समाचार-गढ़ 3 अक्टूबर, 2026।
Mumbai News: मुंबई के मलाड इलाके से हैरान करने वाला मामला सामने आया है। कोंकणी पाडा स्थित एक डे-केयर सेंटर के फ्रीजर से पुलिस ने 78 वर्षीय बुजुर्ग का शव बरामद किया है। पुलिस के मुताबिक, शव को चार साल से ज्यादा समय से फ्रीजर में रखा गया था। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
बदबू आने पर सामने आया मामला
यह पूरा मामला सोमवार शाम उस वक्त सामने आया, जब स्थानीय लोगों ने परिसर से तेज बदबू आने की शिकायत की। इसके बाद कुरार पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और सेंटर की तलाशी ली। तलाशी के दौरान पुलिस को फ्रीजर के अंदर बुजुर्ग का शव मिला।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, बुजुर्ग की मौत 9 जून 2022 को कैंसर के कारण हुई थी। इसके बाद कथित तौर पर शव को इसी सेंटर में फ्रीजर के अंदर रखा गया था।
‘पापा फिर जिंदा होंगे’… पुनर्जन्म की उम्मीद?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिवार के कुछ सदस्यों को उम्मीद थी कि बुजुर्ग किसी तरह दोबारा जीवित हो सकते हैं। मृतक का एक बेटा मुंबई में रहता है, जबकि उनकी बेटी अमेरिका में रहती है। बताया जा रहा है कि बेटी अपने पिता के काफी करीब थी और पुनर्जन्म में विश्वास रखती थी।
इसी उम्मीद के चलते शव का अंतिम संस्कार करने के बजाय उसे सुरक्षित रखने का फैसला किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, इस पूरे मामले की परिस्थितियों की पुलिस जांच कर रही है।
शव रखने के लिए हर महीने 1.60 लाख रुपये का किराया
रिपोर्ट्स के मुताबिक, परिवार शव को सेंटर में रखने के लिए हर महीने करीब 1.60 लाख रुपये किराए के तौर पर देता था। पुलिस को मृतक का डेथ सर्टिफिकेट और बीएमसी में जमा किए गए दस्तावेज भी सौंपे गए हैं।
जांचकर्ता अब इन रिकॉर्ड्स की जांच कर रहे हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि शव को सेंटर में कब लाया गया और उसे इतने लंबे समय तक फ्रीजर में रखने की व्यवस्था किस तरह की गई थी।
डे-केयर सेंटर के मैनेजमेंट की भूमिका भी जांच के घेरे में
शव मिलने के बाद पुलिस डे-केयर सेंटर के संचालकों और मैनेजमेंट की भूमिका की भी जांच कर रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि सेंटर के लोगों को शव के बारे में जानकारी थी या नहीं और अगर थी तो उसे इतने लंबे समय तक वहां रखने की अनुमति कैसे दी गई।
रिपोर्ट्स के अनुसार, शव मिलने से करीब तीन महीने पहले बीएमसी ने इस परिसर को सील कर दिया था। ऐसे में अब यह भी जांच का विषय है कि सीलिंग की कार्रवाई के दौरान परिसर की पूरी तरह तलाशी ली गई थी या नहीं।
पूर्व कॉर्पोरेटर ने उठाए सवाल
पूर्व कॉर्पोरेटर विनोद मिश्रा ने सीलिंग प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि जब परिसर को सील किया गया था, तब उसकी पूरी तरह जांच क्यों नहीं की गई।
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि सीलिंग के समय सिविक अधिकारियों को फ्रीजर के अंदर शव होने की जानकारी थी या नहीं।
कूपर अस्पताल के विशेषज्ञों से ली जा रही सलाह
पुलिस शव की स्थिति और उसे इतने लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाने से जुड़े सवालों को समझने के लिए मुंबई के कूपर अस्पताल के विशेषज्ञों की मदद ले रही है।
जांचकर्ताओं की ओर से शव को फ्रीजर में रखने की परिस्थितियों और इस मामले में किसी कानूनी उल्लंघन की संभावना की भी जांच की जा रही है। पुलिस ने अभी तक मेडिकल जांच से जुड़े नतीजे सार्वजनिक नहीं किए हैं।








