समाचार-गढ़ 18 सितंबर, 2026।
UPI Charges: UPI ने भारत में पैसे भेजने और भुगतान करने का तरीका पूरी तरह बदल दिया है। चाय की दुकान से लेकर बड़े शोरूम तक, आज मोबाइल से पेमेंट करना रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। लेकिन अब ₹2,000 से ज्यादा के चुनिंदा UPI मर्चेंट पेमेंट पर MDR लागू होने जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि इसका असर दुकानदारों और ग्राहकों पर किस तरह पड़ेगा?
सरकार के नए फ्रेमवर्क के मुताबिक 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI ट्रांजैक्शन पर 0.4% MDR लागू होगा। इसकी अधिकतम सीमा सामान्य मामलों में ₹300 तय की गई है। हालांकि, यह शुल्क सीधे ग्राहक से वसूलने के लिए नहीं है। सरकार ने साफ किया है कि UPI से ग्राहक के भुगतान पर अलग से चार्ज नहीं लगाया जाएगा।
सबसे पहले समझिए- MDR आखिर है क्या?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान व्यवस्था में शामिल संस्थाओं को मिलता है। इसमें बैंक, पेमेंट ऐप और दूसरे पेमेंट सिस्टम पार्टनर्स शामिल होते हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि ग्राहक UPI से ₹2,500 का भुगतान करेगा तो उसके खाते से अतिरिक्त ₹10. यानी 0.4% अपने आप काट लिए जाएंगे। मौजूदा व्यवस्था में MDR का भार मर्चेंट पक्ष पर है और सरकार ने पेमेंट सिस्टम कंपनियों तथा बैंकों को इसे ग्राहकों पर डालने से रोकने की बात कही है।
हर UPI पेमेंट पर नहीं लगेगा शुल्क
इस बदलाव को लेकर सबसे ज्यादा भ्रम इसी बात पर है कि क्या अब हर UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा। ऐसा नहीं है।
₹2,000 तक के मर्चेंट UPI भुगतान MDR से मुक्त रहेंगे। इसके अलावा Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI पैसे पर किसी भी रकम की कोई फीस नहीं होगी।
सरकार के मुताबिक करीब 96% P2M UPI ट्रांजैक्शन भी इस नए MDR से प्रभावित नहीं होंगे। छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-MDR की व्यवस्था जारी रहेगी।
फिर व्यापारियों की चिंता क्यों बढ़ी?
व्यापारियों की मुख्य चिंता अतिरिक्त लागत को लेकर है। खासकर ऐसे कारोबार जहां मुनाफे का मार्जिन पहले से कम है, वहां हर अतिरिक्त भुगतान लागत महत्वपूर्ण हो सकती है।
यही वजह है कि कुछ कारोबारी संगठन और रिटेलर्स इस व्यवस्था का विरोध कर रहे हैं। उनका तर्क है कि MDR बढ़ने से बड़े डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ सकती है और इसका असर उनके मार्जिन पर पड़ सकता है।
यहीं से ग्राहक की चिंता भी जुड़ती है। अगर कोई व्यापारी डिजिटल भुगतान की लागत को लेकर परेशान होता है, तो वह बड़े UPI भुगतान को हतोत्साहित करने, किसी दूसरे भुगतान माध्यम को प्राथमिकता देने या अपनी कीमतों में बदलाव जैसे फैसले पर विचार कर सकता है।
क्या दुकानदार ग्राहक से UPI चार्ज ले सकता है?
सरकार ने इस मामले में स्थिति स्पष्ट की है कि MDR का भार ग्राहकों पर नहीं डाला जाना चाहिए। सरकार इस बात की निगरानी भी करेगी कि व्यापारी ग्राहकों से UPI शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम तो नहीं वसूल रहे हैं।
इसलिए ₹2,000 से ज्यादा का UPI भुगतान करने वाले ग्राहक के लिए यह समझना जरूरी है कि MDR और ग्राहक से लिया जाने वाला शुल्क एक ही चीज नहीं हैं।
कुछ सेवाओं के लिए अलग व्यवस्था
नए फ्रेमवर्क में कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग शुल्क संरचना रखी गई है। रेलवे, ईंधन, टेलीकॉम और बीमा जैसी कुछ श्रेणियों में फ्लैट MDR की व्यवस्था बताई गई है।
वहीं, छोटे व्यापारियों को अतिरिक्त बोझ से बचाने के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य UPI को लंबे समय तक टिकाऊ बनाना और उसके इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सिक्योरिटी और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करना है।
UPI के भविष्य पर क्यों हो रही है बहस?
UPI की सबसे बड़ी ताकत उसकी सादगी और बिना अतिरिक्त शुल्क वाली सुविधा रही है। इसी वजह से छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबार तक डिजिटल भुगतान तेजी से बढ़ा है।
अब MDR व्यवस्था आने के बाद बहस सिर्फ इस बात पर नहीं है कि शुल्क कितना है, बल्कि इस बात पर भी है कि व्यापारी और ग्राहक इस बदलाव को व्यवहार में कैसे लेते हैं।
सरकार का कहना है कि अधिकांश UPI भुगतान पहले की तरह प्रभावित नहीं होंगे और ग्राहक के लिए UPI भुगतान मुफ्त रहेगा। दूसरी ओर, व्यापारी संगठनों की चिंता है कि बड़े भुगतान पर नई लागत उनके मार्जिन को प्रभावित कर सकती है।
निष्कर्ष
यानी फिलहाल तस्वीर यह है कि UPI पूरी तरह पेड नहीं हुआ है। ₹2,000 तक के मर्चेंट भुगतान और सभी P2P ट्रांजैक्शन मुफ्त रहेंगे, जबकि तय शर्तों के तहत ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा मर्चेंट भुगतान पर MDR लागू होगा।
असल सवाल अब इसके नियम से ज्यादा जमीनी असर का है—क्या व्यापारी इस लागत को खुद वहन करेंगे, क्या डिजिटल भुगतान की आदत पर इसका असर पड़ेगा और क्या ग्राहक बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के पहले की तरह UPI का इस्तेमाल करते रहेंगे। आने वाले महीनों में इसी पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।








