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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर SC का बड़ा फैसला, 13 FIR समेत देशभर के मामलों पर लगी रोक

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समाचार-गढ़ 1 सितंबर, 2026।

जुलाई में हुए छात्र आंदोलन को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने दिल्ली समेत देश के अलग-अलग राज्यों में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ दर्ज एफआईआर में आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी है। दिल्ली में 20 से 25 जुलाई के बीच दर्ज की गईं 13 एफआईआर भी अब आगे नहीं बढ़ेंगी।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने विशेष अधिकार अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए इन मामलों को खत्म करने का आदेश दिया है। दिल्ली पुलिस के अलावा बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र पुलिस की ओर से भी अपने-अपने राज्यों में दर्ज एफआईआर को रद्द करने का अनुरोध किया गया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया।

दिल्ली में दर्ज हुई थीं 13 FIR

जंतर-मंतर और दिल्ली के दूसरे इलाकों में जुलाई के दौरान हुए छात्र आंदोलन को लेकर दिल्ली पुलिस ने 20 से 25 जुलाई के बीच कुल 13 एफआईआर दर्ज की थीं।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट से इन सभी एफआईआर को निरस्त करने की मांग की थी। साथ ही पुलिस ने भीड़ में शामिल रहे 2,873 लोगों में से गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड वाले लोगों के खिलाफ अलग से नई एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को भी मंजूरी दे दी है।

बाकी राज्यों की FIR पर भी नहीं होगी कार्रवाई

सिर्फ दिल्ली ही नहीं, बल्कि बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र में दर्ज मामलों को लेकर भी सुप्रीम कोर्ट के सामने अनुरोध रखा गया था।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट से कहा कि अगर दूसरे राज्यों में भी इस आंदोलन से जुड़ी एफआईआर दर्ज हैं, तो उनके खिलाफ भी आगे कोई कार्रवाई न की जाए।

कोर्ट ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुए बाकी एफआईआर में भी आगे की कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया।

सरकार ने छात्रों से किए थे ये वादे

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र सरकार ने छात्रों से कुछ वादे किए थे। इनमें आंदोलन से जुड़े मुकदमे वापस लेना, भविष्य में इन मामलों को लेकर एफआईआर दर्ज न करना और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल था।

सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि वह छात्रों से किए गए इन वादों को पूरा करेगी।

आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा

सॉलिसिटर जनरल ने मुआवजे को लेकर भी कोर्ट से समय मांगा। उन्होंने कहा कि अगर कोर्ट अभी मुआवजे पर कोई आदेश देता है, तो वह भविष्य की दूसरी परीक्षाओं से जुड़े मामलों में उदाहरण बन सकता है।

उन्होंने कोर्ट से सरकार के वादे को रिकॉर्ड पर लेने और मुआवजे की व्यवस्था तैयार करने के लिए तीन महीने का समय देने का अनुरोध किया।

सरकार की ओर से कहा गया कि नीट परीक्षा के चलते आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को जल्द मुआवजा देने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है। कोर्ट ने इस अनुरोध को भी स्वीकार कर लिया।

CJP ने 5 सितंबर का मार्च भी वापस लिया

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के सह-संयोजक सौरभ दास भी मौजूद थे।

उन्होंने हाथ जोड़कर जजों का धन्यवाद किया और कोर्ट के आदेश को ऐतिहासिक बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित मार्च का आह्वान वापस लिया जा रहा है।

सौरभ दास के इस बयान को सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर लेने का आदेश दिया।

सुनवाई के अंत में चीफ जस्टिस ने उन्हें शुभकामनाएं दीं।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जुलाई के छात्र आंदोलन से जुड़ी एफआईआर में आगे की कार्रवाई नहीं होगी। हालांकि, भीड़ में शामिल उन लोगों के खिलाफ अलग से कार्रवाई की जा सकती है, जिनका गंभीर आपराधिक रिकॉर्ड रहा है।

वहीं, 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च भी वापस ले लिया गया है। यानी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद छात्र आंदोलन से जुड़े विवाद में फिलहाल एक बड़ा कानूनी और राजनीतिक मोड़ सामने आया है।

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