समाचार गढ़ 2 नवंबर 2026।
अफ्रीकी देश चाड में पानी की किल्लत अब जानलेवा संघर्षों की वजह बन रही है। यहां पशुओं को पानी पिलाने को लेकर दो समुदायों के बीच ऐसा विवाद हुआ कि देखते ही देखते गोलीबारी शुरू हो गई। इस हिंसा में कम से कम 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि 22 अन्य घायल हुए हैं। घटना के बाद हालात संभालने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात करना पड़ा। पुलिस ने मामले में 39 लोगों को गिरफ्तार भी किया है।
पशुओं को पानी पिलाने से शुरू हुआ विवाद
चाड सरकार ने रविवार को बताया कि यह घटना देश के मध्य हिस्से में हुई। एक स्थानीय सांसद के मुताबिक, शुक्रवार को क्रेडा समुदाय का एक चरवाहा अपने मवेशियों को तालाब पर पानी पिलाने के लिए लाया था। इसी दौरान उसकी कुका समुदाय के एक व्यक्ति से बहस हो गई।
सांसद ने बताया कि विवाद बढ़ने पर क्रेडा समुदाय के व्यक्ति ने हथियार निकालकर कुका समुदाय के व्यक्ति के पैर में गोली मार दी। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच गोलीबारी शुरू हो गई। इसमें 22 लोग घायल हुए, जिन्हें इलाज के लिए न्गौरा के अस्पताल में भर्ती कराया गया।
39 लोग गिरफ्तार, सुरक्षा बलों ने संभाला मोर्चा
प्रादेशिक प्रशासन मंत्रालय के अनुसार, यह हिंसा हजेर-लामिस और बहर अल-गजाली प्रांतों की सीमा पर हुई। घटना में 25 लोगों की मौत हुई और 22 लोग घायल हुए हैं। मामले में 39 लोगों को गिरफ्तार कर राजधानी न्दजामेना भेजा गया है।
एक स्थानीय अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा बलों ने स्थिति को काफी हद तक नियंत्रण में कर लिया है। इससे पहले शनिवार को कई मंत्रियों के नेतृत्व में सरकारी प्रतिनिधिमंडल ने प्रभावित इलाके का दौरा किया। सरकार का कहना है कि इस दौरे का मकसद शांति बहाल करना, नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और दोनों समुदायों के बीच बातचीत को बढ़ावा देना था।
चाड में पानी की इतनी किल्लत क्यों?
चाड अफ्रीका का एक विशाल देश है, जिसका उत्तरी हिस्सा सहारा रेगिस्तान में आता है। यहां पानी और जमीन जैसे सीमित संसाधनों को लेकर अलग-अलग समुदायों के बीच अक्सर संघर्ष होते रहते हैं। संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक, साल 2024 में चाड के 10 प्रतिशत से भी कम परिवारों के पास सुरक्षित बहते पानी यानी नल के पानी की भरोसेमंद सुविधा थी। देश की आधी आबादी को पीने का साफ पानी उपलब्ध नहीं है।
पानी की कमी का असर यहां पहले भी जानलेवा संघर्षों के रूप में सामने आ चुका है। इसी साल अप्रैल में पूर्वी चाड में एक कुएं को लेकर हुए विवाद में 44 लोगों की मौत हो गई थी और 10 लोग घायल हुए थे।
90 फीसदी तक सिकुड़ चुकी है चाड झील
कभी चाड झील आसपास के लोगों के लिए पानी का बड़ा सहारा हुआ करती थी, लेकिन दशकों में इसका आकार काफी घट गया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, 1960 के मुकाबले झील का क्षेत्रफल करीब 90 प्रतिशत तक कम हो चुका है।
पानी की यह समस्या सिर्फ चाड तक सीमित नहीं है। जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी और जल संसाधनों के अत्यधिक दोहन के कारण दुनिया के कई हिस्सों में पानी का संकट गहराता जा रहा है। चाड की यह घटना दिखाती है कि जब पानी जैसे बुनियादी संसाधन की कमी बढ़ती है, तो उसका असर लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी से आगे बढ़कर जानलेवा संघर्षों तक पहुंच सकता है।








