिवार, रिश्तेदार, पड़ोस—
सब मिलकर इंसान को संभालते थे।
आज समाज “मैं” पर टिक गया है।
मेरी ख़ुशी, मेरी आज़ादी, मेरी सहूलियत—
और अगर रिश्ता इन सबके रास्ते में आया,
तो उसे छोड़ देना आसान समझा जाता है।
यह बदलाव अचानक नहीं आया,
यह आधुनिकता की क़ीमत है।
बाज़ार की सोच और रिश्तों की नाज़ुकता
आज हर चीज़ विकल्पों में मिलती है—
मोबाइल, नौकरी, शहर, यहाँ तक कि रिश्ते भी।
समाजशास्त्री ज़िगमंट बाउमन इसे
“तरल रिश्ते” कहते हैं—
जो तब तक चलते हैं
जब तक सुविधाजनक हों।
जहाँ सब कुछ बदला जा सकता हो,
वहाँ निभाने का जज़्बा कमज़ोर पड़ जाता है।
परिवार की ढीली होती पकड़
संयुक्त परिवार टूटे,
एकल परिवार बढ़े,
और संवाद सिमटता चला गया।
पहले घर रिश्तों को सहने की तालीम देता था,
आज घर ख़ुद संघर्ष में उलझा हुआ है।
नतीजा यह हुआ कि
रिश्ते बोझ लगने लगे
और सब्र एक पुराना शब्द बन गया।
बदलती भूमिकाएँ, बढ़ता तनाव
यह सच है कि समाज में औरत और मर्द—
दोनों की भूमिकाएँ बदली हैं,
और यह बदलाव ज़रूरी भी था।
लेकिन नई सोच और पुरानी उम्मीदों के टकराव ने
कई रिश्तों को तनाव में डाल दिया है।
समस्या बराबरी की नहीं,
समझ की कमी की है।
दोष किसी एक का नहीं
यह कहना आसान है कि
“आज की पीढ़ी रिश्ते नहीं निभा सकती।”
लेकिन सच यह है कि
यह किसी एक पीढ़ी,
किसी एक जेंडर
या किसी एक वर्ग की गलती नहीं है।
यह उस समाज की कहानी है
जो तेज़ी से आगे बढ़ रहा है,
लेकिन भावनात्मक संतुलन बनाना अभी सीख रहा है।
आख़िरी बात
रिश्ते इसलिए नहीं टूट रहे
कि लोग बुरे हो गए हैं,
बल्कि इसलिए
कि समाज बदल गया है
और हम उस बदलाव के लिए तैयार नहीं थे।
अगर रिश्तों को बचाना है,
तो दिखावे से सच की ओर लौटना होगा,
और यह मानना होगा कि
हर इंसान अधूरा है—
और शायद इसी अधूरेपन में रिश्तों की सबसे बड़ी सच्चाई छिपी है।
✍️ लेखक
नूजल इस्लाम काजी
अध्यापक राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सातलेरा

  • Related Posts

    साहित्यकार मोनिका गौड़ को मिलेगा कन्हैयालाल सेठिया साहित्य सम्मान

    समाचार गढ़ 6 मार्च 2026, बीकानेर। सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में पूरे देश में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाली कोलकाता की संस्था विचार मंच द्वारा वर्ष 2026 के राष्ट्रीय पुरस्कारों…

    सुबह शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के

    समाचार गढ़ 6 मार्च 2026। शुक्रवार सुबह शेयर बाजार की शुरुआत निराशाजनक रही और खुलते ही बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। प्रमुख कंपनियों के बड़े-बड़े स्टॉक्स धड़ाम से…

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *

    You Missed

    साहित्यकार मोनिका गौड़ को मिलेगा कन्हैयालाल सेठिया साहित्य सम्मान

    साहित्यकार मोनिका गौड़ को मिलेगा कन्हैयालाल सेठिया साहित्य सम्मान

    सुबह शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के

    सुबह शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स और निफ्टी लुढ़के

    अमेरिका की छूट से भारत को रूसी तेल खरीदने का मौका, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत

    अमेरिका की छूट से भारत को रूसी तेल खरीदने का मौका, पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर राहत

    दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान संशोधन विधेयक 2026 पर विचार के दौरान कांग्रेसी विधायकों ने लगाए नारे

    दुकान और वाणिज्यिक अधिष्ठान संशोधन विधेयक 2026 पर विचार के दौरान कांग्रेसी विधायकों ने लगाए नारे

    राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज, नितिन नबीन व नितिश कुमार ने नामांकन किया दाखिल

    राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज, नितिन नबीन व नितिश कुमार ने  नामांकन किया दाखिल

    मिडिल ईस्ट की चल रही जंग को लेकर राहुल गांधी का बयान, कहा- तेल की आपूर्ति को खतरा

    मिडिल ईस्ट की चल रही जंग को लेकर राहुल गांधी का बयान, कहा- तेल की आपूर्ति को खतरा
    Social Media Buttons
    error: Content is protected !!
    Verified by MonsterInsights