दिनांक 30-06-2023 के पंचांग के साथ जाने और भी कई खास बातें आचार्य राजगुरू पंडित रामदेव उपाध्याय के साथ
इत्र लगाने से मिलता है अपार सुख जानें कैसे ?
श्रीगणेशाय नम:
तिथि वारं च नक्षत्रं
योगो करणमेव च ।
पंचागं श्रृणुते नित्यं
श्रीगंगा स्नानं फलं लभेत् ।।
शास्त्रों के अनुसार नित्य पंचांग के तिथि, वार, नक्षत्र ,योग ,करण आदि पांच अंगों को सुनने से गंगा स्नान के बराबर फल मिलता है अतः नित्य पंचांग अवश्य सुनना चाहिए।। *आज का पंचांग*
दिनांक- 30/06/2023
श्री डूंगरगढ़
अक्षांश – 28:06
रेखांश – 74:04
पंचांग
विक्रम संवत् – 2080
शक संवत् – 1945
* ऋतु – वर्षा
* अयन- दक्षिणायण
* मास – आषाढ़
* पक्ष- शुक्ल
* तिथि- द्वादशी रात्रि 25:13 बजे उपरांत त्रयोदशी
* वार- शुक्रवार
* नक्षत्र – विशाखा सायं 16:06 बजे उपरांत अनुराधा
* योग- 1 साध्य- रात्रि 25:27:36 बजे उपरांत शुभ
*करण- * 1 बव-14:01:36 P.M. 2 बालव – 25:13 A.M. उपरांत कौलव
* चंद्र राशि – तुला प्रातः 10:16 बजे उपरांत वृश्चिक
चंद्र बल – मेष,वृषभ, मिथुन, सिंह, कन्या, तुला, धनु, मकर, कुंभ
प्रातः 10:16 बजे उपरांत वृषभ, मिथुन, कर्क, कन्या, तुला, वृश्चिक, मकर, कुंभ, मीन
सम्वत् नाम- पिंगल
सूर्योदय- 05:48 A.M. सूर्यास्त- 07:26 P.M.
दिनमान- 13:38
रात्रिमान- 10:22 *शुभ समय* अभिजित मुहूर्त मध्याह्न - 12:13 से 01:01 बजे तक
अशुभ समय
यमगण्ड – सायं 3:00 से 4:30 बजे तक राहुकाल- प्रातः 10:30 से 12:00 बजे तक
*(विशेष- राहुकाल चक्र भारत के दक्षिण संभाग में ही मान्य है दक्षिण संभाग के लोगों को शुभ कार्यो में राहु काल के समय का त्याग करना चाहिए किंतु उत्तर भारत में राहुकाल का समय शुभ कार्यों में त्यागने की आवश्यकता नहीं है । ) **
कालवेला या अर्द्धयाम
1.प्रातः 10:54:45 से 12:37:00 बजे तक 2.रात्रि 10:01:30 से 11:19:15 बजे तक
गुलिक काल – प्रातः 7:30 से 9:00 बजे तक
दिशा शूल – पश्चिम दिशा
चौघड़िया ( दिन )
1.चंचल- प्रातः 05:48 से 07:30:15 तक
2.लाभ-प्रातः 07:30:15 से 09:12:30 तक
3.अमृत- प्रातः 09:12:30 से 10:54:45 तक (वार वेला निषेध)
4.काल-प्रातः 10:54:45 से 12:37 तक (कालवेला निषेध)
5.शुभ- दोपहर 12:37 से 02:19:15 तक
6.रोग-दोपहर 02:19:15 से 04:01:30 तक
7.उद्वेग-सायं 04:01:39 से 05:43:45 तक
8.चंचल-सायं 05:43:45 से 07:26 तक
चौघड़िया ( रात्रि)
1.रोग- रात्रि 07:26 से 08:43:45 तक
2.काल-रात्रि 08:43:45 से 10:01:30 तक
3.लाभ-रात्रि 10:01:30 से 11:19:15 तक (कालवेला निषेध)
4.उद्वेग-रात्रि 11:19:15 से 12:37:00 तक
5.शुभ-रात्रि 12:37:00 से 01:54:45 तक
6.अमृत-रात्रि 01:54:45 से 03:12:30 तक
7.चंचल-रात्रि 03:12:30 से 04:30:15 तक
8.रोग-रात्रि 04:30:15 से 05:48 तक
विशेष–
शुक्र ग्रह का भौतिक सुख का कारक माना जाता है शुक्र ग्रह को प्रबल करके हम अपने जीवन में धन, यश, ऐश्वर्य आदि सुविधाएं प्राप्त कर सकते हैं। जिसकी जन्म कुंडली या गोचर कुंडली में शुक्र ग्रह निर्बल होता है उनका जीवन प्रायः कष्टप्रद ही रहता है। अतः शुक्र ग्रह को प्रबल बनाने के लिए शुक्रवार के दिन इत्र अवश्य लगाएं। जो लोग प्रायः उदास या दुखी रहते हैं उन्हें विशेषतः शुक्रवार को इत्र का प्रयोग अवश्य करना चाहिए
राजगुरु पंडित रामदेव उपाध्याय ( शास्त्री-आचार्य ,ज्योतिष विद्, बी.ए.)
भू.पू. सहायक आचार्य
श्री ऋषिकुल संस्कृत विद्यालय
श्री डूंगरगढ़
M.N. 9829660721




















