समाचार-गढ़ 13 अक्टूबर, 2026।
मां दुर्गा की प्रतिमा आपने मिट्टी, लकड़ी और कई तरह की सजावटी चीजों से बनी देखी होगी, लेकिन क्या आपने कभी पेंसिल, रबड़ और कटर से तैयार की गई दुर्गा प्रतिमा के बारे में सुना है? बिहार के गया में कलाकार विक्की बिंदु ने अपनी अनोखी कल्पना को हकीकत में बदलते हुए ऐसी ही प्रतिमा तैयार की है। इस कलाकृति में हजारों पेंसिल, शार्पनर और इरेजर का इस्तेमाल किया गया है। खास बात यह है कि विक्की हर साल दुर्गा पूजा के लिए कुछ अलग बनाने की कोशिश करते हैं और इस बार उनकी पेंसिल वाली प्रतिमा लोगों का ध्यान खींच रही है।
25 हजार से ज्यादा पेंसिल, 2 हजार कटर और रबड़ का इस्तेमाल
गया शहर के बागेश्वरी मोहल्ले में रहने वाले मूर्ति कलाकार विक्की बिंदु इस साल दुर्गा पूजा के लिए 11 अलग-अलग प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। इनमें पेंसिल, पेंसिल के छिलकों, शार्पनर और इरेजर से बनाई जा रही मां दुर्गा की प्रतिमा खास है।
इस प्रतिमा को तैयार करने में अब तक 25 हजार से अधिक पेंसिल का इस्तेमाल किया जा चुका है। इसके अलावा करीब 2 हजार शार्पनर और 2 हजार इरेजर भी लगाए गए हैं। पेंसिल के छिलकों का इस्तेमाल भी कलाकृति को आकार और सजावट देने के लिए किया जा रहा है।
डेढ़ महीने से चल रहा निर्माण, 80 हजार रुपये तक खर्च का अनुमान
इस अनोखी प्रतिमा को तैयार करने का काम करीब डेढ़ महीने पहले शुरू हुआ था। विक्की के साथ दो से तीन कारीगर लगातार काम कर रहे हैं। दी गई जानकारी के मुताबिक, निर्माण का लगभग 90 प्रतिशत काम पूरा हो चुका था और प्रतिमा को अंतिम रूप देने में एक से दो दिन और लगने का अनुमान था।
इस कलाकृति के लिए करीब 50 हजार रुपये की पेंसिल खरीदी गई हैं। पूरी प्रतिमा पर कुल खर्च लगभग 80 हजार रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।
हर साल कुछ नया करने की कोशिश
विक्की बिंदु गया के जाने-माने मूर्ति कलाकारों में गिने जाते हैं। दुर्गा पूजा के लिए वे हर साल 11 प्रतिमाएं तैयार करते हैं, जिन्हें शहर के अलग-अलग पूजा पंडालों में स्थापित किया जाता है।
उनकी खासियत यह है कि वे पारंपरिक मिट्टी की प्रतिमाओं से अलग सामग्री और डिजाइन के साथ प्रयोग करते हैं। इससे पहले वे अखबार, पॉपकॉर्न, सिल्वर फॉयल और बांस जैसी चीजों से भी प्रतिमाएं बना चुके हैं। इस बार पेंसिल, रबड़ और कटर से बनी प्रतिमा उनकी इसी रचनात्मक सोच का उदाहरण है।
विक्की का कहना है कि कुछ नया करने की कल्पना उन्हें हर साल अलग तरह की कलाकृति बनाने के लिए प्रेरित करती है। इस बार वे केवल पेंसिल वाली प्रतिमा ही नहीं, बल्कि महिलाओं के श्रृंगार में इस्तेमाल होने वाली सामग्री से भी कुछ प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं।
पिता और दादा से मिली कला की विरासत
विक्की बिंदु का परिवार लंबे समय से मूर्ति निर्माण के काम से जुड़ा रहा है। उनके पिता और दादा भी प्रसिद्ध मूर्ति कलाकार थे। हालांकि, विक्की ने शुरुआत में इस पेशे के बजाय दूसरी नौकरियों में काम किया था। वे बिजली विभाग में साइट इंजीनियर और बिहार राज्य औद्योगिक विकास निगम में टेक्निकल ऑफिसर के रूप में कार्य कर चुके हैं।
पिता के निधन के बाद उन्होंने नौकरी छोड़कर पुश्तैनी कारोबार संभालने का फैसला किया। पिछले छह-सात वर्षों से वे इसी काम में जुटे हैं और अपनी कला के जरिए पारिवारिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं।
विक्की बिंदु की पेंसिल से बनी मां दुर्गा की प्रतिमा दिखाती है कि पारंपरिक कला में भी नए प्रयोगों की काफी गुंजाइश है। साधारण समझी जाने वाली चीजों को रचनात्मक तरीके से इस्तेमाल कर उन्होंने एक ऐसी कलाकृति तैयार की है, जो इस दुर्गा पूजा में आकर्षण का केंद्र बन सकती है।







