दिनांक 29- 06-2023 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय के साथ
देवशयनी एकादशी आज !जानें पौराणिक रहस्य
श्री गणेशाय नम:
तिथि वारं च नक्षत्रं
योगो करणमेव च ।
पंचागं श्रृणुते नित्यं
श्रीगंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
शास्त्रों के अनुसार नित्य पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र ,योग ,करण आदि पांच अंगों को सुनने से गंगा स्नान के बराबर फल मिलता है अतः नित्य पंचांग अवश्य सुनना चाहिए।। *आज का पंचांग*
दिनांक- 29/06/2023
श्री डूंगरगढ़
अक्षांश – 28:06
रेखांश – 74:04
पंचांग
विक्रम संवत् – 2080
शक संवत् – 1945
* ऋतु – वर्षा
* अयन- दक्षिणायण
* मास – आषाढ़
* पक्ष- शुक्ल
* तिथि- एकादशी रात्रि 26:38:42 बजे उपरांत द्वादशी
* वार- गुरुवार
* नक्षत्र – स्वाति सायं 16:26 बजे उपरांत विशाखा
* योग- सिद्ध रात्रि 27:39:36 बजे उपरांत साध्य
- करण- 1 वणिज -15:03:12 A.M. 2 विष्टि -26:38:42 A M. उपरांत बव-
- चंद्र राशि – तुला
चंद्र बल – मेष, वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ
- चंद्र राशि – तुला
सम्वत् नाम – पिंगल
सूर्योदय – 05:48 A.M. सूर्यास्त – 07:26 P.M.
दिनमान – 13:38
रात्रिमान – 10:22 *शुभ समय* अभिजित मुहूर्त मध्याह्न - 12:13 बजे से 01:01 तक
अशुभ समय
यमगण्ड – प्रातः 6:00 से 7:30 बजे तक राहुकाल- दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक
*(विशेष- राहुकाल चक्र भारत के दक्षिण संभाग में ही मान्य है दक्षिण संभाग के लोगों को शुभ कार्यो में राहु काल के समय का त्याग करना चाहिए किंतु उत्तर भारत में राहुकाल का समय शुभ कार्यों में त्यागने की आवश्यकता नहीं है । ) **
कालवेला या अर्द्धयाम
1. सायं 04:01:30 से 05:43:45 बजे तक
2. रात्रि- 12:37:00 से 01:54:45 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 9:00 से 10:30 बजे तक
दिशा शूल – दक्षिण दिशा में यात्रा वर्जित है
चौघड़िया ( दिन)
1.शुभ- प्रातः 05:48 से 07:30:15 तक
2.रोग-प्रातः 07:30:15 से 09:12:30 तक
3.उद्वेग-प्रातः 09:12:30 से 10:54:45 तक
4.चंचल-प्रातः 10:54:45 से 12:37:00 तक
5.लाभ-दोपहर 12:37:00 से 02:19:15 तक
6.अमृत-दोपहर 02:19:15 से 04:01:30 तक
7.काल-सायं 04:01:30 से 05:43:45 तक (कालवेला निषेध)
8.शुभ-सायं 05:43:45 से 07:26 तक (वार वेला निषेध)
चौघड़िया ( रात्रि)
1.अमृत-रात्रि 07:26 से 08:43:45 तक
2.चंचल-रात्रि 08:43:45 से 10:01:30 तक
3.रोग-रात्रि 10:01:30 से 11:19:15 तक
4.काल-रात्रि 11:19:15 से 12:37:00 तक
5.लाभ-रात्रि 12:37:00 से 01:54:45 तक(कालवेला निषेध)
6.उद्वेग-रात्रि 01:54:45 से 03:12:30 तक
7.शुभ-रात्रि 03:12:30 से 04:30:15 तक
8.अमृत-रात्रि 04:30:15 से 05:48 तक
विशेष – देवशयनी एकादशी व्रत, चातुर्मास आरंभ
पद्म पुराण के अनुसार देवशयनी एकादशी के व्रत का वर्णन तो भगवान ब्रह्मा जी भी नहीं कर सकते हैं इस व्रत से व्यक्ति न केवल पाप मुक्त होकर उत्तम लोक में स्थान पाने का अधिकारी ही बनता है बल्कि इस व्रत को करने वाला व्यक्ति महा पुण्यवान भी माना जाता है और उस व्यक्ति को कई यज्ञ उत्तम वस्तुओं का दान करने का पुण्य भी प्राप्त होता है। भगवान श्री कृष्ण के अनुसार देवशयनी एकादशी व्रत करने वाला मनुष्य भगवान विष्णु का सबसे प्रिय माना जाता है।
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ( शास्त्री-आचार्य ,ज्योतिष विद्, बी.ए.)
भू.पू. सहायक आचार्य
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय
श्री डूंगरगढ़
M.N. 9829660721




















