समाचार-गढ़ 13 सितंबर, 2026।
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर इन दिनों पुराने दौर के लुक और तस्वीरों को नए अंदाज में दोबारा तैयार करने का ट्रेंड तेजी से वायरल हो रहा है। लोग अपनी फोटो को 80 के दशक के फैशन और स्टाइल में बदलवाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। लेकिन जिस ट्रेंड को लोग महज मनोरंजन के तौर पर देख रहे हैं, उसमें निजी डेटा और तस्वीरों की सुरक्षा से जुड़ा खतरा भी छिपा हो सकता है।
AI टूल्स में फोटो डालने से पहले सावधान
आजकल कई लोग अपनी तस्वीरों को AI टूल्स की मदद से अलग-अलग स्टाइल में बदल रहे हैं। इसके लिए उन्हें अपनी फोटो किसी AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड करनी पड़ती है। तस्वीर के साथ कई बार नाम, उम्र, लोकेशन या दूसरी व्यक्तिगत जानकारी भी साझा हो जाती है।
विशेषज्ञों की चिंता है कि यूजर को यह स्पष्ट रूप से पता नहीं होता कि AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई फोटो का इस्तेमाल किस तरह किया जा रहा है और उसका डेटा कितने समय तक सुरक्षित रखा जाता है।
AI ने माना- पूरी तरह सुरक्षित नहीं
AI से जुड़े जानकारों के मुताबिक, किसी भी AI टूल पर फोटो अपलोड करते समय सावधानी बरतना जरूरी है। खासकर ऐसी तस्वीरें जिनमें व्यक्ति का चेहरा साफ दिखाई देता हो, उनका गलत इस्तेमाल होने का खतरा रहता है।
तस्वीरों से किसी व्यक्ति की पहचान, उम्र, लोकेशन या दूसरी जानकारी का अनुमान लगाया जा सकता है। इसके अलावा AI की मदद से फोटो में बदलाव करके उसका इस्तेमाल फर्जी प्रोफाइल, डीपफेक या दूसरे गलत उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है।
80s के ट्रेंड के बहाने बढ़ रहा फोटो शेयरिंग का चलन
80 के दशक के पुराने लुक को दोबारा बनाने वाला ट्रेंड सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। लोग अपनी पुरानी और नई तस्वीरों को AI के जरिए अलग-अलग अंदाज में तैयार कर रहे हैं।
ऐसे में बड़ी संख्या में लोग एक ही तरह के AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं। जानकारों का कहना है कि किसी वायरल ट्रेंड का हिस्सा बनने से पहले यह देखना जरूरी है कि जिस प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड की जा रही है, उसकी प्राइवेसी पॉलिसी और डेटा इस्तेमाल करने की शर्तें क्या हैं।
फोटो से कैसे हो सकता है नुकसान?
किसी फोटो को सोशल मीडिया या AI टूल पर अपलोड करने के बाद उसका गलत इस्तेमाल कई तरीकों से किया जा सकता है। उदाहरण के लिए—
- फोटो को नकली सोशल मीडिया अकाउंट में इस्तेमाल किया जा सकता है।
- किसी अन्य व्यक्ति की तस्वीर पर लगाकर गलत पहचान बनाई जा सकती है।
- फोटो में बदलाव करके भ्रामक या फर्जी तस्वीर तैयार की जा सकती है।
- चेहरे और दूसरी व्यक्तिगत जानकारी का गलत इस्तेमाल हो सकता है।
- फोटो के साथ मौजूद लोकेशन या अन्य मेटाडेटा से निजी जानकारी सामने आ सकती है।
- AI की मदद से आवाज और तस्वीर जैसी जानकारियों का इस्तेमाल कर फर्जी सामग्री बनाई जा सकती है।
वायरल ट्रेंड के चक्कर में निजी जानकारी न करें शेयर
सोशल मीडिया पर कोई ट्रेंड कितना भी लोकप्रिय क्यों न हो, उसमें शामिल होने से पहले अपनी प्राइवेसी और डेटा सिक्योरिटी का ध्यान रखना जरूरी है। खासकर अनजान AI प्लेटफॉर्म पर फोटो अपलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता और डेटा पॉलिसी जरूर जांचनी चाहिए।
यानी 80 के दशक का लुक दोबारा बनाना मजेदार हो सकता है, लेकिन इसके लिए अपनी निजी तस्वीर और जानकारी किसी ऐसे प्लेटफॉर्म को देना, जिसके बारे में पर्याप्त जानकारी न हो, भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है।









