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ईरान युद्ध में फंसे भारतीय छात्र: तेहरान से बेटी का रोते हुए फोन, ‘अब्बू… हॉस्टल के पास मिसाइलें गिर रही हैं’

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समाचार गढ़ 11 मार्च 2026। ईरान-अमेरिका-इजराइल तनाव के बीच 12वें दिन भी जारी हमले, खाड़ी देशों में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा को लेकर बढ़ी चिंता; 12 हजार भारतीयों ने स्वदेश लौटने की लगाई अर्जी

ईरान में जारी युद्ध के बीच वहां पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों और उनके परिवारों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। कश्मीर के अनंतनाग निवासी बिलाल अहमद भट्ट की बेटी तेहरान में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही है। 9 मार्च की रात करीब 3 बजे बेटी का फोन आया। वह रोते हुए बोली कि हॉस्टल के आसपास मिसाइलों के गिरने और बमबारी की आवाजें आ रही हैं और उसे नहीं पता कि रात कैसे कटेगी।

बिलाल के मुताबिक, ईरान में रह रहे भारतीयों के लिए इस तरह की कॉल अब आम होती जा रही हैं। हर सुबह इस राहत के साथ शुरू होती है कि रात सुरक्षित गुजर गई, लेकिन आगे क्या होगा, इसकी चिंता हर समय बनी रहती है।

युद्ध का 12वां दिन, 1300 से ज्यादा मौतें
ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहा संघर्ष अब 12वें दिन में पहुंच चुका है। इस दौरान ईरान में करीब 1300 लोगों की मौत हो चुकी है। हालात फिलहाल शांत होने के संकेत नहीं दे रहे हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण करने की बात कही है, जबकि ईरान लगातार इजराइल और मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर हमले कर रहा है।

12 हजार भारतीयों ने वापसी की मांग की
भारत ने इस युद्ध में किसी भी पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं किया है, लेकिन देश के सामने दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहली—मिडिल ईस्ट में रह रहे भारतीयों की सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर उन्हें वापस लाना। दूसरी—खाड़ी देशों से आने वाली तेल और गैस की सप्लाई पर पड़ने वाला संभावित असर।

मिडिल ईस्ट के देशों में लगभग 90 लाख भारतीय रहते हैं। इनमें से करीब 12 हजार लोगों ने भारत सरकार से स्वदेश लौटने की इच्छा जताई है। सबसे ज्यादा आवेदन संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आए हैं।

ईरान में फंसे करीब 2 हजार कश्मीरी छात्र
बिलाल अहमद अपनी बेटी की पहचान उजागर नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि मीडिया में नाम आने से बेटी को खतरा हो सकता है। उन्होंने बताया कि उनकी बेटी का 25 फरवरी को एग्जाम था और 3 मार्च को भारत लौटने का टिकट भी बुक था, लेकिन उससे पहले ही युद्ध शुरू हो गया।

उन्होंने बताया कि पिछले कई दिनों से बेटी से कभी-कभार ही बात हो पा रही है। जिस इमारत में वह रहती थी, उसके आसपास भी मिसाइल हमले हुए थे। भारतीय दूतावास ने उसे और उसके साथियों को हॉस्टल से निकालकर किसी सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया है।

“यहां अब रहना मुश्किल हो गया”
जम्मू-कश्मीर के बडगाम की रहने वाली 24 वर्षीय महक हसन ईरान की उरमिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में चौथे सेमेस्टर की छात्रा हैं। उनका कहना है कि हालात इतने खराब हो चुके हैं कि वहां रहना मुश्किल हो गया है। हर पल डर का माहौल है और परिवार वालों की चिंता भी लगातार बढ़ रही है।

महक के मुताबिक, दूतावास की ओर से कहा गया है कि जैसे भी संभव हो, देश छोड़ने की कोशिश करें, लेकिन छात्रों के लिए यह आसान नहीं है क्योंकि सुरक्षित रास्ता साफ नहीं है।

परिवारों की सरकार से अपील
श्रीनगर के निवासी राजा आसिफ की बेटी भी तेहरान में एमबीबीएस कर रही है। उनका कहना है कि बच्चे पढ़ाई के लिए विदेश गए थे, लेकिन अब वे युद्ध के बीच फंस गए हैं। बेटी से जब भी बात होती है तो वह बताती है कि चारों तरफ धमाकों की आवाजें सुनाई दे रही हैं।

उन्होंने विदेश मंत्रालय से अपील की है कि सबसे पहले छात्रों को सुरक्षित भारत लाया जाए।

हॉस्टल से 300 मीटर दूर हुआ मिसाइल हमला
जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स यूनियन के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुलनेमानी के अनुसार उरमिया शहर में हाल ही में हवाई हमले हुए हैं। वहां पढ़ रहे कश्मीरी छात्रों ने बताया कि उनके हॉस्टल से करीब 300 मीटर दूर मिसाइल हमला हुआ था, जिससे पूरी बिल्डिंग हिल गई।

छात्रों के मुताबिक आसमान में लगातार लड़ाकू विमानों की आवाजें सुनाई देती हैं और आसपास के कई लोग शहर छोड़कर जा रहे हैं। यूनियन ने विदेश मंत्रालय से छात्रों की सुरक्षित वापसी के लिए तुरंत कदम उठाने की मांग की है।

सरकार विकल्पों पर कर रही विचार
विदेश मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार खाड़ी देशों में मौजूद भारतीय दूतावासों से डेटा जुटाया गया है कि कितने लोग भारत लौटना चाहते हैं। लगभग 12 हजार लोगों ने आवेदन दिया है। इन्हें सुरक्षित निकालने के लिए सरकार अलग-अलग विकल्पों पर विचार कर रही है और इसके लिए विशेष डेस्क भी बनाई गई है।

ईरान से निकालना सबसे कठिन
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मोहसिन रजा खान का कहना है कि ईरान में फंसे भारतीयों को निकालना सबसे चुनौतीपूर्ण काम होगा। वहां के एयरपोर्ट और एयरस्पेस फिलहाल बंद हैं। ऐसे में लोगों को जमीनी रास्ते से पहले अजरबैजान या इराक पहुंचना पड़ सकता है। पाकिस्तान और अफगानिस्तान का रास्ता सुरक्षित नहीं माना जा रहा।

युद्ध लंबा खिंचा तो बढ़ेगी आर्थिक चिंता
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सेंटर फॉर इंटरनेशनल स्टडीज के प्रोफेसर राजन राज के अनुसार पश्चिम एशिया में फंसे भारतीयों की सुरक्षा फिलहाल सबसे बड़ी चिंता है। खाड़ी देशों में बड़ी संख्या में भारतीय काम करते हैं और यदि युद्ध लंबा चला तो तेल की कीमतों में बढ़ोतरी, रुपये पर दबाव और रोजगार जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत को युद्धविराम के लिए कूटनीतिक स्तर पर पहल करनी चाहिए ताकि वहां रह रहे भारतीय सुरक्षित रह सकें।

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