टीएमसी में बढ़ी सियासी हलचल, यूसुफ पठान को लेकर दावों और आरोपों से बढ़ा सस्पेंस
कोलकाता | समाचार गढ़
पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर कथित असंतोष और सांसदों की बगावत की खबरों के बीच बहरामपुर से सांसद यूसुफ पठान का नाम चर्चा के केंद्र में आ गया है। टीएमसी सांसद काकोली घोष दस्तीदार के एक दावे और सांसद महुआ मोइत्रा की तीखी प्रतिक्रिया ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी है।
काकोली घोष दस्तीदार ने दावा किया है कि लोकसभा अध्यक्ष को लिखे गए पत्र में यूसुफ पठान का नाम भी शामिल है। उनके अनुसार कुछ सांसद सदन में अलग बैठने और एनडीए को समर्थन देने के पक्ष में हैं। काकोली ने यह भी दावा किया कि टीएमसी के कई सांसद उनके साथ हैं और यूसुफ पठान भी इस समूह का हिस्सा हैं।
दूसरी ओर, महुआ मोइत्रा ने यूसुफ पठान पर निशाना साधते हुए कहा कि यदि कोई सांसद टीएमसी छोड़कर भाजपा या एनडीए के साथ जाना चाहता है तो उसे पहले अपने पद से इस्तीफा देकर जनता के बीच दोबारा जनादेश लेना चाहिए। महुआ ने कहा कि 2024 का जनादेश टीएमसी के नाम पर मिला था, न कि एनडीए के लिए।
यूसुफ पठान की चुप्पी बनी चर्चा का विषय
इन दावों और आरोपों के बीच यूसुफ पठान की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनकी चुप्पी ने राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे दिया है। हालांकि, उन्होंने न तो किसी बागी गुट का समर्थन किया है और न ही टीएमसी छोड़ने को लेकर कोई सार्वजनिक बयान दिया है।
गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने यूसुफ पठान को राजनीति में उतारते हुए बहरामपुर सीट से उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी को हराकर जीत दर्ज की थी।
पहले भी सुर्खियों में रहे थे यूसुफ
कुछ समय पहले ऐसी खबरें भी सामने आई थीं कि ममता बनर्जी के संभावित उपचुनाव लड़ने को लेकर यूसुफ पठान से इस्तीफे की चर्चा हुई थी। हालांकि बाद में स्वयं यूसुफ पठान ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा था कि पार्टी की ओर से उन्हें इस्तीफा देने के लिए कोई आधिकारिक अनुरोध नहीं किया गया। वहीं पूर्व भारतीय क्रिकेट कप्तान सौरव गांगुली ने भी इस मामले से जुड़े दावों को खारिज कर दिया था।
सबकी निगाहें यूसुफ के अगले कदम पर
टीएमसी के भीतर जारी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच अब सबकी नजर यूसुफ पठान पर टिकी हुई है। काकोली घोष के दावों और महुआ मोइत्रा के बयानों के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि यूसुफ पठान इस पूरे विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं। फिलहाल उनकी चुप्पी ने बंगाल की राजनीति में सस्पेंस बढ़ा दिया है।
नोट: यूसुफ पठान के किसी बागी गुट में शामिल होने के दावे संबंधित नेताओं के बयानों पर आधारित हैं। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।









