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राजस्थान दिवस साप्ताहिक महोत्सवः भव्य सांस्कृतिक संध्या रविवार को रवींद्र रंगमंच पर सायं 7 बजे से पद्मश्री गीता चंद्रन की भरतनाट्यम की प्रस्तुति होगी बेहद खास

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राजस्थान दिवस साप्ताहिक महोत्सवः भव्य सांस्कृतिक संध्या रविवार को रवींद्र रंगमंच पर सायं 7 बजे से
पद्मश्री गीता चंद्रन की भरतनाट्यम की प्रस्तुति होगी बेहद खास
बीकानेर, 29 मार्च। राजस्थान दिवस साप्ताहिक महोत्सव की श्रृंखला में 30 मार्च को रवीन्द्र रंगमंच पर सायं 7 बजे से भव्य सांस्कतिक संध्या में पद्मश्री गीता चंद्रन की भरतनाट्यम की प्रस्तुति बेहद खास होगी।
नगर निगम आयुक्त मयंक मनीष ने बताया कि राज्य सरकार के निर्देशानुसार जिला प्रशासन तथा पर्यटन विभाग द्वारा आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम के लिए श्रीमती चंद्रन रविवार को ही बीकानेर आएंगी। नाट्यवृक्ष संस्थान की संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री गीता चंद्रन राजस्थान की समृद्ध परंपरा को शब्दांजलि स्वरूप मीरा का अद्भुत भजन प्रस्तुत करेंगी। साथ ही हवेली परंपरा से जुड़े एक संकीर्तन की प्रस्तुति दी जाएगी, जो राजस्थान और उत्तर प्रदेश को कृष्ण भक्ति से जोड़ता है।
कार्यक्रम में राजस्थान के विभिन्न अंचलों से आने वाले राजस्थानी लोक कलाकारों द्वारा चरी नृत्य, घूमर नृत्य, राजस्थानी लोक गायन, सूफी गायन, मयूर नृत्य व फूलों की होली, चकरी नृत्य की प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

पद्मश्री गीता चंद्रन: एक परिचय
पद्मश्री गीता चंद्रन, संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्राप्त विदुषी हैं।
भारतीय शास्त्रीय नृत्य की दुनिया में आज की अग्रणी शख्सियतों में से एक, गीता चंद्रन कुशल नृत्य गुरु, कोरियोग्राफर और कर्नाटक गायिका हैं। गीता चंद्रन की भरतनाट्यम यात्रा की शुरुआत 5 वर्ष की उम्र में उनके पहली गुरु श्रीमती स्वर्णा सरस्वती के मार्गदर्शन में हुई, जो पारंपरिक परंपरा से संबंधित थी। पद्मश्री गीता ने भरतनाट्यम पर अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी है, जहां अभिनय की बारीकियों को अत्यंत चुनौतीपूर्ण नृत्य अनुक्रमों के साथ संतुलित किया गया है। उनके गहन प्रशिक्षण और कर्नाटक संगीत के प्रति गहरी समझ ने उनके नृत्य को एक अनूठा रंग और गहराई प्रदान की है। व्यापक रूप से प्रशंसित कलाकार और प्रमुख प्रदर्शनकर्ता के रूप में, गीता चंद्रन भरतनाट्यम में अपनी गहरी कौशल को ‘फोर्स मल्टीप्लायर’ के रूप में उपयोग करती हैं।
गीता चंद्रन नाट्य वृक्षा, नई दिल्ली की संस्थापक-अध्यक्ष हैं। जहां वर्ष 1991 से उन्होंने कला शिक्षा, मार्गदर्शन और युवा कलाकारों को प्रोत्साहित किया है। गीता की समग्र शिक्षण पद्धति शास्त्रीय नृत्य शिक्षा को अन्य विविध विषयों और मूल्यों के साथ जोड़ती है। श्रीमती गिरा पिछले 51 वर्षों से भरतनाट्यम की सतत प्रस्तुतियां दे रही हैं।
इस दौरान उन्हें पद्मश्री (2007), केंद्रीय संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार (2016), टैगोर नेशनल फैलोशिप (2018), नृत्य चूड़ामणि (2024)–श्रीकृष्ण गाना सभा, चेन्नई द्वारा सम्मान प्राप्त किए हैं।
गीता चंद्रन ने वर्ष 2022, 2023 और 2024 के सेरेन्डिपिटी आर्ट्स फेस्टिवल में नृत्य को क्यूरेट किया है और 2025 में भी क्यूरेटर रहेंगी। गीता द सेंटर फॉर पीस एंड परफॉर्मिंग आर्ट्स (रोम स्थित अंतरराष्ट्रीय एनजीओ) की दक्षिण एशिया में सांस्कृतिक राजदूत भी हैं।

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