समाचार-गढ़ 27 सितंबर, 2026।
पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में शनिवार को एक बड़ा आत्मघाती हमला हुआ। डेरा इस्माइल खान जिले के दराजिंदा इलाके में एक विस्फोटक से लदी गाड़ी को संयुक्त पुलिस और कस्टम चेकपोस्ट से टकरा दिया गया। धमाका इतना जोरदार था कि चेकपोस्ट को भारी नुकसान पहुंचा। शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई, जबकि बाद की रिपोर्टों में 13 लोगों की मौत और दर्जनों लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
विस्फोट के बाद एंबुलेंस पर भी हमला
हमले के बाद राहत और बचाव दल घायलों और मृतकों को अस्पताल ले जा रहे थे। इसी दौरान हथियारबंद हमलावरों ने एक रेस्क्यू 1122 एंबुलेंस पर फायरिंग कर दी।
पाकिस्तानी अधिकारियों के मुताबिक, इस हमले में रेस्क्यूकर्मी भी मारे गए और अन्य घायल हुए। अलग-अलग रिपोर्टों में मृत रेस्क्यूकर्मियों की संख्या एक और दो बताई गई है।
चेकपोस्ट को बनाया गया निशाना
यह हमला अमन मेला चेकपोस्ट पर हुआ, जो डेरा इस्माइल खान- क्वेटा रोड पर दराजिंदा इलाके में स्थित है। रिपोर्टों के मुताबिक, विस्फोटक से लदी ट्रैक्टर-ट्रॉली को चेकपोस्ट से टकराया गया।
हमले में सुरक्षाकर्मियों के साथ आम नागरिक भी प्रभावित हुए। मृतकों में महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल बताए गए हैं।
TTP ने ली हमले की जिम्मेदारी
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है। TTP पाकिस्तान में सक्रिय प्रतिबंधित आतंकी संगठन है। हाल के वर्षों में खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान में हिंसक हमलों में बढ़ोतरी देखी गई है।
जरदारी और शहबाज शरीफ ने की निंदा
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हमले की निंदा की है। दोनों ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।
जरदारी ने नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने की निंदा करते हुए अधिकारियों को घायलों को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
अफगानिस्तान को लेकर पाकिस्तान के आरोप
इस हमले के बाद पाकिस्तान में एक बार फिर अफगानिस्तान से जुड़े आतंकवाद का मुद्दा सामने आया है। पाकिस्तानी अधिकारी लंबे समय से अफगानिस्तान की तालिबान सरकार पर TTP के सदस्यों को अपने क्षेत्र से गतिविधियां चलाने की अनुमति देने का आरोप लगाते रहे हैं।
वहीं, अफगान तालिबान इन आरोपों से इनकार करता रहा है और कहता है कि उसकी जमीन का इस्तेमाल दूसरे देशों के खिलाफ हमलों के लिए नहीं होने दिया जाता।








