समाचार गढ़ 2 नवंबर 2026।
India Israel Defence Deal: भारतीय वायुसेना की हवाई ताकत बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा रक्षा सौदा आगे बढ़ रहा है। इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) भारतीय वायुसेना के लिए छह यात्री विमानों को एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग टैंकर में बदलने के समझौते के करीब पहुंच गई है। करीब 90.57 करोड़ डॉलर यानी लगभग 8 हजार करोड़ रुपये के इस प्रस्ताव के तहत बोइंग 767 विमानों को आधुनिक सैन्य टैंकरों में बदला जाएगा। इससे लड़ाकू विमानों को हवा में ही ईंधन भरने की सुविधा मिलेगी और उनकी लंबी दूरी तक ऑपरेशन करने की क्षमता बढ़ेगी।
इजरायली कंपनी बोली में सबसे आगे
इजरायल सरकार के स्वामित्व वाली IAI सैन्य और नागरिक विमानन प्रणालियां बनाने वाली प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस परियोजना की बोली प्रक्रिया में रूसी और यूरोपीय कंपनियों के प्रस्ताव तकनीकी और जरूरी मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद IAI अकेली पात्र कंपनी के रूप में सामने आई है।
हालांकि, सौदे को अंतिम मंजूरी और अनुबंध पर हस्ताक्षर होना अभी बाकी है। अंतिम फैसला होने के बाद ही परियोजना की औपचारिक शुरुआत हो सकेगी।
मेक इन इंडिया के तहत HAL की अहम भूमिका
प्रस्तावित समझौते के तहत IAI छह इस्तेमाल किए जा चुके बोइंग 767 विमानों की खरीद करेगी और उन्हें सैन्य टैंकरों में बदलेगी। इस परियोजना में मेक इन इंडिया के तहत कम से कम 30 प्रतिशत काम भारत में किए जाने की प्रतिबद्धता है।
हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) इस परियोजना में प्रमुख भारतीय साझेदार की भूमिका निभाएगी। कंपनी वायरिंग, स्थानीय सिस्टम इंटीग्रेशन और विमानों में जरूरी स्ट्रक्चरल बदलाव जैसे काम करेगी।
योजना के मुताबिक, आवश्यक औपचारिक मंजूरियां मिलने के बाद इन विमानों की डिलीवरी 2028 से 2030 के बीच पूरी होने का अनुमान है।
राफेल और सुखोई की बढ़ेगी ऑपरेशनल क्षमता
IAI का मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट (MMTT) सिस्टम पुराने यात्री विमानों को आधुनिक सैन्य टैंकर और ट्रांसपोर्ट प्लेटफॉर्म में बदलता है। इस तकनीक को कंपनी का बेडेक एविएशन ग्रुप तैयार करता है।
इन नए विमानों से भारतीय वायुसेना के पुराने रूसी मूल के Il-78 रिफ्यूलिंग विमानों को बदलने या उनकी क्षमता को अतिरिक्त समर्थन देने में मदद मिल सकती है। इससे राफेल और सुखोई-30MKI जैसे लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी के अभियानों के दौरान हवा में ईंधन मिल सकेगा। नतीजतन, उन्हें बार-बार बेस पर लौटने की जरूरत कम होगी और लंबे समय तक ऑपरेशन जारी रखना आसान हो सकता है।
सिर्फ ईंधन भरने तक सीमित नहीं होगी भूमिका
ये विमान हवा में ईंधन भरने के अलावा भारी माल ढुलाई, सैन्य उपकरणों और सैनिकों के परिवहन जैसे कामों में भी इस्तेमाल किए जा सकेंगे। यानी भारतीय वायुसेना को एक ऐसा बहुउद्देश्यीय प्लेटफॉर्म मिल सकता है, जो जरूरत के मुताबिक अलग-अलग सैन्य अभियानों में काम आएगा।
एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग में IAI का अनुभव
इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज को एयर-टू-एयर रिफ्यूलिंग तकनीक में 40 साल से अधिक का अनुभव है। कंपनी के मुताबिक, वह इजरायली वायुसेना सहित दुनिया के 12 से ज्यादा देशों और ग्राहकों के लिए कई विमानों को रिफ्यूलिंग टैंकर में बदलने का काम कर चुकी है।
अगर यह सौदा अंतिम रूप लेता है, तो इससे भारतीय वायुसेना की लंबी दूरी तक अभियान चलाने की क्षमता मजबूत होगी। साथ ही, परियोजना में HAL की भागीदारी से देश के रक्षा और विमानन क्षेत्र में स्वदेशी काम को भी बढ़ावा मिलेगा।








