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AI Safety: UN चीफ गुटेरेस की चेतावनी, AI की रफ्तार के आगे जोखिमों की समझ पड़ रही पीछे

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समाचार-गढ़ 17 सितंबर, 2026।

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल दुनिया के लिए बड़े अवसर लेकर आया है, लेकिन इसके साथ जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता भी बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि AI का विकास इतनी तेजी से हो रहा है कि जोखिमों को समझने की क्षमता उसके पीछे छूट रही है। उन्होंने कहा कि इन चिंताओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और AI की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

AI से फायदे भी, लेकिन जोखिमों पर नजर जरूरी

गुटेरेस ने माना कि AI में स्वास्थ्य, शिक्षा और जलवायु जैसे क्षेत्रों में बड़ा बदलाव लाने की क्षमता है। इसका इस्तेमाल सतत विकास को गति देने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने से लेकर सीखने और जलवायु लचीलापन बढ़ाने तक किया जा सकता है।

लेकिन चिंता AI के विकास की रफ्तार को लेकर है। गुटेरेस के मुताबिक, AI बनाने वाले लोगों में भी ऐसे विशेषज्ञ हैं जो इसकी तेज प्रगति और उससे जुड़े संभावित जोखिमों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। कुछ लोग विकास की रफ्तार पर रोक या विराम की बात कर रहे हैं, जबकि कई लोग मजबूत सुरक्षा उपायों (guardrails) की जरूरत बता रहे हैं।

AI के लिए सिर्फ देश नहीं, पूरी दुनिया को साथ आना होगा

UN महासचिव ने कहा कि AI के जोखिम किसी एक देश की सीमा तक सीमित नहीं हैं। इसलिए केवल राष्ट्रीय स्तर पर बनाए गए नियम पर्याप्त नहीं होंगे। सरकारों को अपने नागरिकों को AI से जुड़े संभावित खतरों से बचाने के लिए कदम उठाने होंगे, लेकिन इसके साथ वैश्विक स्तर पर तालमेल भी जरूरी है।

उन्होंने खास तौर पर कहा कि अगर AI के जोखिम किसी स्तर पर बहुत बढ़ जाते हैं और इसके विकास की रफ्तार धीमी करने की जरूरत महसूस होती है, तो अलग-अलग देशों की अकेले की गई पहल पर्याप्त नहीं होगी। इसके लिए साझा समझ और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है।

AI के लिए कॉमन सेफ्टी फ्रेमवर्क की जरूरत

गुटेरेस ने सुरक्षित, पारदर्शी और जवाबदेह AI के लिए ऐसे सुरक्षा उपायों की जरूरत पर जोर दिया, जिनसे यह तय किया जा सके कि किस स्थिति में किसी शक्तिशाली AI सिस्टम के लिए अतिरिक्त सुरक्षा उपाय जरूरी होंगे।

उन्होंने कहा कि AI के विकास के दौरान मानवीय गरिमा को केंद्र में रखना जरूरी है। UN के मुताबिक, AI की वैश्विक गवर्नेंस का उद्देश्य इसके फायदे हासिल करने के साथ इससे जुड़े जोखिमों को भी प्रभावी ढंग से संभालना है।

वैज्ञानिक सबूतों के आधार पर बने AI से जुड़े फैसले

AI से जुड़ी नीतियों को वैज्ञानिक आधार देने के लिए संयुक्त राष्ट्र ने Independent International Scientific Panel on AI की स्थापना की है। इस पैनल का काम AI के अवसरों, जोखिमों और प्रभावों का वैज्ञानिक आकलन करना है, ताकि दुनिया भर के नीति-निर्माताओं को बेहतर जानकारी मिल सके।

पैनल ने जुलाई 2026 में अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट जारी की थी। इसमें AI के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा, अर्थव्यवस्था, सुरक्षा, पर्यावरण, मानवाधिकार, लोकतंत्र और AI गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में इसके प्रभावों का आकलन किया गया है।

गुटेरेस का साफ संदेश

गुटेरेस ने AI को रोकने के बजाय इसके सुरक्षित और जिम्मेदार विकास पर जोर दिया है। उनका कहना है कि दुनिया AI से मिलने वाले फायदों को हासिल कर सकती है, लेकिन इसके लिए सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को विकास के साथ आगे बढ़ाना होगा।

यानी AI की रफ्तार जितनी तेज हो रही है, उतनी ही तेजी से उसके लिए सुरक्षा के नियम और अंतरराष्ट्रीय सहयोग विकसित करने की जरूरत भी बढ़ रही है।

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