दिनांक 31- 05-2023 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय के साथ
आज गणपति बप्पा देंगे गृह कलेश से मुक्ति जानें कैसे ?
श्री गणेशाय नम:
तिथि वारं च नक्षत्रं
योगो करणमेव च ।
पंचागं श्रृणुते नित्यं
श्रीगंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
शास्त्रों के अनुसार नित्य पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र ,योग ,करण आदि पांच अंगों को सुनने से गंगा स्नान के बराबर फल मिलता है अतः नित्य पंचांग अवश्य सुनना चाहिए।। *आज का पंचांग*
दिनांक- 31/ 05 /2023
श्री डूंगरगढ़
अक्षांश – 28:06
रेखांश – 74:04
पंचांग
विक्रम संवत् – 2080
शक संवत् – 1945
* ऋतु – ग्रीष्म
* अयन- उत्तरायण
* मास – ज्येष्ठ
* पक्ष- शुक्ल
* तिथि- एकादशी दोपहर 13:43 बजे उपरांत द्वादशी
* वार- बुधवार
* नक्षत्र – हस्त प्रातः05:56 बजे उपरांत चित्रा
* योग- व्यतिपात सायं 20:11:12 बजे उपरांत वरियान
करण- 1 विष्टि (भद्रा) -13:43 P.M. 2 बव- 24:39:30 A.M.उपरांत बालव
चंद्र राशि – कन्या सायं 18:26 बजे उपरांत तुला
चंद्र बल – मेष, वृषभ, कर्क,सिंह, कन्या, वृश्चिक, धनु, मकर,मीन सायं 18:26 बजे उपरांत मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ
सम्वत् नाम – पिंगल
सूर्योदय – 05:46 A.M. सूर्यास्त – 07:17 P.M.
दिनमान – 13:31
रात्रिमान – 10:28 *अशुभ समय* यमगण्ड - प्रातः 7:30 से 9:00 तक राहुकाल- दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक
*(विशेष- राहुकाल चक्र भारत के दक्षिण संभाग में ही मान्य है दक्षिण संभाग के लोगों को शुभ कार्यो में राहु काल के समय का त्याग करना चाहिए किंतु उत्तर भारत में राहुकाल का समय शुभ कार्यों में त्यागने की आवश्यकता नहीं है । ) **
कालवेला या अर्द्धयाम
- प्रातः 09:08:45 से 10:50:07 बजे तक
- रात्रि 03:08:00 से 04:26:30 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक
दिशा शूल – उत्तर दिशा में यात्रा विशेष वर्जित एवं यथासंभव सभी दिशाओं की यात्राओं को टालें
चौघड़िया ( दिन)
1.लाभ- प्रातः 05:46 से 07:27:22 तक
2.अमृत-प्रातः 07:27:22 से 09:08:45 तक
3.काल-प्रातः 09:08:45 से 10:50:07 तक (कालवेला निषेध)
4.शुभ-प्रातः 10:50:07 से 12:31:30 तक
5.रोग- दोपहर 12:31:30 से 02:12:52 तक(वारवेला निषेध)
6.उद्वेग-दोपहर 02:12:52 से 03:54:15 तक
7.चंचल- सायं 03:54:15 से 05:35:37 तक
8.लाभ-सायं 05:35:37 से 07:17 तक
चौघड़िया ( रात्रि)
1.उद्वेग-रात्रि 07:17 से 08:35:30 तक
2.शुभ-रात्रि;08:35:30 से 09:54:00 तक
3.अमृत-रात्रि 09:54:00 से 11:12:30 तक
4.चंचल-रात्रि 11:12:30 से 12:31:00 तक
5.रोग-रात्रि 12:31:00 से 01:49:30 तक
6.काल-रात्रि 01:49:30 से 03:08:00 तक
7.लाभ-रात्रि 03:08:00 से 04:26:30 तक(कालवेला निषेध)
8.उद्वेग-रात्रि 04:26:30 से 05:45 तक
विशेष – निर्जला एकादशी व्रत
यदि आप किसी भी प्रकार से गृह क्लेश से पीड़ित हैं तो कृपया बुधवार के दिन दुर्वा अर्थात् दोब से गणेश जी की प्रतीकात्मक प्रतिमा बनाकर इसे अपने घर के मंदिर में स्थापित करें एवं प्रतिमा का प्रतिदिन विधिवत पूजन अवश्य करें इस प्रयोग से भगवान गणपति बप्पा अपने भक्तों को गृह क्लेश से मुक्त कर देते हैं।
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ( शास्त्री-आचार्य ,ज्योतिष विद्, बी.ए.)
भू.पू. सहायक आचार्य
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय
श्री डूंगरगढ़
M.N. 9829660721











