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राजस्थली के स्वर्ण जयंती वर्ष में 51 विद्वानों को किया जाएगा पुरस्कृत-सम्मानित

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समाचार गढ़, 29 अगस्त 2025, बीकानेर/श्रीडूंगरगढ़। राष्ट्रभाषा हिन्दी प्रचार समिति के सहयोगी संस्थान मरूभूमि शोध संस्थान, श्रीडूंगरगढ़ द्वारा प्रकाशित-प्रसारित भाषा, साहित्य, संस्कृति और लोक चेतना की त्रैमासिकी ‘राजस्थली’ 1 सितम्बर 2025 को 50वें वर्ष में प्रवेश करेगी। पत्रिका के स्वर्ण जयंती वर्ष के उपलक्ष में वर्ष भर साहित्यिक-सांस्कृतिक और शोध से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे और वर्ष भर में 51 विद्वानों को उनके साहित्यिक, सांस्कृतिक और भाषायी अवदान के लिए समादृत-पुरस्कृत भी किया जायेगा। समिति की कार्यकारिणी की बैठक में इस सम्बन्ध में लिये गये निर्णयों की जानकारी साझा करते हुए संस्थाध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि राजस्थली देश की एक मात्र राजस्थानी भाषा माध्यम की पत्रिका है, जो स्वर्ण जयंती मनाएगी। केन्द्र सरकार द्वारा आठवीं अनुसूची में सूचीबद्ध न किये जाने और राज्य सरकार द्वारा आमजन की निरन्तर मांग के बावजूद स्टेट लैंग्वेज के रूप में स्वीकार न किये जाने के बावजूद यह लोक मान्यता का ही असर है कि राजस्थानी भाषा की यह पत्रिका स्वर्ण जयंती मनाने जा रही है। संस्था के उपाध्यक्ष डॉ. मदन सैनी ने बताया कि स्वर्ण जयंती वर्ष में वर्ष भर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे और राजस्थानी के प्रचार-प्रसार व भाषायी मान्यता के लिए पत्रिका के विशेषांक प्रकाशन के साथ कई नवाचार भी प्रस्तावित है।
इसी श्रृंखला में गत वर्ष प्रारम्भ किये गयेे नये सम्मान श्री सूर्य प्रकाश बिस्सा स्मृति राजस्थानी महिला लेखन सम्मान और कला-डूंगर कल्याणी स्मृति राजस्थानी बाल साहित्य सम्मान के लिए साहित्यिक विधाओं की मौलिक और अप्रकाशित पांडुलिपियां आमंत्रित की गई है। राजस्थानी भाषा के विकास, प्रचार-प्रसार, साहित्यिक पाठकीय जुड़ाव और महिला लेखन व बाल साहित्य को मुकम्मल प्रोत्साहन सुनिश्चित करने के लिए गत वर्ष ये दो नये सम्मान प्रायोगिक तौर पर प्रारम्भ किये गये थे। सम्मान समिति के संयोेजक रवि पुरोहित ने बताया कि इस सम्मान हेतु केवल मौलिक और अप्रकाशित साहित्यिक पांडुलिपियां ही विचारार्थ भेजी जा सकती है। महिला लेखन सम्मान हेतु 96 से 128 पृष्ठ तक की और बाल साहित्य सम्मान हेतु 64 से 72 पृष्ठ तक की साहित्य की किसी भी विधा में पांडुलिपि विचारार्थ भिजवाई जा सकती है। पांडुलिपियां स्पष्ट टंकित रूप में होनी चाहिए और इसकी एक प्रति मय ई मेल साफ्ट प्रति 20 अक्टूबर, 2025 तक सचिव, मरूभूमि शोध संस्थान, संस्कृति भवन, एन.एच.11, जयपुर रोड़, श्रीडूंगरगढ (राजस्थान)-331803 के पते पर पहुंच जानी चाहिए। चयनित रचनाकार की पांडुलिपि संस्थान द्वारा निःशुल्क प्रकाशित करवा कर मातृभाषा दिवस पर लोकार्पित करवाई जाएगी और इसके लेखक को इसी दिन संस्था द्वारा आयोज्य समारोह में सम्मान के साथ प्रकाशित कृति की 41 प्रतियां अर्पित की जावेगी। योजना के तहत प्रकाशित कृतियों पर समानधर्मा संस्थाओं के सहयोग से प्रदेश के अलग-अलग स्थानों पर चर्चा कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे, जिसमें महिलाओं और बच्चों को खास तौर पर जोड़ा जाएगा।

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