समाचार गढ़ 7 जून 2026। विपक्षी गठबंधन INDIA की सोमवार (8 जून) को प्रस्तावित बैठक से पहले सहयोगी दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं। द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) द्वारा कांग्रेस की मौजूदगी के कारण बैठक से दूरी बनाने की घोषणा के बाद अब भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी माकपा ने भी कांग्रेस की कार्यशैली पर गंभीर नाराजगी जताई है। माकपा ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि केरल में उसके नेताओं द्वारा लगाए गए भाजपा के साथ कथित ‘डील’ के आरोप गठबंधन की मूल भावना के खिलाफ हैं।
माकपा के महासचिव एम. ए. बेबी ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को पत्र लिखकर इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही इस पत्र की प्रतियां INDIA गठबंधन के अन्य सहयोगी दलों को भी भेजी गई हैं। माना जा रहा है कि यह पत्र गठबंधन के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत है।
एम. ए. बेबी ने अपने पत्र में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के बयानों पर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि केरल विधानसभा चुनाव अभियान के दौरान कांग्रेस नेताओं ने बार-बार यह प्रचार किया कि माकपा और भारतीय जनता पार्टी के बीच राजनीतिक समझौता है तथा केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच कोई विशेष राजनीतिक समझौता या ‘डील’ है।
माकपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और झूठा करार देते हुए कहा है कि ऐसे बयान विपक्षी एकता को कमजोर करने वाले हैं। पार्टी का कहना है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं द्वारा लगाए गए ये आरोप INDIA गठबंधन की भावना और उद्देश्य के विपरीत हैं।
पत्र में माकपा ने कांग्रेस नेतृत्व को यह भी याद दिलाया कि केरल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा के खिलाफ सबसे अग्रिम मोर्चे पर लड़ाई लड़ते हुए उसके सैकड़ों समर्पित कार्यकर्ताओं ने अपने प्राणों की आहुति दी है। ऐसे में भाजपा के साथ समझौते के आरोप न केवल तथ्यहीन हैं, बल्कि पार्टी कार्यकर्ताओं के संघर्ष और बलिदान का भी अपमान हैं।
इधर, सूत्रों के अनुसार झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर भी गठबंधन के भीतर असंतोष की स्थिति बनी हुई है। बताया जा रहा है कि कांग्रेस द्वारा उम्मीदवार उतारे जाने के फैसले से झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) भी नाराज है। इससे INDIA गठबंधन के भीतर खींचतान और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
ऐसे में सोमवार को होने वाली INDIA गठबंधन की बैठक से पहले सहयोगी दलों की नाराजगी विपक्षी एकजुटता के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि कांग्रेस इन आरोपों और नाराजगी पर क्या रुख अपनाती है तथा बैठक में गठबंधन के भीतर पैदा हुए मतभेदों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।









