समाचार-गढ़ 13 अक्टूबर, 2026।
China Gold Reserve: चीन की सोना खरीदने की रफ्तार ने वैश्विक बाजार का ध्यान खींचा है। साल 2026 के पहले आठ महीनों में चीन ने 1,000 टन से ज्यादा सोना आयात किया और इस पर रिकॉर्ड 158.8 अरब डॉलर खर्च किए। यह रकम भारतीय मुद्रा में 15 लाख करोड़ रुपये से भी अधिक बैठती है। खास बात यह है कि चीन का आयात पूरे 2025 के आंकड़े को भी पार कर गया है। इस खरीद के पीछे केंद्रीय बैंक के साथ-साथ निजी निवेशकों की मांग भी अहम भूमिका निभा रही है। इसके साथ ही चीन अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाने और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
8 महीने में पिछले पूरे साल से ज्यादा सोना आयात
चीन के सीमा शुल्क आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी से अगस्त 2026 के बीच देश ने 1,000 टन से ज्यादा सोना आयात किया। इसकी कुल कीमत करीब 158.8 अरब डॉलर रही। इसके मुकाबले चीन ने पूरे 2025 में लगभग 886 टन सोना आयात किया था, जिस पर करीब 96.5 अरब डॉलर खर्च हुए थे। यानी इस साल के शुरुआती आठ महीनों में ही आयात का आंकड़ा पिछले पूरे साल से आगे निकल गया।
हालांकि, आयात के इस आंकड़े को चीन के सरकारी गोल्ड रिजर्व के बराबर नहीं समझना चाहिए। इसमें निजी निवेशकों, ज्वेलर्स और कारोबारियों की खरीद भी शामिल है। इसलिए 1,000 टन से ज्यादा सोना आयात करने का मतलब यह नहीं है कि चीन के केंद्रीय बैंक ने इतनी ही मात्रा में सोना अपने भंडार में जमा कर लिया है।
लगातार बढ़ रहा है चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व
चीन का केंद्रीय बैंक पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना (PBOC) भी लगातार सोना खरीद रहा है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, अगस्त 2026 के अंत तक चीन का आधिकारिक गोल्ड रिजर्व करीब 2,387 टन था। अगस्त में केंद्रीय बैंक ने लगभग 20.2 टन सोना जोड़ा, जो अक्टूबर 2023 के बाद उसकी सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी थी। इसके साथ ही आधिकारिक भंडार में सोना जोड़ने का सिलसिला लगातार 22वें महीने तक पहुंच गया था।
आधिकारिक गोल्ड रिजर्व के मामले में चीन दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है, लेकिन अभी अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों से काफी पीछे है। फ्रांस और इटली को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना का आकलन चीन की आगे की खरीद और दूसरे देशों के भंडार में होने वाले बदलावों पर निर्भर करेगा। इसे निश्चित उपलब्धि के बजाय एक संभावित परिदृश्य के रूप में देखना चाहिए।
डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहता है चीन
चीन की सोना खरीदने की रणनीति का एक अहम पहलू अपने विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता लाना है। दुनिया के कई देश अपने भंडार का बड़ा हिस्सा अमेरिकी डॉलर और अमेरिकी सरकारी बॉन्ड में रखते हैं। लेकिन भू-राजनीतिक तनाव और वित्तीय प्रतिबंधों के जोखिम ने कुछ देशों को अपने भंडार के विकल्पों पर दोबारा विचार करने के लिए प्रेरित किया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों द्वारा रूसी केंद्रीय बैंक की कई विदेशी संपत्तियां फ्रीज किए जाने की घटना ने भी इस चर्चा को तेज किया। सोना किसी दूसरे देश की सरकार के कर्ज पर आधारित संपत्ति नहीं है, इसलिए इसे केंद्रीय बैंकों के भंडार में विविधता लाने का एक साधन माना जाता है।
अमेरिकी ट्रेजरी के आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में चीन के पास अमेरिकी सरकारी बॉन्ड की हिस्सेदारी घटकर करीब 618 अरब डॉलर रह गई। यह अगस्त 2008 के बाद सबसे निचला स्तर था। हालांकि, अमेरिकी बॉन्ड में गिरावट और सोने की खरीद को चीन की व्यापक वित्तीय रणनीति के हिस्से के रूप में देखा जा सकता है; केवल इन आंकड़ों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि चीन डॉलर को पूरी तरह हटाने की तैयारी कर रहा है।
चीन के आम लोग भी खरीद रहे हैं सोना
सोने की मांग बढ़ने की वजह सिर्फ केंद्रीय बैंक नहीं है। चीन के घरेलू निवेशक भी अपनी बचत का हिस्सा सोने में लगा रहे हैं। देश के प्रॉपर्टी बाजार में लंबे समय से दबाव है, जबकि शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव और कम ब्याज वाले निवेश विकल्पों ने लोगों को दूसरी संपत्तियों की ओर देखने के लिए प्रेरित किया है।
ऐसे माहौल में सोने के सिक्के, बार और अन्य निवेश उत्पादों की मांग बढ़ सकती है। घरेलू बाजार में मांग मजबूत रहने से आयात को भी सहारा मिलता है। यही वजह है कि चीन के रिकॉर्ड सोना आयात को केवल सरकारी रणनीति के बजाय केंद्रीय बैंक और निजी निवेशकों, दोनों की गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या चीन की खरीद से सोने की कीमतें बढ़ती रहेंगी?
केंद्रीय बैंकों की खरीद सोने की वैश्विक मांग को सहारा दे सकती है। इसके अलावा अमेरिकी ब्याज दरें, डॉलर की मजबूती, भू-राजनीतिक तनाव और निजी निवेशकों की मांग भी सोने की कीमतों को प्रभावित करती हैं।
फिर भी, चीन की लगातार खरीदारी का मतलब यह नहीं है कि सोने की कीमतें हमेशा बढ़ेंगी। ऊंची कीमतें मांग को कम कर सकती हैं, जबकि ब्याज दरों में बदलाव या चीन की घरेलू अर्थव्यवस्था में सुधार निवेशकों की पसंद बदल सकता है।
चीन की मौजूदा रणनीति के दो पहलू हैं—एक ओर केंद्रीय बैंक अपने आधिकारिक भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है, तो दूसरी ओर निजी निवेशक भी बड़ी मात्रा में सोना खरीद रहे हैं। यह रुझान डॉलर पर निर्भरता कम करने और संपत्तियों में विविधता लाने की दिशा में चीन की कोशिशों को दिखाता है। लेकिन वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में डॉलर की भूमिका को चुनौती देना एक लंबी प्रक्रिया है, जिसे केवल सोने के आयात के आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता।








