धर्मास में पूज्य तनसिंहजी की 102वीं जयंती भव्य रूप से सम्पन्न
श्रद्धा, विचार और संगठनात्मक चेतना से ओतप्रोत रहा समारोह, हजारों की सहभागिता
समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़।
श्री क्षत्रिय युवक संघ के संस्थापक पूज्य तनसिंहजी की 102वीं जयंती समारोह धर्मास (श्रीडूंगरगढ़) में श्रद्धा, विचार और संगठनात्मक ऊर्जा के साथ भव्य रूप से आयोजित हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत संघ परंपरानुसार संस्थापक पूज्य तनसिंहजी की तस्वीर पर माल्यार्पण एवं पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। बालिका स्वयंसेविकाओं द्वारा प्रार्थना कर वातावरण को भावविभोर किया गया।
इसके पश्चात संघ के स्वयंसेवक संदीप सिंह पुन्दलसर ने श्री क्षत्रिय युवक संघ के शिविरों के प्रकार, पूज्य तनसिंहजी की साहित्यिक कृतियां तथा संघ कार्यालयों का संक्षिप्त परिचय देते हुए संघ की विचारधारा को विस्तार से रखा।
संघ के स्वयंसेवक कल्याण सिंह झंझेऊ ने संघ से निरंतर संपर्क में रहने से क्षेत्र में आए सकारात्मक परिवर्तनों का उल्लेख करते हुए कहा कि शाखाओं एवं शिविरों के माध्यम से जुड़े रहने से व्यक्ति के जीवन व्यवहार में व्यावहारिकता और सामाजिक चेतना का विकास होता है।
पूर्व सरपंच रतन सिंह केऊ ने संघ के आनुषंगिक संगठनों—श्री प्रताप फाउंडेशन, श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन, प्रताप युवा शक्ति एवं दुर्गा महिला विकास संस्थान—की गतिविधियों एवं सामाजिक योगदान की जानकारी दी।
पूर्व प्रधान छैलूसिंह शेखावत ने पूज्य तनसिंहजी के राजनीतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि राजनीति में रहते हुए भी उन्होंने कभी स्वयं को संघ कार्य पर हावी नहीं होने दिया, बल्कि संघ कार्य उनके लिए सदैव प्राथमिकता रहा।
इस अवसर पर स्वयंसेवक कैलाश सिंह ढींगसरी ने पूज्य तनसिंहजी द्वारा रचित प्रसिद्ध गीत “मैं निर्झर हूं…” का भावपूर्ण गायन प्रस्तुत किया।
वरिष्ठ स्वयंसेवक एडवोकेट भरतसिंह शेरूणा ने पूज्य तनसिंहजी के साथ बिताए पलों को साझा करते हुए कहा कि उनका सान्निध्य बताने की नहीं, बल्कि महसूस करने की अनुभूति है। उन्होंने पूज्यश्री द्वारा संचालित शिविरों, कार्यक्रमों, उनकी सादगी, बौद्धिक प्रवचनों तथा संघ कार्य के प्रति उनकी सतत तत्परता पर विस्तार से प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता के रूप में शेखावाटी संभाग प्रमुख खींवसिंह सुल्ताना ने पूज्य तनसिंहजी के जीवन व्यवहार को भगवान राम, कृष्ण, महावीर स्वामी एवं बुद्ध के समान दायित्वबोध का प्रतीक बताया। उन्होंने पूज्य श्री के जन्म एवं जीवन संघर्षों का उल्लेख करते हुए कहा कि चार वर्ष की आयु में पिता का साया उठ जाने जैसी कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने शैक्षणिक, साहित्यिक, राजनीतिक एवं व्यावसायिक जीवन में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि श्री क्षत्रिय युवक संघ, पूज्य तनसिंहजी की मानस पीड़ा का मूर्त रूप है, जो समाज को संस्कारमयी एवं मनोवैज्ञानिक कर्मप्रणाली के माध्यम से जीवन व्यवहार में ढालने का मार्ग प्रशस्त करता है।
कार्यक्रम का संचालन श्रीडूंगरगढ़ प्रांत प्रमुख जेठूसिंह पुन्दलसर ने किया।
इनकी रही उल्लेखनीय उपस्थिति
कार्यक्रम में समुद्र सिंह धीरदेसर, भंवरसिंह झंझेऊ, भंवरसिंह जोधासर, हेतराम जाखड़ (रीड़ी), जगमालसिंह ईंदपालसर, रणवीर सिंह सेरूणा, जगमालसिंह कीतासर, महेंद्र सिंह मिंगसरिया, मांगुसिंह, ओमपाल सिंह जोधासर, भंवरसिंह मिंगसरिया, भागीरथ सिंह धर्मास, हरी सिंह गुसाईंसर, अजीत सिंह हीरावतान, माल सिंह धर्मास, लक्ष्मण सिंह ईंदपालसर, भुर सिंह हथाणा, करणी सिंह, अमरसिंह, दुलेसिंह गुसाईंसर, रणजीत सिंह धर्मास, देवी सिंह नोसरिया, मदन सिंह मिंगसरिया, राजूराम नाई, जनकदास धर्मास सहित प्रांत क्षेत्र के संघ स्वयंसेवक, तहसील क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आए सभी समाजों के हजार से अधिक लोग एवं बड़ी संख्या में मातृशक्ति उपस्थित रही।
कार्यक्रम के समापन पर सभी उपस्थितजनों द्वारा अल्पाहार ग्रहण किया गया।














