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किसानों की आवाज़ और कांग्रेस के कद्दावर नेता रामेश्वर डूडी का निधन, गहलोत-डोटासरा ने दी अंतिम विदाई

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समाचार गढ़, 4 अक्टूबर 2025। राजस्थान की राजनीति को गहरा झटका देते हुए कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामेश्वर डूडी (62) का शुक्रवार देर रात बीकानेर में निधन हो गया। वे करीब 25 महीने से कोमा में थे और लंबे समय से बीमारी से जूझ रहे थे। शनिवार को उनके उदयरामसर स्थित फार्म हाउस पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भारी भीड़ उमड़ी, समर्थकों ने नम आंखों से अपने प्रिय नेता को अंतिम विदाई दी। अंतिम यात्रा उनके बीकानेर स्थित वैद्य मघाराम कॉलोनी के आवास से शुरू होकर लगभग 10 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए फार्म हाउस पहुंची, जहां उन्हें विदा किया गया। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने उन्हें कंधा देकर अंतिम विदाई दी।

डूडी के निधन की खबर फैलते ही उनके आवास पर नेताओं और समर्थकों का जमावड़ा लग गया। श्रद्धांजलि देने वालों में अशोक गहलोत, गोविंद सिंह डोटासरा, टीकाराम जूली, सुमित गोदारा, हरीश चौधरी, हेमाराम चौधरी, हनुमान बेनीवाल सहित कई बड़े नेता शामिल हुए। अशोक गहलोत ने भावुक होते हुए कहा कि डूडी के ब्रेन स्ट्रोक से दो दिन पहले ही उनकी उनसे मुलाकात हुई थी और उनका जाना उनके लिए व्यक्तिगत क्षति है। उन्होंने बताया कि कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी शोक संदेश भेजा है। डोटासरा ने डूडी को किसानों का सच्चा साथी और एक जुझारू नेता बताया, जिन्होंने हमेशा गरीबों और किसानों के हितों के लिए संघर्ष किया। उन्होंने याद किया कि जब डूडी विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे, तब उन्होंने किसानों के कर्ज माफी के लिए तीन रातें सदन में धरने पर बिताईं और उनकी जिद के आगे सरकार को झुकना पड़ा था।

बीकानेर कांग्रेस (देहात) अध्यक्ष बिशना राम सियाग ने बताया कि अगस्त 2023 में डूडी को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था, जिसके बाद उन्हें जयपुर, गुरुग्राम और दिल्ली में इलाज के लिए भर्ती कराया गया। कुछ दिन पहले उनकी तबीयत और बिगड़ी, और शुक्रवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली। रामेश्वर डूडी किसान परिवार से थे और उन्होंने हमेशा किसानों, मजदूरों और कमजोर वर्गों के हक की लड़ाई लड़ी। वे विधानसभा में चीफ व्हीप और नेता प्रतिपक्ष जैसे अहम पदों पर रहे और अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और जनसेवा के लिए जाने जाते थे।

उनके निधन से न सिर्फ कांग्रेस पार्टी बल्कि पूरे राजस्थान की राजनीति में एक अपूरणीय क्षति हुई है। डूडी ने जिस समर्पण और ईमानदारी के साथ राजनीति की, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी रहेगी।

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