समाचार गढ़ 1 नवंबर 2026।
Gen Z Protest: दुनिया के अलग-अलग देशों में युवा पीढ़ी सड़कों पर उतरकर सरकारों को चुनौती दे रही है। हाल ही में जर्मनी में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा और लूटपाट की घटनाएं सामने आईं। इससे पहले फ्रांस में भी लगातार कई हफ्तों तक प्रदर्शन हुए। बेल्जियम, इटली, पुर्तगाल और अन्य देशों में भी युवा अपनी मांगों को लेकर विरोध जता रहे हैं। एशिया से शुरू हुआ यह असंतोष अब अफ्रीका और यूरोप तक पहुंच चुका है। सवाल है कि आखिर दुनिया की नई पीढ़ी इतनी नाराज क्यों है और इसके पीछे कौन-सी समस्याएं हैं?
Gen Z कौन हैं और क्यों हो रही इनकी चर्चा?
Gen Z उस पीढ़ी को कहा जाता है, जिनका जन्म 1997 से 2012 के बीच हुआ है। इन्हें डिजिटल पीढ़ी भी कहा जाता है, क्योंकि इन्होंने इंटरनेट, स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के तेजी से विस्तार के बीच अपनी जिंदगी शुरू की।
जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक, इस पीढ़ी का दुनिया को देखने और समझने का अपना नजरिया है। वैश्विक आर्थिक संकट, कोविड महामारी और महंगाई जैसी परिस्थितियों को करीब से देखने के कारण इनके बीच भविष्य को लेकर असुरक्षा की भावना भी बढ़ी है।
जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी में इसी साल जनवरी में प्रकाशित एक रिसर्च में Gen Z के बढ़ते गुस्से की वजहों को समझने की कोशिश की गई है। हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर एरिका चेनोवेथ और मैथ्यू सेबुल ने इस रिसर्च का शीर्षक ‘Why Gen-Z Is Rising’ रखा है। वहीं, नागरिकों के वैश्विक संगठन CIVICUS की रिपोर्ट में भी युवा पीढ़ी के असंतोष और विरोध प्रदर्शनों का विश्लेषण किया गया है।
एशिया से हुई थी शुरुआत
Gen Z के विरोध की शुरुआत एशिया से हुई थी। नेपाल में 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद युवा आक्रोशित हो गए। पुलिस कार्रवाई के दौरान युवाओं की मौत हुई तो विरोध प्रदर्शन और व्यापक हो गए। आखिरकार प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। इसी तरह बांग्लादेश में भी युवाओं का गुस्सा सरकार के खिलाफ आंदोलन में बदल गया।
वहीं, सरकारी नौकरियों में आरक्षण के खिलाफ छात्र आंदोलन ने भी बांग्लादेश में बड़ा रूप लिया। सुरक्षा बलों की कार्रवाई के बाद विरोध और तेज हुआ। आखिरकार सत्ता परिवर्तन की स्थिति बन गई। श्रीलंका में भी आर्थिक संकट के बीच युवाओं का गुस्सा बढ़ा और तत्कालीन राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे को देश छोड़कर जाना पड़ा।
फिर अफ्रीका ने देखा Gen Z का गुस्सा
अफ्रीका में Gen Z का गुस्सा आर्थिक असमानता और सरकारी फैसलों के खिलाफ सामने आया। केन्या में जून 2024 में वित्त विधेयक के विरोध से आंदोलन शुरू हुआ। प्रदर्शनकारी संसद के अंदर तक पहुंच गए थे। पुलिस कार्रवाई के दौरान कई लोगों की मौत हुई। राष्ट्रपति विलियम रूटो को विवादित वित्त विधेयक वापस लेना पड़ा।
मेडागास्कर में बिजली और पानी की समस्या को लेकर Gen Z का आंदोलन शुरू हुआ। बाद में यह सरकार बदलने की मांग तक पहुंच गया और सत्ता परिवर्तन के बाद ही प्रदर्शन शांत हुए। मोरक्को में युवाओं का गुस्सा महंगे स्टेडियम और बदहाल अस्पतालों को लेकर था।
