समाचार-गढ़, 29 मई 2023। श्रीडूंगरगढ़ शहर के श्रीडूंगरगढ़ पुस्तकालय सभागार में विगत सात दिनों से चल रही लेखन प्रशिक्षण कार्यशाला में जिज्ञासु नव लेखकों को सम्बोधित करते हुए वरिष्ठ साहित्यकार श्याम महर्षि ने कहा कि बेशक साहित्य को सीखने का कोई पाठ्यक्रम नहीं होता, पर जो निरंतर श्रेष्ठ लिखता है, उसका साहित्य एक दिन अवश्य पाठ्यक्रम में पढाया जाता है। साहित्यकार को अपना कर्म यह सोचकर करना चाहिए कि वह सब का हित कर रहा है। साहित्य की परिभाषा भी यही है। एक साहित्यकार को निरंतर अपनी भाषा परिष्कृत करते रहना चाहिए। गरिष्ठ शब्दों से परहेज नहीं करना चाहिए। शब्दकोश में पड़े पड़े शब्द मृत होने लगते हैं, साहित्यकार शब्दों का उचित प्रयोग कर उन्हें प्राणवान बनाता है।
आज कार्यशाला में नव लेखकों को 100 नए शब्दों से अर्थ सहित परिचित करवाया गया। प्रयास यह किया गया कि उनकी शब्दावली का विस्तार हो। कार्यशाला संयोजक डाॅ चेतन स्वामी ने कहा कि कितनी विडम्बना की बात है कि स्कूल महाविद्यालयों में लगभग बीस वर्ष व्यतीत करने के बावजूद विद्यार्थी दो चार हजार शब्दों से भी परिचित नहीं हो पाता है। इससे अभिव्यंजना शक्ति कौशल विहीन हो जाती है। भाषा का सुविज्ञ व्यक्ति जीवन भर खुशनुमा अभिमान में जीता है। शब्दों की दरिद्रता जीवन भर हीन बनाती है।
नव लेखक अंबिका जैन ने अपनी स्व रचित रचना प्रस्तुत की, जिसमें नारी मन के अंतर्द्वंद्व को प्रस्तुत किया गया।











