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ईरान-इजराइल युद्ध का असर: 2200 स्टेपी ईगल ने बीकानेर में डाला डेरा, एक्सपर्ट्स हैरान

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ईरान-इजराइल युद्ध का असर: 2200 स्टेपी ईगल ने बीकानेर में डाला डेरा, एक्सपर्ट्स हैरान

समाचार गढ 28 मार्च 2026। मध्य-पूर्व में चल रहे Iran–Israel conflict के असर अब राजस्थान में भी देखने को मिल रहे हैं। पहली बार एक साथ करीब 2200 Steppe Eagle (बाज) बीकानेर के जोड़बीड़ क्षेत्र में पहुंचे हैं, जो पिछली संख्या से लगभग दोगुना है।

विशेषज्ञों के अनुसार, ये पक्षी हर साल रूस और मंगोलिया से उड़कर ईरान-इराक क्षेत्र की ओर जाते थे, लेकिन इस बार युद्ध और अस्थिरता के कारण उनका प्राकृतिक आवास प्रभावित हुआ है। इसी वजह से ये झुंड भारत के सुरक्षित क्षेत्रों में रुक गए हैं।

राजस्थान बना नया ठिकाना

करीब 25 दिन की लंबी यात्रा के बाद इन पक्षियों के दो बड़े झुंड बीकानेर के जोड़बीड़ और Desert National Park में देखे गए हैं। डेजर्ट नेशनल पार्क में भी करीब 1700 स्टेपी ईगल मौजूद हैं। इनमें से लगभग 70% किशोर (जुवेनाइल) हैं, जिनकी उम्र 2 साल से कम है।

एक्सपर्ट बोले- बड़ा संकेत और खतरा दोनों

बीकानेर के वाइल्डलाइफ विशेषज्ञ Dr. Daulal Bohra के अनुसार, पिछले 15 साल से यह प्रजाति राजस्थान में आ रही है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या पहले कभी नहीं देखी गई।

उन्होंने इसे “रेड फ्लैग” बताते हुए कहा कि एक साथ इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों का आना पारिस्थितिक असंतुलन का संकेत हो सकता है। इससे भोजन की कमी और संक्रामक बीमारियों, खासकर बर्ड फ्लू का खतरा भी बढ़ सकता है।

दवाइयों से पहले भी हो चुकी है मौत

साल 2008 में जोड़बीड़ में 40 स्टेपी ईगल की मौत हो चुकी है। जांच में सामने आया था कि मृत पशुओं में दी गई Diclofenac, Nimesulide और Aceclofenac जैसी दवाओं के अवशेष खाने से इनकी जान गई थी। अब पर्यावरण प्रेमी इन दवाओं पर रोक की मांग कर रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता

International Union for Conservation of Nature (IUCN) ने स्टेपी ईगल को रेड लिस्ट में “विलुप्तप्राय” श्रेणी में रखा है। वहीं, 62 देशों की भागीदारी से 2025 में इस प्रजाति के संरक्षण के लिए ग्लोबल एक्शन प्लान भी तैयार किया गया है, जिसमें जोड़बीड़ को महत्वपूर्ण संरक्षण स्थल माना गया है।

भारत Convention on Migratory Species का सदस्य होने के नाते इस अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। स्टेपी ईगल को “अम्ब्रेला स्पीशीज” भी माना जाता है, यानी इसके संरक्षण से कई अन्य प्रजातियों को भी फायदा मिलता है।

अप्रैल तक रहेंगे मेहमान

विशेषज्ञों के अनुसार, ये स्टेपी ईगल अप्रैल के अंत तक राजस्थान में रुकेंगे और उसके बाद अपने मूल क्षेत्रों की ओर लौट जाएंगे। फिलहाल, इनकी बढ़ती संख्या ने जहां राजस्थान को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई है, वहीं पर्यावरण संतुलन को लेकर नई चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।

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