सूडसर उपडाकघर बचाओ संघर्ष समिति का ऐलान, प्रशासन को चेताने के लिए 5 फरवरी को करेंगे चेतावनी सभा, 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल दिल्ली रवाना, सांसद व संचार मंत्री से मिलेगा
समाचार गढ़, श्रीडूंगरगढ़। सूडसर कस्बे के उपडाकघर के आगे सूडसर उपडाकघर बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले चल रहे धरना स्थल पर मंगलवार को आम बैठक हुई और इसमें पांचों गांवों के लोगों की भागीदारी रही। इस आम बैठक में प्रशासन को चेताने के लिए पांच फरवरी को चेतावनी सभा करने का प्रस्ताव आम सहमति से पारित किया गया। इसके साथ ही एक 11 सदस्यीय प्रतिनिधि मंडल दिल्ली भेजने का निर्णय लिया गया। जो मंगलवार रात्रि को ट्रेन से दिल्ली के रवाना हुआ और बुधवार को क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल व संचार मंत्री से मिलेगा।
इससे पूर्व आम बैठक में पूर्व विधायक गिरधारीलाल महिया ने इस लड़ाई को गंभीरता से लड़ने की बात कही और कहा कि प्रशासन के कानों तक संघर्ष की आवाज पहुंचाने के लिए संगठित व एकजुट होकर संघर्ष करेंगे, तब ही प्रशासन का बहरापन दूर हो सकेगा। प्रशासन व सरकार को कुंभकर्णी नींद से जागने के गांधीवादी तरीके से आंदोलन के साथ समय-समय पर जनता की ताकत दिखाकर लड़ाई लड़नी पड़ती है।
कोडाराम भादू ने कहा कि आंदोलन की मजबूती के लिए हम सबको संघर्ष समिति के किसी तरह के ऐलान को लागू करने के लिए जागरूक व तत्परता दिखानी चाहिए। संगठित व एकजुट होकर हमें लड़ाई लड़नी होगी और इन गांवों की अस्मिता का सवाल है।
इस अवसर पर मोहनलाल भादू, जगदीश प्रसाद स्वामी, दानाराम भादू, बाबूलाल जाजड़ा, मांगीलाल स्वामी, अरूण दर्जी, मूलाराम गोदारा, ओमप्रकाश सुथार, वकील लालूराम भादू, शेखर रेगर आदि ने सूडसर उपडाकघर बचाओ के आंदोलन में संघर्ष समिति के प्रत्येक ऐलान को सजगता से लागू करने एवं दलगत भावनाओं से ऊपर उठकर साथ देने की बात कही और कहा कि क्षेत्र के पांचों गांवों के साथ प्रशासन का सतौला व्यवहार व हठधर्मिता को सहन नहीं किया जाएगा। इसके लिए संघर्ष को किसी भी स्तर पर ले जाना पड़ेगा तो हरगिज पीछे नहीं हटेंगे और संगठित रूप लड़ाई लड़ेंगे। उपडाकघर रियायतकालीन धरोहर थी और इसके साथ डाक विभाग की छेड़-छाड़ कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस दौरान सूडसर व्यापार मंडल अध्यक्ष सोहनदास स्वामी, गोपालाराम भादू, सुनील दुगरिया, मोहन भादू देराजसरी, राजकुमार सोनी, भानीसिंह भाटी, रामदयाल बुड़िया, रामलाल भादू, कोजाराम खोड, मनीष नायक, रेवंत सेन, लालूराम सारण, सीताराम खोड,महबूब अली, भंवरलाल रेगर, मामराज भादू समेत बड़ी संख्या में पांचों गांवों के ग्रामीण मौजूद रहे।












