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ईरान की कासिम बसीर का खौफ? अमेरिकी युद्धपोतों ने बढ़ाई दूरी, सैटेलाइट तस्वीरों से सामने आया बदलाव

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समाचार-गढ़ 27 सितंबर, 2026।

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के बीच एक मिसाइल की चर्चा ने समुद्री मोर्चे पर नई हलचल पैदा कर दी है। यह मिसाइल है कासिम बसीर, जिसकी घोषित रेंज करीब 1,200 किलोमीटर बताई जाती है। हाल की सैटेलाइट तस्वीरों और रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी नौसेना ने ईरान के आसपास के समुद्री इलाकों में अपने बड़े युद्धपोतों की मौजूदगी कम की है।

ईरान की ओर से इसे अपनी मिसाइल क्षमता की सफलता के तौर पर पेश किया जा रहा है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि अमेरिकी युद्धपोतों की दूरी बढ़ाने का एकमात्र कारण कासिम बसीर ही है।

कासिम बसीर क्यों चर्चा में है?

कासिम बसीर ईरान की एक मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइल है, जिसे मई 2025 में पेश किया गया था। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, इसकी रेंज कम से कम 1,200 किलोमीटर है। इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल गाइडेंस सिस्टम होने का दावा किया गया है और मिसाइल में उड़ान के दौरान दिशा बदलने की क्षमता भी बताई जाती है।

इसकी खासियत यह है कि इसे पारंपरिक बैलिस्टिक मिसाइलों की तुलना में ज्यादा सटीक और मिसाइल डिफेंस से बचने में सक्षम बनाने का दावा किया गया है। हालांकि, इन क्षमताओं से जुड़े ईरानी दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में नहीं हुई है।

अमेरिकी युद्धपोतों ने क्यों बढ़ाई दूरी?

सितंबर की शुरुआत से ओमान की खाड़ी और अरब सागर के आसपास अमेरिकी बड़े युद्धपोतों की मौजूदगी में बदलाव की रिपोर्ट सामने आई है। सैटेलाइट तस्वीरों के आधार पर अमेरिकी नौसेना के कुछ बड़े जहाजों को ईरान के तट से दूर रखा गया है।

रिपोर्टों में इस बदलाव को ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता से जोड़कर देखा जा रहा है। खासतौर पर कासिम बसीर की करीब 1,200 किलोमीटर की घोषित रेंज के कारण अमेरिकी युद्धपोतों के लिए दूरी बनाए रखना जोखिम कम करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि, यह कहना कि कासिम बसीर ने सीधे अमेरिकी जहाजों को 1,200 किलोमीटर पीछे खदेड़ दिया, उपलब्ध स्वतंत्र जानकारी से साबित नहीं होता। ईरानी पक्ष ने अमेरिकी युद्धपोतों को निशाना बनाने में इस मिसाइल के इस्तेमाल का दावा किया है, जबकि स्वतंत्र विश्लेषणों में इसकी पुष्टि को लेकर सावधानी बरती गई है।

USS George Washington को निशाना बनाने का दावा

ईरानी अधिकारियों ने सितंबर में दावा किया था कि अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS George Washington को निशाना बनाने के लिए नई मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। एक अमेरिकी विश्लेषण के मुताबिक, ईरानी मीडिया ने इस हमले को कासिम बसीर से जोड़ा था।

हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार मिसाइल कैरियर से टकराई नहीं थी। ईरानी पक्ष की ओर से इसके आसपास गिरने का दावा किया गया था। इसलिए इसे अमेरिकी कैरियर को सीधे नुकसान पहुंचाने वाली सफल मिसाइल स्ट्राइक के तौर पर पेश करना अभी सही नहीं होगा।

बड़े युद्धपोतों के सामने लंबी दूरी की मिसाइल की चुनौती

आधुनिक समुद्री युद्ध में एयरक्राफ्ट कैरियर और बड़े युद्धपोत बेहद महत्वपूर्ण सैन्य संपत्ति माने जाते हैं। लेकिन लंबी दूरी की सटीक मिसाइलें इनके लिए एक अलग तरह का जोखिम पैदा करती हैं।

इसी वजह से किसी महंगे युद्धपोत को संभावित मिसाइल रेंज में रखने के बजाय उससे दूरी बनाए रखना सैन्य जोखिम कम करने का तरीका हो सकता है। कासिम बसीर की घोषित 1,200 किलोमीटर रेंज के कारण यह मिसाइल ईरान के आसपास तैनात समुद्री ताकत के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती के तौर पर चर्चा में है।

ईरान-अमेरिका तनाव में नया मोर्चा

होर्मुज स्ट्रेट और आसपास के समुद्री इलाकों में पहले से ही तनाव बना हुआ है। ऐसे में अमेरिकी युद्धपोतों की तैनाती में बदलाव और ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता चर्चा का नया विषय बन गई है।

ईरान इसे अपनी सैन्य क्षमता का प्रदर्शन बता रहा है, जबकि अमेरिकी पक्ष की गतिविधियों को जोखिम कम करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। फिलहाल सबसे अहम बात यह है कि कासिम बसीर की वास्तविक युद्धक क्षमता और अमेरिकी नौसेना की तैनाती पर उसका कितना असर पड़ा है, यह आने वाले समय में और स्पष्ट हो सकता है।

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