हर घर में चहके गोरैया की चहचहाहट, श्रीडूंगरगढ़ की बेटी गायत्री जोशी की अनूठी मुहिम सुजानगढ़ में बनी प्रेरणा
समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़, 5 अक्टूबर।
पर्यावरण संरक्षण और जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील सोच रखने वाली श्रीडूंगरगढ़ के बोहरा परिवार की बेटी गायत्री जोशी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। उन्होंने अपने ससुराल सुजानगढ़ में एक ऐसी प्रेरक मुहिम की शुरुआत की है, जो न केवल पक्षी प्रेम का संदेश देती है, बल्कि समाज को भी प्रकृति के साथ जीने की सीख सिखा रही है।
गायत्री जोशी ने यह ठाना है कि सुजानगढ़ का हर घर, हर मंदिर और हर दुकान के बाहर एक “गोरैया का घरोंदा” ज़रूर होगा, ताकि गोरैया जैसे छोटे पक्षियों को सुरक्षित आश्रय मिल सके।
उनकी इस अनूठी पहल के तहत, लकड़ी से बने सुंदर छोटे घरोंदे तैयार करवाए गए हैं जिन्हें उन्होंने अपने हाथों से घर-घर जाकर लगवाना शुरू किया है।
गायत्री कहती हैं — “गोरैया हमारी पुरानी साथी है, लेकिन अब यह विलुप्ति की कगार पर है। अगर हर घर थोड़ा-सा प्रयास करे, तो हम इसे फिर से अपने आंगन में लौटा सकते हैं।”
कल जब गायत्री अपने मायके श्रीडूंगरगढ़ के बोहरा परिवार में भाई के गृहप्रवेश समारोह में आईं, तो उन्होंने परंपरागत सगुन के साथ अपने भाई-भाभी को भी ‘गोरैया का घर’ भेंट किया।
उनकी यह प्रतीकात्मक भेंट इस बात का संदेश दे रही थी कि आधुनिक जीवनशैली में भी प्रकृति और जीवों के प्रति संवेदना को बनाए रखना जरूरी है।
गायत्री ने यह प्रेरणा अपने पीहर श्रीडूंगरगढ़ में चल रही विभिन्न सेवा और पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों से ली है। वहीं की सेवा भावना ने उन्हें यह सोच दी कि क्यों न अपने ससुराल में भी ऐसा कुछ किया जाए जो समाज को प्रकृति से जोड़ सके।
आज उनकी इस छोटी-सी मुहिम ने बड़ा संदेश दिया है —
“जहाँ मनुष्यों के लिए हर घर है, वहाँ गोरैया के लिए भी एक घर होना चाहिए।”
गायत्री जोशी की सोच अब सुजानगढ़ से निकलकर आसपास के कस्बों तक पहुंच रही है। कई लोग उनसे प्रेरित होकर अपने घरों के बाहर गोरैया के घरोंदे लगाने लगे हैं।
उनकी यह पहल अब एक अभियान का रूप ले रही है —
“हर घर, एक घर गोरैया के नाम।”












