समाचार-गढ़ 25 अगस्त, 2026।
जयपुर: राजस्थान में आगामी नगर निकाय और पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर गतिविधियां तेज होने के साथ ही साइबर ठगों ने भी लोगों को निशाना बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। चुनावी माहौल का फायदा उठाकर ठग फर्जी वोटर लिस्ट लिंक, फोन कॉल, QR कोड, OTP और डीपफेक वीडियो के जरिए लोगों के साथ धोखाधड़ी कर सकते हैं।
इसे देखते हुए पुलिस मुख्यालय की साइबर क्राइम शाखा ने प्रदेशभर के नागरिकों, चुनाव प्रत्याशियों और चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारियों के लिए साइबर सुरक्षा संबंधी एडवाइजरी जारी की है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि चुनाव से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए केवल आधिकारिक माध्यमों पर ही भरोसा करें।
‘वोटर लिस्ट में नाम देखें’ वाले लिंक से रहें सावधान
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग WhatsApp और SMS के जरिए ऐसे मैसेज भेज सकते हैं, जिनमें वोटर लिस्ट में नाम देखने या पोलिंग बूथ की जानकारी अपडेट करने का दावा किया जाएगा। ऐसे किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से बचें।
मतदान, वोटर कार्ड और पोलिंग स्टेशन से संबंधित जानकारी के लिए केवल राजस्थान राज्य निर्वाचन आयोग और CEO Rajasthan के आधिकारिक पोर्टल का इस्तेमाल करें।
अधिकारी बनकर मांगा जा सकता है OTP
ठग खुद को चुनाव अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर फोन कर सकते हैं और बैंक अकाउंट, OTP या UPI PIN जैसी संवेदनशील जानकारी मांग सकते हैं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ ऐसी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।
वायरल वीडियो और डीपफेक पर भी रखें नजर
चुनावी माहौल में राजनीतिक नेताओं या दलों से जुड़े फर्जी वीडियो और ऑडियो भी वायरल किए जा सकते हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि किसी भी वीडियो या ऑडियो को आगे बढ़ाने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि जरूर करें।
प्रत्याशी सोशल मीडिया अकाउंट सुरक्षित रखें
चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को अपने Facebook, Instagram, X और WhatsApp जैसे सोशल मीडिया अकाउंट पर Two-Factor Authentication (2FA) सक्रिय करने की सलाह दी गई है। इससे अकाउंट हैक होने का खतरा कम किया जा सकता है।
QR कोड स्कैन करते समय रहें सतर्क
चुनावी चंदे या फंड के नाम पर भेजे गए QR कोड को स्कैन करने से पहले उसकी पुष्टि करें। पुलिस ने याद दिलाया है कि पैसे प्राप्त करने के लिए UPI PIN दर्ज करने की जरूरत नहीं होती।
WhatsApp ग्रुप में भी सावधानी जरूरी
चुनाव प्रचार से जुड़े WhatsApp ग्रुप में फर्जी खबरों और संदिग्ध लिंक के प्रसार को रोकने के लिए ग्रुप एडमिन को मैसेजिंग की अनुमति सीमित रखने की सलाह दी गई है।
चुनाव कर्मचारियों को पब्लिक Wi-Fi से बचने की सलाह
चुनाव ड्यूटी में तैनात कर्मचारी चुनावी डेटा या संवेदनशील जानकारी को निजी डिवाइस अथवा असुरक्षित सार्वजनिक Wi-Fi नेटवर्क के जरिए साझा न करें। अनजान ईमेल से आने वाले लिंक, सर्कुलर और अटैचमेंट को भी बिना सत्यापन के खोलने से बचना चाहिए।
ठगी होने पर तुरंत 1930 पर करें शिकायत
अगर कोई व्यक्ति साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार होता है तो पुलिस ने बिना देरी किए 1930 पर शिकायत दर्ज कराने की अपील की है। इसके अलावा साइबर अपराध की शिकायत राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर भी की जा सकती है।
पुलिस के मुताबिक, साइबर ठग चुनावी माहौल और लोगों की जानकारी की जरूरत का फायदा उठाकर फर्जीवाड़ा करने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में किसी भी लिंक, कॉल, QR कोड या संदेश पर भरोसा करने से पहले उसकी पुष्टि करना ही सबसे सुरक्षित तरीका है।
पुलिस की अपील साफ है—चुनाव से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों पर भरोसा करें और किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ OTP, UPI PIN या बैंकिंग जानकारी साझा न करें।









