बिजली दरों में बड़ा झटका: आम जनता से लेकर उद्योगों तक सबकी जेब पर बोझ, 490 रुपए तक बढ़ा बिल
समाचार गढ़, जयपुर। प्रदेश की सरकारी बिजली कंपनियों के नए टैरिफ आदेश ने मध्यम वर्ग और बड़े उद्योगों की जेब पर सीधा असर डाला है। नई दरों के लागू होने के बाद हर माह औसतन 400 यूनिट बिजली खर्च करने वाले उपभोक्ताओं का बिल करीब 490 रुपए तक बढ़ गया है, जो लगभग 14 प्रतिशत अतिरिक्त आर्थिक बोझ के बराबर है।
नए आदेश में पहली बार एक रुपए प्रति यूनिट तक का रेगुलेटरी सरचार्ज जोड़ा गया है, साथ ही स्थायी शुल्क (फिक्स चार्ज) भी बढ़ाए गए हैं और लोड फैक्टर पर मिलने वाली छूट समाप्त कर दी गई है। इस फैसले से जहां आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर संकट गहराएगा, वहीं स्टील और आयरन जैसे बड़े उद्योगों के सामने उत्पादन लागत बढ़ने की चुनौती खड़ी हो गई है।
🔹 आम उपभोक्ता पर असर
300 यूनिट से अधिक बिजली खर्च करने वालों पर इस बार सबसे ज्यादा भार पड़ा है। पहले जहां 400 यूनिट की खपत पर 7.65 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिल बनता था, अब इसे घटाकर 7 रुपए प्रति यूनिट किया गया है। हालांकि, राहत का यह भ्रम स्थायी शुल्क और सरचार्ज से टूट गया है —
फिक्स चार्ज 450 से बढ़कर 800 रुपए कर दिया गया,
एक रुपए प्रति यूनिट रेगुलेटरी सरचार्ज लगाया गया।
नतीजतन, उपभोक्ताओं को अब हर माह लगभग 490 रुपए ज्यादा भुगतान करना पड़ रहा है।
🔹 उद्योगों के लिए दोहरी मार
नई दरें उद्योग जगत के लिए भी परेशानी का सबब बनी हैं। स्टील कारोबारियों का कहना है कि बेसिक रेट को 7.30 से घटाकर 6.30 रुपए प्रति यूनिट किया गया है, लेकिन रेगुलेटरी और फ्यूल सरचार्ज जोड़ने पर बिजली फिर महंगी हो गई है।
छोटे उद्योगों के लिए अब बिजली 60 पैसे प्रति यूनिट महंगी हो गई है,
बड़े उद्योगों से लोड फैक्टर की 1 रुपए प्रति यूनिट की छूट खत्म कर दी गई है,
स्थायी शुल्क भी 300 से बढ़ाकर 380 रुपए प्रति केवीए कर दिया गया है।
इन बदलावों से इंडक्शन फर्नेस जैसी स्टील इंडस्ट्रीज को अब बिजली करीब 1.25 रुपए प्रति यूनिट महंगी पड़ रही है। इससे न केवल उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी, बल्कि प्रतिस्पर्धा क्षमता पर भी सीधा असर पड़ेगा।











