समाचार-गढ़ 8 अक्टूबर, 2026।
राजस्थान के नागौर जिले के गांव-कस्बों में आंखों की बीमारी दूर करने के नाम पर बिना ब्रांड और मेडिकल प्रमाणन के करीब 600 रुपये में सुरमा बेचे जाने का मामला सामने आया है। दावा किया जा रहा है कि यह सुरमा मोतियाबिंद ठीक करने, आंखों की जलन-खुजली दूर करने और यहां तक कि चश्मे का नंबर कम करने में मदद करता है। लेकिन इस सुरमे के इस्तेमाल के बाद कुछ लोगों को आंखों से जुड़ी गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा है।
रिपोर्ट के मुताबिक, जिले में 200 से ज्यादा स्थानों पर पड़ताल की गई, जहां इस सुरमे की बिक्री और इसके जरिए किए जा रहे दावों की जानकारी सामने आई। कुछ विक्रेताओं ने आंखों की अलग-अलग समस्याओं के समाधान का दावा किया।
सुरमा लगाने के बाद 3 लोगों को हुई आंखों में परेशानी
पड़ताल के दौरान ऐसे तीन पीड़ित सामने आए, जिन्होंने सुरमा लगाने के बाद आंखों में परेशानी होने की बात कही। शिकायतों में आंखों में सूजन, जख्म, तेज जलन, संक्रमण और कम दिखाई देना शामिल है।
एक पीड़ित की कॉर्निया में खराबी आने की बात सामने आई, जबकि दूसरे की आंखों की रोशनी कमजोर होने की शिकायत थी। तीसरे पीड़ित का इलाज फिलहाल जोधपुर के मथुरादास माथुर अस्पताल में चल रहा है।
हालांकि, सुरमे के कारण ही ये समस्याएं हुईं या इनके पीछे कोई अन्य चिकित्सकीय कारण है, यह डॉक्टरी जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। रिपोर्ट में भी इस संबंध में अंतिम मेडिकल निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
किसी ने रात में लगाया, सुबह आंख में सूजन और जलन
एक मामले में पीड़ित ने रात में सुरमा लगाया था। सुबह आंख में सूजन और जलन की शिकायत सामने आई। इसके बाद जोधपुर में इलाज कराया गया।
एक अन्य व्यक्ति ने ऑनलाइन सुरमा मंगवाया था। इस्तेमाल के बाद उसकी आंखों में तेज खुजली होने लगी और धीरे-धीरे दिखाई देने में परेशानी बढ़ गई।
एक अन्य मामले में करीब 600 रुपये में सुरमे की शीशी मंगवाई गई। पीड़ित ने इसे चार दिन तक इस्तेमाल किया, जिसके बाद आंख में संक्रमण की शिकायत हुई। डॉक्टर की जांच में आंख में संक्रमण पाया गया और कॉर्निया में खराबी की बात सामने आई।
200 से ज्यादा जगहों पर हुई पड़ताल
रिपोर्ट के मुताबिक, सुरमे की बिक्री को लेकर 200 से ज्यादा स्थानों पर पड़ताल की गई। कई जगहों पर विक्रेता आंखों की अलग-अलग समस्याओं को ठीक करने के दावे के साथ सुरमा बेचते मिले।
इन दावों में खुजली, जलन और जाला जैसी सामान्य शिकायतों से लेकर मोतियाबिंद तक ठीक करने का दावा शामिल है। कुछ जगहों पर चश्मे का नंबर कम करने का दावा भी किया जा रहा है।
गांवों तक ऐसे पहुंच रहा सुरमा
पड़ताल में सुरमे की पैकिंग और बिक्री का तरीका भी सामने आया। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरमा गांवों तक पहुंचाया जा रहा है और कई जगहों पर इसे स्थानीय स्तर पर तैयार किए जाने की बात सामने आई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एक शीशी की कीमत करीब 600 रुपये बताई गई है। कुछ विक्रेताओं की ओर से प्रतिदिन 600 से 800 शीशी तक बिक्री होने का दावा किया गया।
यदि इस अनुमान को आधार मानें और करीब 2,000 विक्रेताओं तथा प्रत्येक की रोजाना 200 से 500 शीशी बिक्री का अनुमान लगाया जाए, तो संभावित कारोबार बहुत बड़ा हो सकता है। हालांकि, ये आंकड़े अनुमान और विक्रेताओं के दावों पर आधारित हैं, वास्तविक बिक्री का आधिकारिक आंकड़ा नहीं है।
ड्रग्स एंड मैजिक रेमेडीज एक्ट में भी प्रावधान
रिपोर्ट में बताया गया है कि Drugs and Magic Remedies (Objectionable Advertisements) Act, 1954 में कुछ बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी स्थितियों के उपचार को लेकर भ्रामक या गलत दावों वाले विज्ञापनों पर प्रावधान हैं। कॉस्मेटिक के निर्माण से जुड़े मामलों के लिए भी संबंधित प्रावधान मौजूद हैं।
नागौर के CMHO डॉ. धीरज बिस्सा ने कहा कि जिले में जहां-जहां यह कारोबार चल रहा है, उन्हें चिह्नित कर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने लोगों से ऐसे दावों पर भरोसा न करने की अपील करते हुए कहा कि मामले की जांच कराई जाएगी।
फिलहाल सुरमे के इस्तेमाल से सामने आई आंखों की समस्याओं और इसकी बिक्री से जुड़े दावों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इसके खिलाफ आगे किस स्तर की कार्रवाई की जाती है।