अब यूरोप में सड़कों पर Gen Z
एशिया और अफ्रीका के बाद इंडोनेशिया और फिलीपींस में भी Gen Z ने अपने गुस्से से सरकारों को हिलाया। अब यूरोप के कई देशों में प्रदर्शन फैल चुके हैं। 28 अक्टूबर को रॉयटर्स ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की, जिसमें यूरोप में फैल रहे युवा आंदोलनों का विश्लेषण किया गया। इसमें बेल्जियम, फ्रांस, इटली और अल्बानिया के युवाओं की समस्याओं को शामिल किया गया।
फ्रांस में छात्रों की शिकायतें खराब स्कूल इमारतों, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में दाखिले की व्यवस्था को लेकर शुरू हुईं। धीरे-धीरे इसमें महंगाई और आवास संकट जैसे मुद्दे भी जुड़ गए।
31 अक्टूबर को फ्रांस में लगातार तीसरे सप्ताह प्रदर्शन हुए। वहीं, जर्मनी में युवा प्रदर्शनकारियों की मांग है कि सरकार शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च बढ़ाए। जलवायु सुरक्षा और सस्ती जीवनशैली भी उनके प्रमुख मुद्दे हैं।
हालांकि, फ्रांस में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, तोड़फोड़ और चोरी की घटनाएं भी सामने आईं। जर्मनी में भी हालात हिंसक हुए। फ्रैंकफर्ट समेत 34 शहरों में प्रदर्शनकारियों की पुलिस से झड़प हुई और कई दुकानों में लूटपाट की घटनाएं हुईं। पुर्तगाल, नीदरलैंड, बेल्जियम, इटली और अल्बानिया में भी अलग-अलग मुद्दों को लेकर युवा प्रदर्शन कर रहे हैं।
आखिर इतनी नाराज क्यों है Gen Z?
जर्नल ऑफ डेमोक्रेसी के एक रिसर्च आर्टिकल के मुताबिक, नई पीढ़ी के सामने सबसे बड़ी समस्याओं में रोजगार और आर्थिक असमानता शामिल हैं। युवाओं को लगता है कि उनकी योग्यता के हिसाब से उन्हें नौकरी और वेतन नहीं मिल रहा है।
Gen Z उस असमानता के खिलाफ भी आवाज उठा रही है, जहां नेताओं के बच्चे लग्जरी जीवन जी रहे हैं, जबकि आम युवाओं को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इंडोनेशिया में भी विरोध की एक वजह नेताओं के लिए नई गाड़ी खरीदे जाने का फैसला था।
युवा लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ भी आवाज उठा रहे हैं। सर्बिया में स्टेशन हादसे के बाद सरकार को अपना रुख बदलना पड़ा। वहीं, फिलीपींस में बाढ़ नियंत्रण परियोजना में कथित भ्रष्टाचार भी आंदोलन की वजह बना।
युवाओं की नाराजगी सिर्फ सरकारों की नीतियों तक सीमित नहीं है। उन्हें लगता है कि उनकी समस्याओं और आवाज को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा है।
दुनिया भर में एक जैसा गुस्सा, लेकिन मुद्दे अलग-अलग
जर्मनी से लेकर इटली तक और नेपाल से लेकर केन्या तक युवाओं के आंदोलनों के मुद्दे अलग-अलग हैं। कहीं बेरोजगारी और महंगाई है, तो कहीं भ्रष्टाचार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और राजनीतिक जवाबदेही की मांग है।
बेशक हर देश में विरोध की वजह अलग है, लेकिन इन आंदोलनों में एक समान बात दिखाई देती है—नई पीढ़ी अपने भविष्य को लेकर जवाब मांग रही है और चाहती है कि सरकारें उसकी समस्याओं को गंभीरता से सुनें।








